मध्य प्रदेश में विधुत वितरण कंपनियाँ कर रही किसानों की भूमि पर जबरन कब्जा


देश में पॉवर हब के रूप में पहचान बना चुके मध्य प्रदेश में किसानों के खेत पॉवर हाउस मे तबदील हो गये है । जगह-जगह खेतों से होकर हाइ टेंशन लाईन (उच्च दाब वाली विधुत लाइन) खींची गई है। किसानों के खेतों में जबरन टॉवर खड़े किए जा रहे हैं। प्रदेश में पॉवर ग्रिड कार्पोरेसन और मप्र पॉवर ट्रांसमिसन कम्पनी के लगभग 300 कार्य चल रहे है। 10,000 गावों से निकल रही इन  विधुत लाइनों  के लिए  किसानों को न भूमि का मुआवजा दिया जा रहा है और न ही फसलों का नुकसान। पेश है विचार मध्य प्रदेश की विज्ञप्ति;

हाईपॉवर ट्रांसमिशन लाइन का टावर जिस खेत में स्थापित होता है उसके मालिक किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए संबंधित किसान को मुआवजे के लिए कानूनी प्रावधान किए गए है लेकिन बिजली लाइन के लिए उपयोग की गई भूमि का कोई भी मुआवजा अभी सम्पूर्ण  मध्य प्रदेश मे किसानों को नहीं दिया जा रहा है, जबकि इंडियन टेलीग्राफ एक्ट-1885 एवं भारतीय विद्धुत अधिनियन 2003 के अनुसार किसानों को मुआवजा दिये जाने का प्रावधानों है, और मध्यप्रदेश के सभी सीमावर्ती प्रांत जैसे छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, गुजरात, महराष्ट्र आदि मे नियमानुसार क्षतिपूर्ति प्रदान की जा रही है । विचार मप्र की कोर कमिटी के सदस्य विनायक परिहार, डा चन्दौरकर एवं महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी ने 20 मई 2017 को नरसिंहपुर मे पत्रकारों से चर्चा मे मप्र सरकार पर किसानों की जमीन हथयाने के आरोप लगाये है ।

प्रदेश मे अभी कोन सी उच्च दाब विद्धुत लाइनों का काम चल रहा है-

प्रदेश मे वर्तमान मे पॉवर ग्रिड कार्पोरेसन और मप्र पॉवर ट्रांसमिसन कम्पनी  के लगभग 300 कार्य चाल रहे है जिन की उच्च दाब विद्धुत लाइन प्रदेश  केवलगभग 10,000 गावों से निकाल रही है ।

क्षतिपूर्ति के नियम क्या है-
उच्च दाब विधुत लाइन एवं टावर निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाता लेकिन किसान को हुई क्षति के लिए इंडियन टेलीग्राफ एक्ट-1885 की धारा 10 एवं धारा 16 तथा भारतीय विद्धुत अधिनियन 2003 की धारा 67 एवं 68 के अनुसार किसानों को क्षतिपूर्ति दिये जाने का प्रावधानों है । इन अधिनियमों के अनुसार दी जाने वाले क्षतिपूर्ति को  पुनरीक्षित करने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 9-10 अप्रैल 2015 को देश के सभी प्रान्तों के ऊर्जा मंत्रियों एवं ऊर्जा सचिवों की संयुक्त बैठक अयोजित की थी जिसमे मध्यप्रदेश के तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा आईसीपी केसरी भी उपस्थित थे । इस बैठक की अनुशंसा पर भारत सरकार ने दिनांक 15 अक्टूबर 2015 को उपरोक्त अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार क्षतिपूर्ति निर्धारित करने विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जो निम्नानुसार है –
  • टावर निर्माण के लिए भुमि के बाज़ार मूल्य की 85% क्षतिपूर्ति राशि संबन्धित कंपनी द्वारा किसानों को भुगतान करनी होगी। मुआवजा निर्धारण, टावर के चारों पैरों के बीच के मूल क्षेत्र से किया जायेगा।
  • खेत के ऊपर से निकले तार के लिए तार की चौड़ाई और दो टॉवरों के बीच लंबाई के आधार पर क्षेत्रफल की गणना की जाएगी और इस भूमि पर बाजार मूल्य के 15प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा । 765 KVDC और 132 KVDC लाइने जो नरसिंहपुर जिले मे बिछाई जा रही है उसके लिए 67 मीटर एवं 27 मीटर की चौड़ाई निर्धारित की गई है ।
  • इसके अलावा निर्माण के दोरान होने वाली फसल क्षति का नुकसान वर्तमान नियमों के अनुसार दिया जाना है ।
  • नगरीय क्षेत्र मे नगरीय निकाय द्वरा निर्धारित दर से क्षतिपूर्ति दी जायेगी ।*

वर्तमान मे मध्यप्रदेश मे दी जाने वाली क्षतिपूर्ति
वर्तमान मे पूरे प्रदेश मे बिजली कंपनियों द्वरा केवल निर्माण कार्य के समय लगी हुई फसल की वास्तविक क्षति दी जा रही है वो भी सिर्फ विरोध करने वाले किसानों को । अधिकतर किसानों से तो कहा जा रही है की जनहित मे मे इस प्रकार की निर्माण बिना मुआवजा दिये किए जा सकते है ।

क्या है विचार मप्र की मांग
  • सरकार से अपेक्षा है की दिनांक 15 अक्टूबर 2015 के बाद जिले मे हुये इस प्रकार के समस्त निर्माण कार्यों मे केंद्र सरकार द्वरा जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप मुआवजा प्रदान करने बिजली कंपनियों को तत्काल निर्देश जारी करेगे।  
  • किसानों से अपेक्षा है की वो अपने हक के लिए जिले के नेताओं एवं प्रशासन पर उचित दबाब बनायेगे और नियमानुसार क्षतिपूर्ति ना मिलने पर निर्माण कार्य ना होने दे और न्यायालय मे मामला दायर करें । 
  • समस्त जनप्रतिनिधिओं एवं राजनैतिक दलों के नेताओं से भी आग्रह है की वो किसानों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि दिलाने राजनीति से ऊपर उठकर सरकार से मांग करेंगे ।

  मीडिया सेल, विचार मध्य प्रदेश, सम्पर्क 9425169400


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