झारखण्ड : प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ संयुक्त सम्मेलन


9 सितम्बर 2017 को करनडीह जमशेदपुर स्थित दिशोम जाहेर थान सभा कक्ष में श्रम, भूमि और प्रकृति की लूट के खिलाफ संयुक्त अभियान को आगे बढ़ाने के लक्ष से एक सम्मेलन आयोजित किया गया. इस सम्मेलन का आयोजन विस्थापन विरोधी एकता मंच, अखिल भारतीय झाड़खण्ड पार्टी, सी पी आई एम एल, नवजनवादी लोकमंच, झाड़खण्ड मुक्ति वाहिनी, भाकपा - माले, एसयूसीआइ - कम्युनिस्ट, एवम कुछ स्वतंत्र सक्रिय समाजवादियों की और से किया गया था. सम्मेलन के संचालन मंडल में सी आर मांझी, कुमार चंद्र मार्डी, आनंद, एस के राय और दीपक रंजीत शामिल रहे.

सम्मेलन को सियाशरण शर्मा, कुमार चंद्र मार्डी, रामकविन्दर सिंह, आनंद, सी आर मांझी, एस के राय मदन मोहन, मंथन, सीताराम टुडू, भरत यादव, अखिलेश आदि ने संबोधन किया. श्रम, भूमि और प्रकृति के लूट के खिलाफ संयुक्त सम्मेलन में प्रस्तुत प्रस्ताव-
  1.   सम्प्रदायिकता, अंधविश्वास और हत्या की जनविरोधी शक्तियों द्वारा सद्भाव, तार्किक के प्रवक्ताओं की यह सम्मेलन निंदा करता है. गौरी लंकेश की हत्या के राष्ट्रीय प्रतिवाद में हैम भी साथ है. इस हत्या की सम्मेलन भरस्तना करते है और वर्चस्ववादी हिंदुत्व के खिलाफ खड़े सारे लोकतांत्रिक और मानवीय संघर्षो के प्रति एकजुटता जाहिर करता है. 
  2.  धर्म स्वंत्रता के नाम से लाया गया विधेयक का सार झाड़खंडी जनता की संस्कृति पर आक्रमण है। यह विधेयक आदिवासियों के स्वतंत्र धार्मिक पहचान को समाप्त करते और उसे हिन्दू धर्म मे शामिल करने की दिशा में लिया गया है खतरनाक कदम है. इस विधेयक के माध्यम से सरकार जनसंघर्षो की एकजुटता और व्यापकता को विभाजित करने की साजिश हुई है. हम इसका विरोध करए है और आम झारखंडी जान को इसमें सचेत रहकर अपनी एकता बद्ध लड़ाई जारी रखने की अपील करते है. 
  3.  यह सम्मेलन सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संसोधन के प्रयाश गांव की जमीन छीनकर लैंड बैंक बनाने के कदम, गलत डोमिशील नीति, भूमि अधिग्रहण कानून में संसोधन, खनिज की तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों की लूट , कृषि की बदहाली और असंगठित श्रमिको के विभस्त शोषण के कबिलाफ़ एकजुट संघर्ष करते रहने का संकल्प लेता है. एक साथ मिलकर चिंतन करने, सहमति के बिंदुओं पर संघर्ष की निरंतर प्रक्रिया हम जारी रखेंगे. 
सम्मेलन में शहर के अलावे पोटका, पटमदा एवं अन्य ग्रामीणों क्षेत्रों के उत्तम सिंह सरदार, निखिल मंडल, हरीश भूमिज, सुदर्शन सरदार, विश्वनाथ, दामू प्रमाणिक आदि सक्रिय साथियों को भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही.
सम्मेलन में झाड़खण्ड के बहुत सारी बुनियादी और ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा चली. भूमि लूट, के विविध कानूनों, गांव की जमीन की गांव से छीनकर लैंड बैंक का निर्माण, झाड़खण्ड की विसंगीतिपूर्ण डोमिसाइल नीति, खनिज की लूट, कृषि की बदहाली, श्रमिक का शोषण, धर्मांतरण विषयक कानून, सरकारी अस्पतालों में मौतों, धर्मांतरण कानून, किसानों का आत्म हत्या, साम्प्रदायिक नफरत और हिंसा आदि समस्याओं पर विमर्श हुआ. अल्पसंख्यकों दलितों, अंधविश्वास विरोधी बौद्धिको की हत्या के खिलाफ तथा तमाम जनसंघर्षों और जनसंगठनों की एकजुटता की प्रतिबद्ध कोशिश के संदर्भ में प्रस्ताव भी पारित किया गया.

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