अखिल गोगोई राष्ट्रद्रोह के आरोप से मुक्त : 3 माह बाद जेल से रिहा


गुवाहाटी, 21 दिसम्बर, 2017 । कृषक मुक्ति संग्राम समिति के प्रमुख अखिल गोगोई को गौहाटी उच्च न्यायालय ने गुरुवार (21 दिसम्बर) को राष्ट्रद्रोह के आरोप से मुक्त कर दिया। इस मामले में आठ दिनों तक उच्च न्यायालय में चली सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय के अचिंत्यमल्ल बुजरबरुवा की एक सदस्यीय खंडपीठ ने अखिल गोगोई पर एनएसए के तहत लगे नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के आरोपों को खारिज कर दिया तथा असम सरकार के मुख्य सचिव तथा अखिल गोगोई की गिरफ्तारी से जुड़े पदाधिकारियों को इस संदर्भ में कई निर्देश दिए।

न्यायालय के फैसले के संबंध में टेलीफोन पर प्रतिक्रिया देते हुए असम पुलिस के एडीजीपी पल्लव भट्टाचार्य ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि पूरे फैसले का अध्ययन करने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जाता सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि पुलिस अखिल की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेगी। अगर उनकी गतिविधियां सामान्य होती हैं तो फिर कोई दिक्कत नहीं है। अगर कुछ भी संदिग्ध नजर आएगा तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि यह फैसला संभवतः टेक्निकल ग्राउंड पर ही आया। इसलिए पूरे फैसले को एक बार देखना होगा कि उसमें क्या-क्या बातें शामिल की गई हैं।

गोलाघाट जिले के मोरान थाना के केस के सिलसिले में बीते 13 सितम्बर को अखिल गोगोई को गिरफ्तार किया गया था। बीते 25 सितम्बर को अखिल गोगोई पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसएस) की धाराएं लगाई गई थीं। अखिल गोगोई के अधिवक्ता निलय दत्त तथा शांतनु बरठाकुर ने मीडिया को बताया कि असम सरकार अखिल गोगोई के प्रति अन्याय कर रही थी और रासुका कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अखिल गोगोई को काफी समय तक केस के बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही थी। इस पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को तथा इससे जुड़े पदाधिकारियों को इस संदर्भ में नोटिस भेजा है।

वहीं अखिल गोगोई के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि गुरुवार को डिब्रूगढ़ थाने में दर्ज प्राथमिकी के मामले में अखिल गोगोई की जमानत पर सुनवाई चल रही है। इस मामले में जमानत मिलने के बाद अखिल गोगोई की जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। अखिल गोगोई के अधिवक्ता ने बताया कि बुधवार को दुधनै थाना में दर्ज एक मामले में अखिल गोगोई को गिरफ्तार करने की फिर से कोशिश की जा रही है, जो बिल्कुल ही असंवैधानिक है। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय का ऐसा आदेश है कि गिरफ्तार व्यक्ति से जुड़े जितने भी मामले हों उसे उसकी गिरफ्तारी के सात दिनों के अंदर सुनवाई चल रही न्यायालय के समक्ष लाना आवश्यक है। असम सरकार इस कानून को ठेंगा दिखाते हुए अखिल गोगोई को फिर से गिरफ्तार करने की फिराक में लगी हुई है।

उच्च न्यायालय द्वारा अखिल गोगोई की रासुका से दोषमुक्त होने की सूचना आने के बाद कृषक मुक्ति संग्राम समिति के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। उसके कार्यकर्ताओं का कहना है कि उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस न्याय से कृषक मुक्ति संग्राम समिति के सदस्य बेहद उत्साहित हैं। इस मामले में पुलिस का अगला कदम क्या होगा, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
(साभार : http://www.newsdnntv.com)
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