वेदांता के खिलाफ ग्लोबल एक्शन डे : जाम्बिया से भारत तक वेंदाता कम्पनी के खिलाफ प्रदर्शन


-तामेश्वर सिन्हा 

वेदांता रिसोर्सेज लन्दन में स्थित NRI अनिल अग्रवाल की अध्यक्षता वाली कंपनी है। हालांकि पर्यावरण और मानव अधिकारों के अपराधों की लंबी सूची की वजह से इसके खिलाफ दुनिया भर में विरोध किया जा रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों ओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान और गोवा सहित - विदेशों में जाम्बिया, लाइबेरिया, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, ऑस्ट्रेलिया और आयरलैंड में वेदांता की विभिन्न खानें, रिफाइनरि और कारखानों है। इन सभी जगहों में वेदांता पर सरकार के साथ मिलीभगत करके अपनी गैर कानूनी गितिविधियों को अंजाम देने का आरोप है. कर चोरी और भ्रष्टाचार के मामलों पर पहले से ही विभिन्न स्थानों में इसके खिलाफ मामले दायर हुए हैं।

इस संबंध में, ज़ाम्बिया देश के ग्रामीण – पिछले बारह वर्ष से वेदांता पर मुकदमा कर रहे हैं और इस मामले को लेकर उनके प्रतिनिधित्व शेयरधारकों द्वारा लंदन ए.जी.एम. (एनुअल जनरल मीटिंग) में सवाल उठाये जा रहे हैं। लंदन ए.जी.एम. के बहार प्रदर्शन के साथ ही साथ समानांतर विरोध प्रदर्शन का आयोजन भारत और ज़ाम्बिया में अनेक जगहों में किया जा रहा है.

ओडिशा में आदिवासियों और किसानों के दस वर्ष के संघर्ष ने उन्हें 2014 में वेदांता के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत हासिल कराई. जिसमें डोंगरिया कोंध आदिवासियों के पवित्र नियमगिरि पहाड़ियों में वेदांता का खनन रोक दिया गया. इससे वेदांता को निवेशित $ 10 बिलियन का नुकसान हुआ. हालांकि अनुमति न होने के बावजूद वेदांता ने नियमगिरि पहाड़ियों के पास लांजीगढ़ में 2004 में एक रिफाइनरी का निर्माण किया और उसे 6 गुना बढ़ाया. इस सन्दर्भ में डोंगरिया कोंध ए.जी.एम. के समक्ष लांजीगढ़ रिफाइनरी को हटाने की मांग करेंगे. वे अपहरण, झूठी गिरफ्तारी से जेल से डोंगरिया कार्यकर्ताओं की रिहाई की भी मांग करेंगे.

गौरतलब है कि सितम्बर 2009 में छत्तीसगढ़ के कोरबा में वेदांता से जुडी बालको की एल्युमिनियम स्मेल्टर के निर्माणाधीन चिमनी ध्वस्त होने पर 40 से 100 मजदूरों की मौत हो गयी. बाद में बख्शी कमीशन द्वारा कानूनी जांच ने वेदांता को लापरवाही और उप मानक सामग्री का उपयोग करने का दोषी माना और इस तरह वेदांता को मजदूरों की मौत का जिम्मेदार ठहराया. वेदांत के वकीलों ने पहले इस रिपोर्ट को दबा दिया लेकिन वह फिर 2014 में कार्यकर्ताओं द्वारा लीक किया गया.

इस केस में बक्षी कमीशन की रिपोर्ट को सामने लाने और विधान सभा में इस पर बहस और कानूनी कार्यवाही करने के बजाय छत्तीसगढ़ रमन सरकार द्वारा वेदांता को देश के पहले सोना खदान का लीज दिया गया और साथ ही नया रायपुर में एक अनुसन्धान संस्थान के लिए बहुत ही कम दाम में जमीन दी गयी. सोने की खान, बलोदा बाजार जिले में बाघमारा में शुरू होने वाली है जिससे घने जंगलो पर फैला 608 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होगा।

यह क्षेत्र इसलिए भी ऐतिहासिक है क्यूंकि आदिवासी नायक वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ आन्दोलन सोनाखान से ही शुरू किया था. समाचार सूत्रों के अनुसार सोना खदान के लिए वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का घोर उल्लघन किया गया है. छत्तीसगढ़ राज्य में इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, वेदांता के खिलाफ ग्लोबल एक्शन डे के उपलक्ष में ग्लोबल एक्शन डे के उपलक्ष में वेदांता के खिलाफ राजधानी रायपुर में 14 अगस्त को राजधानी रायपुर के अम्बेडकर चौक, कलेक्ट्रेट, रायपुर के पास आदिवासी रिसर्जेन्स के द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया.जानकारी हो कि सितम्बर 2009 में छत्तीसगढ़ के कोरबा में वेदांता से जुडी बालको की एल्युमिनियम स्मेल्टर के निर्माणाधीन चिमनी ध्वस्त होने पर 40 से 100 मजदूरों की मौत हो गयी. बाद में बख्शी कमीशन द्वारा कानूनी जांच ने वेदांता को लापरवाही और उप मानक सामग्री का उपयोग करने का दोषी माना और इस तरह वेदांता को मजदूरों की मौत का जिम्मेदार ठहराया. वेदांत के वकीलों ने पहले इस रिपोर्ट को दबा दिया लेकिन वह फिर 2014 में कार्यकर्ताओं द्वारा लीक किया गया.

इस केस में बक्षी कमीशन की रिपोर्ट को सामने लाने और विधान सभा में इस पर बहस और कानूनी कार्यवाही करने के बजाय छत्तीसगढ़ रमन सरकार द्वारा वेदांता को देश के पहले सोना खदान का लीज दिया गया और साथ ही नया रायपुर में एक अनुसन्धान संस्थान के लिए बहुत ही कम दाम में जमीन दी गयी. सोने की खान, बलोदा बाजार जिले में बाघमारा में शुरू होने वाली है जिससे घने जंगलो पर फैला 608 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होगा। यह क्षेत्र इसलिए भी ऐतिहासिक है क्यूंकि आदिवासी नायक वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ आन्दोलन सोनाखान से ही शुरू किया था. समाचार सूत्रों के अनुसार सोना खदान के लिए वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का घोर उल्लघन किया गया है.widit वेदांता रिसोर्सेज लन्दन में स्थित NRI अनिल अग्रवाल की अध्यक्षता वाली कंपनी है। हालांकि पर्यावरण और मानव अधिकारों के अपराधों की लंबी सूची की वजह से इसके खिलाफ दुनिया भर में विरोध किया जा रहा है।
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