झारखण्ड : 12 साल से मुआवजे को तरस रहे ललमटिया के आदिवासी


-मणि भाई

झारखण्ड के गोडा जिले के ललमटिया स्थित राजमहल कोयला खदान परियोजना के नाम पर जमीन देने वाले आदिवासी आज 12 साल से मुआवजे को तरस रहे हैं। गांव में न तो पीने का पानी है और न ही रहने को ठीक-ठाक आसियाना। मुख्य सड़क से 7-8 किलोमीटर वाले क्षेत्र में न तो यातायात का सुलभ साधन है न ही शिक्षा व्यवस्था। बदहाली का आलम ऐसा है कि कड़ाके की ठंढ में भी मासूम बच्चों के शरीर पर तन ढंकने को कपड़ा भी नजर नहीं आ रहा! विकास की धारा से दूर बोआरीजोर प्रखण्ड का चरण टोला भोड़ाई गांव जहां के लगभग 40 परिवार आज 12 वर्षों से बदत्तर जीवन जीने को मजबूर हैं।

ग्रामिणों से मिली जानकारी के अनुसार 12 साल पहले उन्होंने राजमहल परियोजना को अपनी जमीन कोयला उत्खनन हेतु दी थी। लम्बा अरसा बीत जाने के बावजूद न तो मुआवजा मिला और न ही ग्रामिणों का विस्थापन। लाचार बेबस जमीनदाताओं की सुनने वाला आज यहां कोई नहीं। न्याय की गुहार करने वाली नजरें आज भी इंसाफ मांगते नजर आ रही है। अबी टोला, डहा टोला, बथान टोला को विस्थापित किया गया मगर चरण टोला भोड़ाई के लोग आज भी अपने हक से महरूम है। सवाल उठता है विकास के नाम पर परियोजना और काॅपोरेट को जमीन देने का असली परिणाम यही होगा क्या?

कम्पनी के वादा खिलाफी पर एक नजर 
  1. कम्पनी ने वादा किया था कि स्थानीय युवकों को कम्पनी में स्थायी नौकरी देंगे। इसके विपरीत कम्पनी ने अपने आउटसोर्सिंग का कार्य करने वाली कम्पनियों में युवकों को अस्थायी तौर पर ठेका मजदूर बनाया फिर 2-3 वर्षों में 90 की छंटनी कर उन्हें पलायन करने को मजबूर कर दिया।
  2. घनी आबादी के अंतिम मकान से 100 मीटर की दूरी से कम में ब्लास्टिंग करना मना है परन्तु कम्पनी ने 10-20 मीटर की दूरी पर हैवी ब्लास्टिंग शुरू कर दीया। इससे आसपास के सभी घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। घर की क्षतिपूर्ति का मुआवजा मांगने गए 15 युवकों पर रंगदारी का मुकदमा कम्पनी ने ठोक दिया। इस प्रकार कम्पनी ने चोरी और सीना जोरी की कहावत को चरितार्थ किया है।
  3. ब्लास्टिंग एक निश्चित अवधि दिन के 12-1 बजे के बीच करना निर्धारित किया गया था। हैवी ब्लास्टिंग तो रात के 8 बजे भी करना शुरू किया। कई बार शाम के समय कई घण्टों में चूल्हे पर बन रहा भोजन ब्लास्टिंग के कंपन से जमीन पर गिर गया। इस हैवी ब्लास्टिंग का विरोध करने पर इसका असर एक दिन तक पड़ता है दूसरे दिन वही प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस ब्लास्टिंग का कंपन खदान से 3-4 किमी. तक अनुभव किया जा सकता है।
  4. कम्पनी ने सभी घरों में शौचालय निर्माण के लिए लोहंडिया बाजार के गृहस्वामियों के खातों में नगद रुपए 25 जुलाई से 10 अगस्त 2014 तक जमा करने का लिखित आश्वासन दिया था परन्तु सितम्बर बीत जाने तक भी ऐसा नहीं किया गया।
  5. खदान का पानी बरसात में लोगों के खेतों में नहीं छोड़कर नाले में छोड़ना था परन्तु कम्पनी लोगों की फसलों को बर्बाद करने की नीयत से उनके खेतों में छोड़ देती है जिससे कई किसानों की फसल नष्ट हो गयी।
  6. पेयजल, शिक्षा, बिजली एवं स्वास्थ्य सुविधा देने का वचन आज तक अपने पूर्ण होने का बाट जोह रहा है।
  7. कम्पनी ने वार्त्ता के समय लोगों को आश्वस्त किया था कि वे सभी मुकदमें बिना शर्त वापस लेगी लेकिन वक्त आने पर वह गिरगिट की तरह रंग बदलती है और भ्रष्ट झारखण्डी पुलिस को अपने वश में करके नेतृत्वकारी युवकों को गिरफ्तार करने आधी रात में उनके घरों पर जाती है और घर के सदस्यों के साथ गाली गलौज करती है। 
ऐसे कुकृत्यों एवं दमन ने लोगों को भयभीत करने के स्थान पर एकजुट कर शोषण के खिलाफ दृढ़ संकल्पित कर दिया है जिसका नतीजा है कि सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुनः खदान का खनन कार्य लोगों ने दूसरी बार पूरी तरह ठप कर दिया।

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