पश्चिम बंगाल : भानगढ़ में 40000 किसान कृषि भूमि पर जबरन पावर ग्रिड लगाए जाने के विरुद्ध एकजुट


पश्चिम बंगाल के भानगढ़ में बिना स्थानीय ग्रामीणों के एक चार सौ किलोवॉट के पावर ग्रिड का निर्माण किया जा रहा है। इस पावर ग्रिड के लिए 2014 में किसानों से सत्ताधीन टीएमसी पार्टी के गुंडों द्वारा जबरन और कई जगहों पर बंदूक की नोक पर करीब 80 बीघा कृषि योग्य भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस अधिग्रहण के बदले में किसानों को बाजार के रेट के मुकाबले बहुत ही कम मुआवजा दिया गया था। इस अधिग्रहण की प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस ने गुण्डों की पूरी सहायता की।

ऐसी उपजाऊ भूमि में इतनी उच्च वोल्टेज वाला पावर ग्रिड न सिर्फ उनकी आजीविका को नष्ट करेगा बल्कि ऐसी सघन आबादी वाले क्षेत्र में जल स्रोतों को भी नष्ट कर देगा।

इस पावर ग्रिड के खिलाफ दक्षिण 24 परगना क्षेत्र के भानगढ़, देगंगा और रजारहट गांव के लोग पिछले कुछ हफ्तों से राज्य सरकार द्वारा लागू धारा 144 को तोड़ते हुए खुले में आ गए। टीएमसी सरकार ने पूरे भानगढ़ क्षेत्र की बिजली काट दी है जिससे की विरोध की खबरें मीडिया के जरिए बाहर न जा पाएं। प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के बटालियनों द्वारा बंदूकों, आंसू गैस के गोलों और पानी के कैनन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भानगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों में पिछले कुछ महीनों से अंसोतष उबल रहा था जो अब एक लड़ाकू संघर्ष के रूप में फूट पड़ा है। इस आंदोलन का नेतृत्व विभिन्न वामपंथी तथा जनवादी संगठनों, छात्रों, मानवाधिकार समूहों के सहयोग से बने जमीन, आजीविका तथा पर्यावरण रक्षा समिति के बैनर तले स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जिसमें ज्यादातर गरीब किसान हैं द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यधारा की संसदीय पार्टियों को अपने चुनावी फायदे के लिए आंदोलन में घुसने भी नहीं दिया है।

साभार : अबार सुमित्रां






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