कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां : सेमिनार 28 सितम्बर, नयी दिल्ली

आमंत्रण पत्र

सेमिनार 28 सितम्बर

"कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां"

साथियों आने वाले 28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस है। भगत सिंह उन क्रांतिकारियों में शामिल हैं जो जीवन पर्यन्त ब्रिटिश साम्राज्यवाद से संघर्ष करते हुए भारत की मुक्ति के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। देश की आजादी के संघर्ष में वे देश के भीतर साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ भी निरंतर संघर्षरत रहे। उनकी शहादत के इतने वर्षो बाद आज उनके विचार व संघर्ष हमारे लिए कई अधिक प्रसांगिक हो चुका है।

आज भारत के भीतर संघ के नेतृत्व में हिन्दू फासीवादी आंदोलन अपने चरम पर है। एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग की शह पर काबिज हुई मोदी सरकार तेजी के साथ पूंजी के पक्ष में नीतियों को लागू कर रही है। इस प्रक्रिया ने आम मेहनतकश जनता की तबाही-बर्बादी को और अधिक बढ़ाया है। वहीं दूसरी ओर इस लूट के खिलाफ आम जनता के संघर्षो कों कुृंद करने व उन्हे बांटने के लिए तेजी के साथ समाज में साम्प्रदायिक राजनीति का जहर घोला जा रहा है।

इसी हमले का एक रूप कालेज-कैम्पसों पर पिछले 3 सालों से बढ़ते फासीवादी हमले के रूप में दिखाई दे रहा है। आईआईटी मद्रास, एफटीआईआई, हैदराबाद विश्वविद्यालय, जेएनयू, डीयू, इलाहबाद, बीएचयू आदि काजेल-कैम्पस संघी हमलों को उदाहरण बने है। सरकार का विरोध करना, उसकी नीतियों की आलोचना करना, कालेज-कैमपसों में विभिन्न विषयों पर सेमिनार आयोजित करना भर ही आज ‘देशद्रोही’ के तमगे से नवाजे जाने के लिए काफी है। कैम्पसों पर हो रहा हमला बहुआयामी है। एक तरफ सीट कट, बजट कटौती, फीसें बढ़ाकर सरकार आम छात्रों से शिक्षा का अधिकार छीन रही है तो दूसरी तरफ पाठ्यक्रमों को अपनी साम्प्रदायिक राजनीति में रंगकर छात्रों के दिमागों को कुंद करने की कोशिशें जारी है। अपनी विषाक्त राजनीति से ग्रसित लोगों को विभिन्न संस्थानों के उच्च पदों पर आसीन करके भी मोदी सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।

इन सबके खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों-शिक्षकों को भारी दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्हे ‘देशद्रोही’, ‘हिन्दू विरोधी’ घोषित कर उनके दमन को जायज ठहराया जा रहा है। आज हम छात्रों-युवाओं के सामने शिक्षा को पूंजी की जकड़बंदी से बचाते हुए इन फासीवदी हमलों का जवाब देने की दोहरी चुनौती आ खड़ी हुई है। हाल-फिलहाल हुए छात्र आंदोलनों ने इस चुनौती को अपने कंधो पर लिया भी है। परंतु ये आंदोलन पूरे देश के स्तर पर एकजुटता कायम करने में नाकामयाब रहे हैं।

ऐसे में इन आंदोलनों से निकलने वाले निष्कर्षो को आत्मसात करते हुए भविष्य के छात्र आंदोलनों को खड़ा करने की आशा के साथ परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) 28 सितम्बर भगत सिंह के जन्म दिवस पर ‘कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन दिल्ली में करने जा रहा है।

इस सेमिनार में देश में हाल-फिलहाल हुए छात्र आंदोलनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न छात्र संगठनों, छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों व समाज की प्रगतिशील ताकतों को आमंत्रित किया जा रहा है। हम आशा करते हैं कि आप इस विषय के महत्व को समझते हुए सेमिनार में सक्रिय भागीदारी करेंगे।

साथी कृप्या अपने आने की सूचना अवश्य दे दें। यदि कोई संगठन या व्यक्तिगत साथी सेमिनार पत्र रखना चाहता हो अथवा अपनी बात रखना चाहता हो तो इसकी सूचना भी हमें अवश्य दे दें।

कार्यक्रमः सेमिनार

विषयः ‘कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां’

दिनांकः 28 सितम्बर, बृहस्पतिवार

समयः प्रातः 10 से 5 बजे तक

स्थानः MCD Community Hall हकीकत नगर Near GTB Metro Station Gate Number:2, दिल्ली

सम्पर्कः दीपक 09650170246

परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।