11 दिन बाद राजकुमार जेल से रिहा : वेदांता सोना खान से बारनवापारा अभ्यारण खतरे में, विरोध में संघर्ष का संकल्प


-तामेश्वर सिन्हा

छत्तीसगढ़, बलौदाबाजार, 4 फ़रवरी 2018। 11 दिन से जेल में बन्द  बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र के ग्राम रामपुर निवासी आदिवासी राजकुमार कौंध को आधी रात जमानत मिल गई। जमानत पर रिहा हुए राजकुमार कौंध सीधे अनिश्चितकालीन धरना स्थल पहुँचे जहाँ बार अभ्यारण  क्षेत्र की जनता ने राजकुमार का भव्य स्वागत किया  और आंदोलन को तेज करने के लिए व आरोपी को सजा दिलाने के लिए संकल्प लिया जब तक आरोपी गिरफ्तार नही  होता तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने की बात कही ।

राजकुमार ने कहा कि जब तक आरोपी रेंजर संजय रौतिया व वनकर्मी गिरफ्तार नही हो जाते तब तक  धरना में बैठूंगा।

विदित हो कि बया चौकी में पुलिस ने वन परिक्षेत्र अधिकारी बारनवापारा संजय रौतिया की रिपोर्ट पर राजकुमार पिता उज्वल कौंध 42 वर्ष निवासी रामपुर के विरुद्घ भादवि की धारा 294, 186, 332, 353 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था वहीं राजकुमार के विरुद्घ वन विभाग की ओर से भी भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 का धारा 26 के ख ज च का अपराध पंजीबद्घ किया गया है।

वही दूसरी ओर आदिवासी राजकुमार कौंध की झूठे केस में गिरफ्तारी का आरोप और जबरन मारपीट करने का आरोप वनअधिकारी पर लगा था ।

पिछले 13 दिनों से बारनवापारा अभ्यारण क्षेत्र के ग्रामीण बारनवापारा जन संघर्ष समिति, दलित आदिवासी मंच के कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए है । और आगे लड़ाई लड़ने की बात कह रहे है ।

आरोप है कि  राजकुमार के खिलाफ छूटे केस दर्ज करवा कर 25 तारिक को घायल राजकुमार को इलाज हेतु मेकाहारा ले जाते समय पुलिस अपने दल बल के साथ गिरफ्तार कर पुलिस रोब दिखाया गया जबकि राजकुमार सिर पर गंभीर चोट है और सिने मे दर्द है जबकी राजकुमार को इलाज का सकता जरूरत है वन विभाग के रेंजर संजय रौतिया को बचाने का प्रयास पुलिस प्रशासन द्वारा किया जा रहा है ।

गौरतलब हो कि बारनवापारा विस्थापन प्रभावित क्षेत्र ग्राम रामपुर के आदिवासी ग्रामीण राजकुमार कौंध को दिनांक 15 जनवरी को बारनवापारा अभ्यारण्य के ग्राम रामपुर में वन विभाग के रेंजर संजय रौतिया ने वन अमले के साथ मिलकर आदिवासी राजकुमार कौंध के साथ मारपीट करने का आरोप हैl यहाँ तक कि महिला और छोटे बच्चो के साथ भी मारपीट की गईl मारपीट की शिकायत लिखाने पीड़ित परिवार सहित आसपास के ग्रामीण जब थाने पहुचे तो रेंजर के खिलाफ मामला पंजीबद्ध करने की बजाये पीड़ित परिवार के खिलाफ ही वन विभाग के इशारे पर अपराध कायम किया गयाl पुलिस और वन विभाग दोनों ही रेंजर पर कार्यवाही करने की बजाये उसे बचाने का प्रयास रहे हैंl जानकारी के अनुसार पीड़ित आदिवासी ग्रामीण राजकुमार जो पहले से वन अधिकारी के मारपीट के दर्द से तड़प रहे थे, उन्हें इलाज के लिए रायपुर ले जाते वक्त पुलिस विभाग के द्वारा 4 गाड़ियों में आकर ग्राम झलप के पास गाड़ी को रोककर जबरन अपने साथ ले गए।

परिवारों का नहीं हो सका है विस्थापन

रामपुर के 7 परिवारों का विस्थापन आज भी नहीं हो सका है और सात परिवार रामपुर में ही निवासरत हैं और वन विभाग द्वारा आवंटित भूमि पर कृषि कार्य कर रहे हैं। विवादित प्रकरण होने के कारण विगत 3- 4 वर्षों से रामपुर में ही निवासरत है। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार  जिला स्थित बारनवापारा अभ्यारण क्षेत्र से लगी 1300 एकड़ भूमि को  भाजपा सरकार ने वेदांता कम्पनी को सोना निकालने के लिए दे दिया है। जहाँ से आदिवासियों को जबरन विस्थापित किया जा रहा है।  विरोध  कर रहे दलित आदिवासियों पर पुलिस-वनविभाग का भयंकर उत्पीड़न जारी है।

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