एक्ट में संसोधन से नहीं शिक्षा, माछ, गाछ और चास से होगा झारखण्ड का विकास


मोदी सरकार का विकास-विकास का नारा दरअसल झारखंडियों की जमीन लूटने की साजिश है जिसे झारखंडी जनता कभी सफल नहीं होने देगी. झारखंडियों  का विकास कल-कारखाने, माँल-सिनेमा थिएटर से नहीं होगा. इससे सिर्फ झारखंडियों का विस्थापन ही होगा और अंत में इससे पलायन बढ़ेगा। प्रस्तुत है दीपक रंजीत की यह रिपोर्ट;

12 दिसम्बर 2016 को सीएनटी/एसपीटी एक्ट बचाओ आन्दोलन एवं झारखण्ड मुक्ति वाहिनी के संयुक्त तत्वाधान में बेलटाड़ चौक, पटमदा, पूर्वी सिंहभूम में सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सह सभा का आयोजन किया गया.

सभा में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में हो रहे इस छेड़छाड़ का विरोध किया और साथ ही ये भी कहा कि इस छेड़छाड़ से विकास तो दूर झारखंडियों का विनाश होना तय है. सरकार कहती है कि सीएनटी/एसपीटी एक्ट के कारण विकास बाधित हो रही है. हमारा कहना है कि सरकार हमें यह जवाब दे कि सीएनटी /एसपीटी एक्ट के रहते कुकुरमुत्ते कि तरह कारखाना कैसे बन गया. और जहां तक स्कूल कॉलेज कि बात है. तो सरकार एक सर्वे करके देख ले ली झारखण्ड में जितने सरकारी स्कूल, अस्पताल, आगनबाडी या अन्य भवन है वह किसके जमीन पर बना है? 80% सरकारी भवन झारखंडियों के जमीन पर बना है. और इनमे से ज्यादातर जमीने झारखंडियों ने दान में दिया है.

सरकार यह जो विकास-विकास का नारा देकर झारखंडियों का जमीन लुटने का प्लान बना रही है इसे झारखंडी जनता कभी सफल होने नहीं देंगे. झारखंडियों  का विकास कल-कारखाने, माँल-सिनेमा थेटर से नहीं होगा. इससे सिर्फ झारखंडियों का विस्थापन होगा और अंत में इससे पलायन बढेगा.

पूंजीपतियों का बहुमत कि सरकार कहती है कि हमें झारखण्ड का विकास करना है. हम कहते है कि हमें  झारखण्ड का विकास नहीं जिसके लिए झारखण्ड बना है उसका विकास चाहिए. यानि झारखंडियों का विकास चाहिए. झारखण्ड का विकास अपने आप हो जायेगा.

यदि झारखंडियों का विकास करना है तो माछ, गाछ, चास और शिक्षा का विकास करिए इसी से झारखंडियों का विकास होगा. क्यूँ आदमी जितना भी संपन्न हो वह कभी भी लोहा नहीं खायेगा. खाना तो अनाज ही खायेगा.

साथ ही वक्ताओं ने कहा कि रघुवर दास कि सरकार पुलिसिया दमन के सहारे राज चलाना चाह रही है. इसी  कारण पहले शांतिपूर्ण विराध प्रदर्शन करने जा रहे खूंटी लोगों  में गोली चलाया जा गया. इसके बाद संथाल परगणा में विरोध में निकले छात्रों के हास्टलों में छापेमारी कर वहा से तीर धनुष खंगाल रही है. सरकार को सिर्फ दो टुक कहना है कि तीर धनुष झारखंडियों का सांस्कृतिक पहचान है. बच्चा पैदा होने पर झारखंडी लोग तीर से बच्चे की नाड़ी काटते हैं. झारखंडियों के ज्यादातर पूजा-पासा में तीर का प्रयोग किया जाता है. और सरकार इसे जब्त कर झारखंडियों के बिच क्या सन्देश देना चाहती है? एक सरकार है जो नोट जब्त कर रही है. और एक  सरकार है जो तीर-जब्त कर रही है. असला में ये और कुछ नहीं तीर धनुष जप्ती से, गोली चला कर झारखंडियों के आक्रोश को रोकना चाहती है. झारखंडियो का दमन करना चाहती है.

परन्तु पूंजीपतियों के बहुमत कि सरकार ये भूल रही है कि झारखंडियों का इतिहास संघर्ष का इतिहास है. संघर्ष से झारखंडी लोग कभी भी पीछे नहीं रहा. और इसी तरह यदि दमन होते रहा तो एक बार फिर हमें हुल कि जरुरत है. युवाओ को एकजुट होकर फिर से उलगुलान का आह्वान करना है.

अगला कार्यक्रम दुमका होस्टल में पुलिस दमन के खिलाफ सिंहभूम कॉलेज चांडिल में कांड़बांस यात्रा  (तीर-धनुष) निकला जायेगा.



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