हीरो मोटो कॉर्प ठेका मजदूरों की नजायज छंटनी के खिलाफ एक दिवसीय भूख हड़ताल


नरेंद्र मोदी द्वारा 8 सितंबर को लागू की गई नोटबंदी काला धन तो वापस न लेकर आ पाई लेकिन उसने हजारों मजदूरों के पेट पर जरूर लात मार दिया। नोटबंदी के तुरंत बाद से ही छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों का बंद होना और मजदूरों का निकाला जाना जारी है। मोदी सरकार द्वारा 50 दिन पूरे हो जाने के बाद दिखाए गए खुशहाल देश के सपने की हकीकत एक ऐसे देश के रूप में निकल कर आया जहां किसान-मजदूर और व्यापक जनता तबाही का शिकार हो रहे हैं। मजदूरों को निकालने वाली फैक्ट्रियों में से एक हीरो मोटो कॉर्प ने अपने 600 मजदूरों को एक झटके में निकाल कर फेंक दिया। कंपनी प्रबंधन के इस अन्याय के खिलाफ आज 4 जनवरी को हीरो मोटोकॉर्प ठेका मजदूर संघर्ष समिति  एक दिवसीय भूख हड़ताल कर रही है। हम यहां आपके साथ होरो मोटोकॉर्प ठेका  संघर्ष समिति की प्रेस नोट साझा कर रहे हैं;

03 जनवरी 2017 को हीरो मोटोकॉर्प, गुडगाँव से निकाले गए मजदूरों की हीरो मोटोकॉर्प ठेका मज़दूर संघर्ष समिति की अगुवाई में श्रम विभाग में समझौता अधिकारी की मध्यस्थता में कंपनी के साथ बैठक बेनतीजा रही। बैठक में सिर्फ कंपनी के ठेकेदार ने भाग लिया, कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने उपस्थित होने के बावजुद वार्ता में भाग नहीं लिया। श्रमिकों ने मांग रखी की सभी श्रमिकों को निरन्तर सेवा में मानते हुए तुरंत काम पर वापस लिया जाया और कंपनी रोल पर स्थायी किया जाए। इस सम्बन्ध में श्रम विभाग ने अगली तारीख़ पर नियोजक पक्ष और श्रमिक पक्ष से नौकरी और उत्पादन से सम्बंधित दस्तावेज मंगाये हैं। श्रम विभाग ने वार्ता की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। मज़दूरों ने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए कल 4/01/2017 को मिनी सचिवालय के सामने सुबह 11 से शाम 5 बजे तक एक दिन की सांकेतिक भूख़ हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। हीरो के संघर्षरत मजदूरों ने सभी ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों से सहयोग की अपील की है। ज्ञात हो कि दो-पहिया निर्माता हीरो मोटोकॉर्प गुड़गांव ने नवम्बर-दिसम्बर माह में प्लांट के अंदर मुख्य उत्पादन के कार्य में लगे करीब 1000 ठेका श्रमिकों को बिना कोई नोटिस दिए काम से निकाल दिया । निकाले गये श्रमिक कंपनी में पिछले 5-10 साल से लगातार काम कर रहे थे।
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