मोदी सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा जमीन कब्जाने के मामले की जाँच हो : भाकपा-माले

भाकपा-माले ने किया केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा जमीन कब्जा मामले की जांच की मांग.

पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद व खेग्रामस राज्य सचिव गोपाल रविदास ने किया घटनास्थल का दौरा.

गिरिराज सिंह की बर्खास्तगी की मांग पर 10 फरवरी को राज्यव्यापी विरोध दिवस.

पटना 9 फरवरी 2018. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा दानापुर में श्री रामनारायण राम की जमीन पर कब्जा जमाने व गिरिराज पर हुए मुकदमे के सिलसिले में भाकपा-माले की एक उच्चस्तरीय जांच टीम ने आज घटनास्थल का दौरा किया. इस जांच टीम में पार्टी के पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद, राज्य कमिटी सदस्य व खेग्रामस के राज्य सचिव काॅ. गोपाल रविदास तथा पटना नगर कमिटी के नेता काॅ. बीके शर्मा शामिल थे. जांच टीम ने पीड़ित श्री रामनारायण राम के घरवालों से मुलाकात करके पूरे मामले की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की.

जांच टीम ने श्री रामनारायण राम की अनुपस्थिति में उनके पौत्र कार्तिक कुमार से बात की. जांच टीम को पता चला कि आजादी के पहले ही स्व. कोमल राम द्वारा बबक्करपुर में (आशोपुर के बगल का गांव) 2.66 एकड़ जमीन बालकुंवर देवी को उपहारस्वरूप प्रदान किया गया था. बालकुंवर देवी स्व. कोमल राम की नतिनी थीं. उनके चार पुत्र हैं - स्व. शिव प्रसाद, हरिनारायण राम, रामनारायण राम व श्याम नारायण राम. रामनारायण राम के तीन भाइयों ने अपनी जमीन बेच दी, जबकि रामनारायण राम सरकारी सेवा में थे और वह इलाका डूब क्षेत्र था, इसलिए वर्षों तक उन्होंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया. हाल के दिनों में उन्हें पता चला कि तत्कालीन सीओ की मिलीभगत से उनकी जमीन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित अन्य 33 लोगों ने जबरन हथिया ली है तो उन्होंने थाने में मुकदमा किया. जमीन के कुछ हिस्से पर ब्लू व्हेल स्कूल व एक अपार्टमेंट खड़ा है. शेष परती जमीन है. रामनारायण राम के हिस्से कुल 77 डिसमिल जमीन है

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि इस प्रकरण ने साबित कर दिया है कि गिरिराज सिंह पूरी तरह भ्रष्ट हैं और सार्वजनिक पद पर बने रहने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है. भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का दिखावा करती है. अपने विरोधियों के दमन के लिए तो सीबीआई से लेकर हर प्रकार की स्वायत्त संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है, लेकिन अपने मंत्रिमंडल में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देती है. जांच टीम को यह भी पता चला कि स्थानीय थाना ने इस घटना के मामले में किसी भी प्रकार के संज्ञान लेने से इंकार कर दिया, तब जाकर श्री रामनारायण राम ने द्वितीय सत्र न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट पटना में गिरिराज सिंह सहित 33 लोगों पर प्रतिवाद पत्र दर्ज कराया. विदित हो कि श्री रामनारायण राम सरकारी नौकरी में थे. वे लंबे समय तब फूड इंसपेक्टर थे. माले ने कहा है कि जब सरकारी पदों पर बैठे हुए दलित समुदाय के लोगों के साथ भी ऐसा अत्याचार हो रहा है, तो भाजपा-जदयू सरकार में आम दलित-गरीबों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

गिरिराज सिंह की बर्खास्तगी की मांग पर कल दिनांक 10 फरवरी को माले ने पूरे बिहार में विरोध दिवस आयोजित करने का फैसला किया है.

कुमार परवेज
कार्यालय सचिव, भाकपा-माले, बिहार

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