नर्मदा घाटी के विस्तापितों की निर्णायक जंग में पुरा देश एकजूट

नर्मदा बचाओ आन्दोलन द्वारा आयोजित लोकमंच में आये राष्ट्रीय राजनीतिक दल के नेता सांसद, विधायक व सामाजिक संगठन के साथी

नर्मदा घाटी से करीबन 50000 से ज्यादा लोग हुए शामिल और शिवराज चौहान को दिखाया बिना सम्पूर्ण पुनर्वास हुए विस्थापितों का जनाधार

भोपाल के गोपाल से अब संवाद की अपेक्षा नहीं, लोगों के नाम पर कंपनियों को फायदा पहुंचा रही सरकार दे रही नर्मदा घाटी में लाखों लोगों की आहुति

नर्मदा घाटी में 21 जगहों पर कई दिनों से चल रहा क्रमिक अनशन और शिवराज सिंह चौहान को ट्विटर पर झूठे तथ्य देने से फुर्सत नहीं

बड़वानी / धार, मध्य प्रदेश | 22 जुलाई, 2017; आज नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बाँध विस्थापितों ने अपनी बात राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों के साथियों तक पहुंचाने के लिए नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत लोकमंच का आयोजन किया। लाखों लोगों की पुकार सुनकर देशभर के अनेक राजनीतिक दलों से नेतागण निसरपुर पहुंचे और अपना पूर्ण समर्थन नर्मदा घाटी के लोगों की 32 सालों से चल रही निर्णायक मोड़ पर खड़ी न्याय व विस्थापन के खिलाफ की लड़ाई को दिया, जिस आन्दोलन ने पिछले तीन दशक में विकास के सवाल पर पूरे देश में एक जागृति फैलाई है और कई आंदोलनों को लड़ने और जीतने का जज्बा दिया है।

सभी नेतागण सभा में पहुँचने से पहले रास्ते में पड़ रहे मूलगाँव व वसाहट की स्थिति का खुद जायजा लिया और सरकार के सफ़ेद झूठ को सामने से देखा। लगभग 11 बजे शुरू हुई सभा में सिर्फ 2 घंटे के अन्दर 50000 लोगों का जमावड़ा हो चूका था जिसमें महिलाएं अपने अपने पैदावार, खेती के औजार, व अन्य प्रतीक लेकर आये जो आज मध्य प्रदेश, गुजरात व केंद्र सरकार के अमानवीय और गैर जरुरी जिदों के कारण डूब व जबरन बेदखली की आखिरी कगार पर खड़े हैं। जहाँ शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में नर्मदा घाटी के लोगों के सम्पूर्ण पुनर्वास के बारे में झूठ पर झूठ बोल रही है वहीँ नरेन्द्र मोदी गुजरात में सरदार सरोवर बाँध के गेट्स 12 अगस्त, 2017 को औपचारिक रूप से बंद करने के अवसर पर उत्सव का प्रयोजन नर्मदा घाटी के लाखों लोगों को डूबा कर करना चाहती है।

मध्य प्रदेश के दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरदार सरोवर बाँध मध्य प्रदेश के लोगों के लिए अभिशाप बन गयी है। सरकार संवेदनहीन हो चुकी है, हमारे समय ऐसा नहीं था और जब भी नर्मदा बचाओ आन्दोलन के प्रतिनिधि लोगों की समस्या लेकर आते थे उन्हें सुना जाता था। आज तो मुझे यह आश्चर्य हो रहा है कि जब सरकार 31 जुलाई को नर्मदा घाटी खाली कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रही है तो उसी आदेश में यह कहाँ लिखा है कि टिन शेड बनवाये जाए? जिसमें लाखों करोडो रुपये खर्च किये जा रहे है। ऐसी ही नौटंकी उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा के समय किया जहाँ एक तरफ घने जंगलों को डूबा कर नए पौधे लगाने की बात सरकार कर रही है। इसमें अपने चेहरे चमकाने के लिए किये गए प्रचार प्रसार के बजाये अगर नर्मदा घाटी के विस्थापितों के लिए किया होता तो लोगों का कुछ भला होता। सरकार अगर जनपक्षी होती तो झा आयोग के रिपोर्ट को जगजाहिर करते हुए उसमें लिप्त अधिकारियों पर कारवाई करती ना कि इस भ्रष्टाचार में किसी अधिकारी के ना लिप्त होने की बात करती, जबकि सच्चाई यह है कि खुद मध्य प्रदेश सरकार ने अपने 38 अफसरों को भ्रष्टाचार के आरोप के कारण 38 लोगों को निलंबित किया था।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के डी. राजा ने आन्दोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि अगर नरेन्द्र मोदी सरकार न्याय का आदर करती है तो NWDTA अवार्ड का पालन करें और जब तक लोगों का सम्पूर्ण पुनर्वास नहीं होता तब तक के लिए बाँध के गेट्स बंद ना किये जाए और लोगों को जबरन न हटाया जाए। जब तक लोगों का संघर्ष चलता रहेगा हमारी तरफ से पूर्ण समर्थन रहेगा और यहाँ से जाने के बाद लोगों की आवाज़ संसद में गूजेंगी ऐसा हम सभी दलों के नेता ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।

एसयुसीआई से सत्यवान जी ने सभी जनांदोलनों को एक होकर एक बड़ी लड़ाई करने के लिए आवाहन किया और अपना व साथ जुड़े किसान मजदूर आन्दोलन का पूरा समर्थन नर्मदा घाटी के लोगों की लड़ाई के साथ देने का आश्वाशन दिया।

वहीँ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के मध्य प्रदेश सचिव बादल सरोज ने सरकार की कड़ी निंदा करते हुए पुनर्वास स्थलों के मूलभूत सुविधाओं की कमियों को अन्य बातों के साथ उजागर किया। इसके साथ लोगों के हक की लड़ाई में अपना पूरा सहयोग देने का विश्वास दिलाया।

केरल से सीपीआईएम के राज्य सभा सांसद सी. पी. नारायणन ने कहा कि नर्मदा घाटी के सैंकड़ों गाँव पर विस्थापन का संकट आया है, इस मुद्दे को देश भर में उठाएंगे और लड़ाई मजबूत करने में भरपूर सहयोग करेंगे। अभी आज़ादी की लड़ाई बाकी है और इन पूंजीपतियों की सरकार से आज़ादी हम लेके रहेंगे।

बिहार से जनता दल यूनाइटेड के राज्य सभा सांसद अली अनवर जी ने कहा कि वो यहाँ मुख्य रूप से नर्मदा घाटी के लोगों की लड़ाई को समर्थन देने आये हैं और विस्थापन के खिलाफ चल रही लड़ाई में हम सब एक साथ है। सरकार प्रकृति संस्कृति जंगल सब डूबा रही है नर्मदा घाटी में, हम सभी इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाएंगे।

मध्य प्रदेश के अलीराजपुर क्षेत्र से सांसद कांतिलाल भूरिया ने कहा कि यह सरकार तानाशाही हो चुकी है। जहाँ 192 गाँव और एक शहर डूब में जा रहे है वहां शिवराज सरकार चुप बैठ रही है। मै भी एक आदिवासी हूँ और उनके विस्थापन के दर्द को समझ सकता हूँ। इस संकट की घडी में मेरा फ़र्ज़ है कि मै विधानसभा में लोगों की आवाज़ उठाऊ और आखिरी दम तक लोगों के हक की लड़ाई में शामिल रहू।

वहीँ आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक व राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य आलोक अग्रवाल ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए उसे भ्रष्ट और किसान, मजदूर, आदिवासी विरोधी सरकार बताया। जिस बाँध से बिजली लाने का दावा कर रही है ये शिवराज सरकार उसी सरकार ने सरकारी बिजली उपक्रमों को बंद कर प्राइवेट कंपनी से महंगी बिजली खरीद राज्यव्यापी करीब 2 लाख करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार कर चुकी है। 11 पैसे प्रति यूनिट की जगह 80 रुपये प्रति यूनिट की दर से ज्यादा का क्रय कर लोगों का पैसा उद्यमियों में लुटा रही है। ऐसी सरकार क्या नर्मदा घाटी के लोगों का पुनर्वास करेगी? नर्मदा सेवा यात्रा का ढोंग रच कर नर्मदा घाटी के 1 लाख से ज्यादा पुत्र पुत्रियों की जलहत्या करने जा रही है मध्य प्रदेश सरकार।

इनके अलावा अरुण यादव (कांग्रेस पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष), कुनाल चौधरी (कांग्रेस), बाला बच्चन (विधायक, राजपुर), रमेश पटेल (विधायक, बड़वानी), सुरेन्द्र सिंह बघेल (विधायक, कुक्षी) व अन्य ने भी अपनी बात रखी। सभी राजनीतिक व सामाजिक दलों के सामने नर्मदा घाटी से देवराम कनेरा, भागीरथ धनगर, पेमल बहन, श्यामा बहन, सनोवर बी मंसूरी, पेमा भिलाला ने घाटी की पूरी स्थिति बताई व शिवराज और मोदी सरकार को चुनौती देते हुआ घाटी से बिना सम्पूर्ण और न्यायपूर्ण पुनर्वास ना हटने का संकल्प दोहराया।

अंत में मेधा पाटकर ने संवाद करने की आन्दोलन की कोशिश पर कहा कि अब नर्मदा घाटी के लोगों को भोपाल के गोपाल से कोई संवाद की अपेक्षा नहीं रही। पहले दिल्ली में पुलिस द्वारा लोगों को गिरफ्तार करवाने के बाद भोपाल में भी गिरफ्तारी दोहराने के बाद लोग पूरी तरह सरकार की जन विरोधी मंशा समझ चुके है। लाखों लोगों को डूबा कर मध्य प्रदेश के लोगों को एक बूँद भी पानी नहीं मिलने वाला और वहीँ गुजरात में कोका कोला, फोर्ड कंपनी के लिए लाखों लीटर पानी हर रोज दिया जा रहा है। नर्मदा घाटी के लोगों के साथ अभूतपूर्व अन्याय हो रहा है वो भी सिर्फ गुजरात चुनाव जीतने की जिद में। मध्य प्रदेश के लोगों की आहुति का उत्सव मनाने 12 अगस्त 2017 के दिन खुद नरेंद्र मोदी बाँध के गेट्स औपचारिक रूप से बंद करने एक भव्य उत्सव आयोजन में आने वाले हैं।

अंत में सभी दलों के नेताओं ने साथ मिलकर यह निर्णय लिया कि इस गंभीर मुद्दे पर देश के सदनों में गंभीर चर्चा होनी समय की मांग है और सोमवार से सभी दल सर्व सम्मति से नर्मदा घाटी के विस्थापन के मुद्दे को मध्य प्रदेश से लेकर राज्य सभा तक में उठाएंगे।

सुखदेव पाटीदार, कमला यादव, गोकरू भिलाला, कैलाश अवस्या, मुकेश भगोरिया, राहुल यादव
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