बिहार : मानवाधिकार दिवस पर हक की मांग कर रहे भूमिहीन आंदोलनकारियों को नीतीश सरकार ने भेजा जेल



बिहार के भागलपुर जिले के डीएम कार्यालय पर 4 दिसम्बर से भूमिहीन दलित आवास के लिए जमीन की मांग को लेकर धरना दे रहे थे जिन पर 8 दिसम्बर को बर्बर लाठीचार्ज किया गया जिसमे 6 गंभीर रूप से घायल महिलाओं का अस्पताल में समुचित ईलाज नहीं हो रहा है। 6 आंदोलनकारियों को आज 10 दिसम्बर को संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल में डाल दिया गया है। लोकतांत्रिक आंदोलन का गला घोंट देने के लिए न्याय मंच के डॉ मुकेश और शोध छात्र अंजनी सहित 6 और अज्ञात 300 भी मुकदमे के अभियुक्त बनाये गये हैं। पढ़े अंजनी विशु की टिप्पणी;

तस्वीरें बिहार के जद-यू ,राजद व कांग्रेस सरकार के बर्बर चेहरे को सामने ला रहा है।

आशियाने के लिए वास भूमि का इक टुकड़ा मांगने पर महादलित-अतिपिछड़ा-महिला हितैषी सरकार ने किस तरह से जवाब दिया है, यह सामने है! संविधान की धज्जियां उड़ी हैं,लोकतंत्र के चिथड़े उड़े हैं,सामाजिक न्याय के साथ क्रूर मजाक हुआ है।

यह कोई दुर्घटना नहीं है; सत्ता चला रही राजनीतिक शक्तियों के चरित्र से जुड़ा मसला है! हम कब तक भूलते और ऐसी ताकतों को छूट देते रहेंगे! क्या केन्द्र में चल रही फासीवादी सरकार और बिहार में फासीवादियों-संघियों से लड़ने का दावा कर रही सरकार के बीच कोई चरित्रगत फासला दीख रहा है?

बात केवल कल की पुलिसिया बर्बरता तक ही नहीं रूकी है। 6गंभीर रूप से घायल महिलाओं का अस्पताल में समुचित ईलाज नहीं हो रहा है।

6आंदोलनकारियों को आज 10 दिसम्बर को संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल में डाल दिया गया है।
लोकतांत्रिक आंदोलन का गला घोंट देने के लिए न्याय मंच के डॉ मुकेश और शोध छात्र अंजनी सहित 6 और अज्ञात 300 भी मुकदमे के अभियुक्त बनाये गये हैं।

प्रतिवाद के स्वर को दबा देने के लिए पुलिस ने लगातार दहशत फैलाना जारी रखा है!प्रतिवाद में शामिल लोगों से नाम,पता मांगा जा रहा है,प्रशासन द्वारा उनकी फोटो खींची जा रही है।

क्या बर्बरता व लोकतंत्र को कुचलने की कोशिशों के खिलाफ संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए
वंचितों के न्याय व अधिकार के पक्ष में
हम एक दिन सड़कों पर नहीं हो सकते!
क्या एक दिन एक साथ 12दिसम्बर को जहां भी संभव हो सड़कों पर उतर कर प्रतिवाद नहीं कर सकते?








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