हाइकोर्ट ने 2012 में करछना भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया परंतु सरकार अभी भी लगी है जमीन हड़पने के खेल में !


13 मार्च  2018 को किसान कल्याण संघर्ष समिति करछना एवं जन संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले इलाहबाद जिले के करछना में राज्य दमन और जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया। ज्ञात रहे कि करछना के किसान पिछले 2010 से जेपी पॉवर प्लांट के भूमि अधिग्रहण के विरोध में संघर्ष कर रहे है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2012 को भूमि अधिग्रहण को रद्द करते हुए कहा कि किसान अपना मुआवजा लौटा कर जमीन वापस ले ले। अब किसान  प्रशासन से पूछा रहा है कि वो अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं मुआवजे की रकम कहा जमा करवाएं।

मौजूदा समय में किसान कल्याण पुनर्वास संघर्ष समिति के नेतृत्व में विगत आठ सालों से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के कचरी करछना इलाके में जारी जनसंघर्ष भूमि की लूट के खिलाफ लड़ाई का एक ज्वलंत प्रतीक है। अब यह लड़ाई न सिर्फ प्लांट क्षेत्र की है, बल्कि यह जबरिया भूमि अधिग्रहण विरोधी लड़ाई बन गयी है।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की नीति के तहत प्रदेश की सरकार गैर कानूनी ढंग से कचरी करछना पावर प्लांट के लिए आठ गाँवों की जमीनों का अर्जन कर रही थी। उस पर कानून के तहत अगुवाई कर रहे किसानों से सूबे की सरकार किसानों के संघर्ष व माननीय उच्च न्यायालय में हार गई! देश के अन्दर करचरी का किसान आन्दोलन बाइस अगस्त दो हजार दस से (22/08/2010) तमाम दुश्वारियों के बावजूद अबाद गति से चल रहा है।
9 सितम्बर 2015 को राज्य सरकार की हिंसा के बाद 2 साल फरारी काटने के बाद सितम्बर 2017 में अगुवाकार तथा किसान कल्याण संघर्ष समिति, करछना के अध्यक्ष राजबहादुर पटेल कोर्ट में सरेंडर किया जिसके 4 माह बाद  13 दिसंबर 2017 को राजबहादुर पटेल को इलाहाबाद सेशन अदालत ने जमानत दे दी।

राजबहादुर पटेल पर कुल 18 मुकदमें दर्ज थे उनमें से 14 मुकदमों में 50,000-50,000 के 14 मुचलके, 2 मुकदमों में एक-एक लाख के दो मुचलके तथा दो मुकदमों में 20,000 के दो मुचलके पर जमानत दी गई है।
गौरतलब है कि जे.पी. पॉवर प्लांट के लिए उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले की करछना तहसील में चल रहे जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में चल रहा आंदोलन 9 सितम्बर 2015 को हुए बर्बर पुलिसिया दमन के दौरान राजबहादुर पटेल आंदोलन को चलाए रखने के लिए भूमिगत हो गए थे। जिला प्रशासन ने पटेल की गिरफ्तारी हेतू उन पर 12000 रुपए का इनाम घोषित किया था। किसानों पर दबाव बनाकर आंदोलन खत्म कराने के लिए 44 ग्रामीणों के उपर तीन फ़र्जी मुकदमे दायर किए गए-
  • अपराध संख्या 369/15 धारा, 143, 436 आईपीसी, 7 क्रिमिनल अमेन्डमेंड एक्ट 
  • अपराध संख्या 370/15 धारा 147, 148 आईपीसी, 7 क्रिमिनल अमेन्डमेन्ट एक्ट 
  • अपराध संख्या 371/15 धारा 147, 148, 149, 307, 286, 353, 332, 336, आईपीसी, 7 क्रिमिनल अमेन्डमेंड एक्ट
लगभग 21 महीने भूमिगत रहने के पश्चात राजबहादुर पटेल ने अगस्त 2017 को इलाहबाद जिला न्यायालय में सरेंडर कर दिया जहां 4 महीने जेल में रहने के पश्चात अंततः उन्हें 13 दिसंबर 2017 को जमानत मिल गई।
राजबहादुर पटेल समेत करछना आंदोलन के सभी किसानों का यह दमन तथा जमानत मिलने में देरी इस देश के शासक वर्ग के कॉर्पोरेट समर्थित चरित्र को तीखे रूप में सामने लाकर रख देती है जहां वह चंद पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए न केवल देश के किसानों से उनकी जमीनें छीन रही है बल्कि उनके खिलाफ चल रहे उनके आंदोलनों को तोड़ने के लिए कानून को ढाल बना रही हैं।

जनसभा की शुरुआत किसान कल्याण संघर्ष समिति, करछना के संयोजक राजबहादुर पटेल ने किया। राजबहादुर पटेल ने सभा में आए हुए लोगों का स्वागत करते हुए आंदोलन की मौजूदा स्थिति का वर्णन किया तथा इस बात को दोहराया कि व्यापक आबादी अभी भी इस बात पर अडिग है कि वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।

जन संघर्ष समन्वय समिति के सहसयोजक रामाश्रय यादव ने कहा कि आज इस देश की मेहनतकश आबादी जो इस देश को चलाती है वही अपने अधिकारों से महरूम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा शोषणकारी तंत्र तभी बदलेगा जब इस देश का मजदूर किसान अपने संसाधनों पर अधिकार का दावा पेश करेगा। ऐसा गैर-बराबरी पर आधारित समाज, जिसमें दुनिया की समस्त धन-संपदा का 90 प्रतिशत हिस्सा 100 परिवारों के हाथों में कैद है वह जीने लायक नहीं है और जितनी जल्दी हो सके इस इस समाज को बदल देना चाहिए।

किसान कल्याण संघर्ष समिति, करछना के उमाशंकर कहा कि करछना का यह संघर्ष देश के अन्य जनसंघर्षों को प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज इस सभा में देश के विभिन्न हिस्सों- उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली इत्यादि राज्यों से जनसंघर्षों के प्रतिनिधि आए हैं जो दिखाता है कि संघर्षों की एकता बढ़ रही है। उमाशंकर ने कहा कि करछना के किसानों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उनका जमीनों पर कब्जा है। कागजों में चाहे जो भी होता रहे लेकिन यदि किसान अपनी जमीनों पर डटे रहे तो उन्होंने कोई भी यहां से हटा नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि करछना के साथ पूरे देश के संघर्ष खड़े हैं और सभी एक-दूसरे की लड़ाई में सहयोग करते रहते रहेंगे।

जन संघर्ष समन्वय समिति के सयोजक कुमार चन्द मार्डी ने कहा कि इस देश में ऐसी लड़ाई किसानों ने दो बार जीती है- पहली नंदीग्राम में और दूसरी सिंगूर में। और उनकी जीत देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि आप की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने आगे कहा कि जमीन की लड़ाई हम लड़ने नहीं गए बल्कि वह आए हैं हमारी जमीनें छीनने। उन्होंने कहा कि मैं पॉवर प्लांट का बिल्कुल विरोधी नहीं हूं वह बनना चाहिए लेकिन वह जे.पी. के घर में बनना चाहिए हमारी जमीनों पर नहीं।

सभा को समापन की तरफ बढ़ाते हुए किसान कल्याण संघर्ष समिति, करछना, के अध्यक्ष भारती जी ने सभी वक्ताओं तथा सभा में उपस्थित लोगों का धन्यवाद देते हुए जमीन न देने के संकल्प को दोहराया तथा आंदोलन को तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की।

आज सरकार देशी-विदेशी कंपनियों के लिए दलाल की भूमिका निभाते हुए देश की संप्रभुता को ही समाप्त करने पर तुली हुई है। सरकार की देशी-विदेशी कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण की इस परवर्ती का यह राज्य सम्मेलन घोर निंदा करता है। तथा सम्मेलन मांग करता है कि-
  • राज्य में जबरन किसी भी तरह का भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाए।
  • करछना में प्रस्तावित जेपी के पॉवर प्लांट को रद्द करने के लिए इलाहबाद उच्च न्यायालय 13 अप्रैल 2012 के आदेश के तहत जबरन भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगायी जाये।
  • आंदोलनकारियों पर दायर फर्जी केसों को फौरन वापिस लिया जाए।
सभा को गाँव बचाओ आंदोलन के प्रेमनाथ गुप्ता, लोक शक्ति अभियान ओड़िसा के कल्याण आनंद, सेज विरोधी आंदोलन हिमाचल प्रदेश के दुलभ सिंह इतियादी ने भी सबोधित किया तथा सभा का संचालन इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट रविन्द्र सिंह ने किया।

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