गाँव सभाओं का राष्ट्रीय संमेलन, 25-26 दिसम्बर 2017, गडचिरोली


पेसा कानून के  20 साल और वन अधिकार कानून के 10 साल “संघर्ष,अमल और बदलाव”

ग्रामसभाओं का राष्ट्रीय संमेलन
25 व 26 डिसेंबर 2017, गडचिरोली

साथी,         
           
गडचिरोली जिले के विभिन्न इलाकों की कुछ ग्राम सभाये एकसाथ आकर इज्जत से जिने का अधिकार अभियान एवं अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सहयोग से “ग्रामसभांओं का राष्ट्रीय संमेलन” आयोजीत कर रहे है।  हम आयोजन समिती  के तरफ से आपको इस सम्मेलन में होने के लिए निमंत्रित करते है। 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून पारित हुआ, पेसा कानून के निर्मिति को 20 साल एवं वन अधिकार कानून को अमल में आये हुए 10 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन खुद ग्रामसभाओं द्वारा किया गया है। यह सम्मेलन 25 एवं 26 दिसंबर 2017 को गडचीरोली में सम्पन्न होगा।

गडचिरोली जिले के विभिन्न ग्रामसभाओं ने पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी अमल कर जल-जंगल-जमीन पर ग्रामसभा के अधिकार को स्थापित किया है। उन उदाहरणों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अध्ययनो का हिस्सा बनाया गया है। देश मे पहला सामूहिक वन अधिकार दावा मान्यता प्राप्त ग्रामसभा मेंढा- लेखा और मारदा की ऐतिहासिक उपलब्धि और भूतपूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. ब्रम्हदेव शर्मा एवं भारत जन आंदोलन द्वारा, एवं अन्य जन संगठनों, सामाजिक संस्थओं द्वारा चलाए गए अभियानों से प्रेरणा और शिक्षा लेते हुए संसाधनों पर ग्रामसभा के अधिकारो को प्रस्थापित करने की प्रक्रिया को गड़चिरोलो जिले की ग्रामसभाओ ने आगे बढ़ाया। और आज गडचीरोली जिले के विभिन्न ग्रामसभाओं ने वन व्यवस्थापन द्वारा ग्रामसभा के आर्थिक-सामाजिक-राजनैतिक सक्षमता के उदाहरण बनाये है।

ग्रामसभाओं ने बांबू, तेंदू एवं अन्य लघु वन उपजों के सुनियोजित संकलन एवं विक्री कर रोजगार निर्माण और व्यक्तिगत/सामुहिक आमदनी में बढ़ोतरी की है। गांव से संबंधित किसी भी निर्णय प्रक्रिया में ग्रामसभा ही मुख्य है और गावगणराज्य ग्रामसभा हि सार्वभौम है ये संघर्ष गडचिरोली जिले के ग्रामसभाओं ने आगे किया है।

और इसी संघर्ष की परिणीति है ग्रामसभा झेंडेपार, लवारी, येरंडी, विहीरगाव, दराची, घोडाझरी, मोहगाव, रेखाटोला, नागवेली, पुसेर, कियर, मरकणार, और अन्य ग्रामसभाओं द्वारा खड़ी की गई प्रक्रियाएं। इन्ह सभी प्रक्रियाओं में जिले के ग्रामसभाओं के साथ काम कर रहे जन संगठनों, सामाजिक संस्था, व्यक्तियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ग्रामसभा की संकल्पना और वनों पर ग्रामसभा के अधिकार संघर्ष को मजबूत करते हुए सामूहिक वन अधिकार मान्यता एवं वन अधिकार कानून के प्रभावी अमल पर भी जन संगठनों, सामाजिक संस्थाओं ने प्रयास किये है। और इन्ही प्रयासों की परिणीति यानी गडचीरोली आज पूरे देश मे सबसे ज्यादा सामूहिक वन अधिकार मान्यता प्राप्त जिला है।

पर आज जब ग्रामसभाए पेसा, वन अधिकार आदि कानूनों का उपयोग कर गांव गणराज्य की संकल्पना को मजबूत कर रही है तभी उन्हें अनेको कठनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों के उदाहरण को छोड़ हमे यही दिखता है कि पूरे देश मे पेसा एवं वन अधिकार कानूनों का अमल एकदम ना के बराबर हुआ है। ग्रामसभाओं के अधिकारों को गलत तरीके से प्रभावित करने वाले ग्राम वन नियम, भूमि अधिग्रहण कानून, कम्पा फंड यदि ग्रामसभा विरोधी नीतियां लागू की जा रही।

ग्रामसभाएं वन संसाधनों का शाश्वत तरीके से उपयोग कर अपना सामूहिक विकास कर रहे है, ऐसे में वही जंगल तथाकथित विकास के नाम पर उनसे छीना जा रहा है। आज गडचीरोली में ग्रामसभाओं के कानूनन विरोध को दुर्लक्षित कर पर्यावरण विरोधी, विनाशकारी खनन नीति जबरन लागू की जा रही है। और ये करने के लिए पेसा कानून, वन अधिकार कानून, जैव विविधता कानून व ग्रामसभाओं के अधिकारों रौंदा जा रहा है।

ऐसे हालातों में भी ग्रामसभाए अपने अधिकारों का उपयोग कर जल-जंगल- जमीन की रक्षा कर शाश्वत व जन केंद्रित विकास प्रक्रिया मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

आज पेसा कानून को 20 साल एवं वन अधिकार कानून के 10 साल पूरे होने पर विभिन्न ग्रामसभाओं के प्रयासों, संघर्षो को अन्य ग्रामसभाओं के साथ समझने के उद्देश्य से हमने गडचीरोली के विभिन्न इलाको के कुछ ग्रामसभाओं, ग्रामसभा प्रतिनिधियों ने एकसाथ आकर इस सम्मेलन का आयोजन का विचार किया।

यह सम्मेलन कोई रचना बनाने का प्रयास नही, नाही गड़चोरोली जिले के सभी ग्रामसभाओं का प्रतिनिधित्व करने का प्रयास। हमे अन्य ग्रामसभाओं के प्रयासों- अनुभवों से सीखने को मिले, कानूनों के अमल की शमीक्षा हो और उन्हें मजबूती से कैसे लागू किया जाए, इन्ह उद्देश्यों से हमने कुछ ग्रामसभाओं ने एकसाथ आकर इस सम्मेलन का नियोजन किया है। इस सम्मेलन द्वारा देशभर के ग्रामसभा आंदोलन, पेसा-वन अधिकार एवं ग्रामसभा की प्रक्रियाएं, जन आंदोलनों के प्रति हमारी एकजुटता बनाकर जल-जंगल-जमीन-संसाधनों पर जनता का अधिकार स्थापित करने के संघर्षों को मजबूत करने का हमारा प्रयास है।

गडचीरोली के ग्रामसभाओं द्वारा पेसा, वन अधिकार का उपयोग कर किये गए विभिन्न प्रयासों की अन्य क्षेत्रों/ राज्यो की ग्रामसभाओं को जानकारी हो, साथही अन्य क्षेत्रों/राज्यो में शुरू प्रक्रियाओं को भी समझना, पेसा के 20 साल एवं वन अधिकार के 10 साल पर अमल की समीक्षा करना, ग्रामसभाओं के अनुभव, वन संसाधन व्यवस्थापन प्रक्रिया, ग्रामसभाओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रशासकीय-संरचनात्मक बाधायों को चिह्नित कर उन्हें दूर करने की कार्यक्रम का निर्धारण एवं आगे के संघर्ष आदि मुद्दोंपर इस सम्मेलन में चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन में गड़चिरोलो जिले में पेसा एवं वन अधिकार कानूनों का प्रभावी अमल के उदाहरणों को बनाने वाले ग्रामसभाओं को एवं कानूनों के निर्माण/अमल में बहुमूल्य योगदान दिए हुए सन्माननीय व्यक्तिओं को सन्मानित किया जाएगा।

इस सम्मेलन में देश के पेसा क्षेत्र की ग्रामसभाओं, वन अधिकार प्रक्रिया से जुड़े ग्रामसभाओं, पेसा-वन अधिकार-ग्रामसभा एवं जल-जंगल-जमीन के संघर्ष से जुड़े जन संगठनों, गुटों, व्यक्ति यदि से अनुरोध करते है कि आप इस सम्मेलन में अवश्य सहभागी हो।

आपसे अनुरोध है कि आप अपने कार्यक्षेत्र के ग्रामसभाओं को इस सम्मेलन में सहभागी होने का निमंत्रण दे। एवं ग्रामसभा प्रतिनिधियों को सहभागी होने के लिए प्रोत्साहित करें जिससे हमे उन्हके प्रयासों- अनुभवों से सीखने को मिले।

पुनः आपसे अनुरोध है कि इस सम्मेलन में आप सहभागी होकर ग्रामसभाओं के संघर्षों को ताकद दे।
  • सम्मेलन का प्रस्तावित स्वरूप निमंत्रण के साथ जोड़ा है। इसपर आपकी सूचनाएं और सुझाव आमंत्रित है। आपके द्वारा दिए गए सुझाव हमे सम्मेलन को सुचारू बनाने में सहयोग देंगे।
  • कृपया आपके सहभाग के लेकर हमे जल्दी से जानकारी दे जिससे हमें आवश्यक तैयारियां करने में मदद होगी.
  • 25 दिसंबर को रात्रि में रहने के लिए आयोजको के तरफ से तैयारियां की जा रही है (गड़चिरोलो में रहने के जगहों की कमी और आयोजन खर्च के चलते सामूहिक निवास व्यवस्था की जा रही है)। जो साथी 24 दिसंबर को रात्रि तक पोहच रहे है और 26 को रात्रि को रुकेंगे वह कृपया पहले से जानकारी दे जिससे हम तैयारी कर पाए।
  • सम्मेलन स्थल पर भोजन व्यवस्था रहेगी।
  • सम्मेलन का आयोजन कुछ ग्रामसभाओं द्वारा जनता के बीच से आर्थिक सहयोग जमा कर किया जा रहा है। सम्मेलन के आयोजन में आपसे भी सहयोग अपेक्षित है। आपके द्वारा आपके यात्रा का खर्चा खुद उठाने एवं सम्मेलन में प्रतिनिधिक सहयोग देने का हम आवाहन करते (गडचीरोली के बाहर से आ रहे ग्रामसभा प्रतिनिधि, संगठना-संस्था प्रतिनिधि आदि द्वारा 200 रुपये प्रति व्यक्ति सहयोग अपेक्षित है)।
आपकी सूचनाएं एवं सुझावों का हम स्वागत करते है।

आपके सहभागिता के अपेक्षा में,

निमंत्रक,
आयोजक समिति,  ग्रामसभांओं का राष्ट्रीय संमेलन, गडचिरोली
(मुख्य आयोजक: गडचिरोली जिले के विभिन्न इलाको की ग्रामसभाए, सहयोग: इज्जत से जीने का अधिकार अभियान, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा)

कार्यक्रम संयोजक:
एड.लालसू नागोटी (ग्रामसभा प्रतिनिधी, भामरागड पट्टी) 09405130530 advlalsunogoti@gmail.com
बाजीराव उसेंडी (ग्रामसभा रेखाटोला व इज्जत से जिने का अधिकार अभियान, गडचिरोली) 09405661423
हिरालाल येरमे (राज्य अध्यक्ष, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा) 09405336116

सहभागिता और अधिक जानकारी के लिए लिखे या संपर्क करे:
gramsabha.gadchiroli@gmail.com

09405324405, 08390045482, 09423423822, 08275419242


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jitendra chahar के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।