पुलिसिया राज में बढ़ते आदिवासी दमन के खिलाफ बस्तर बंद


छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिसिया राज कायम होने से बढ़ रहे आदिवासी दमन के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज ने 22 अक्टूबर को बस्तर संभाग बंद रख कर भाजपा सरकार को कड़ा संदेश दिया है। बस्तर से स्वतंत्र पत्रकार तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट;

बस्तर में पुलिस द्वारा प्रजातंत्र की हत्या  कर दी गई । आज काला दिवस है ।राज्य सरकार के स्थान पर पुलिस शासन चला रही है ।

जानकारी के अनुसार आदिवासी विश्राम भवन जगदलपुर को पुलिस ने नजरबन्द कर रखा था, सुबह 10 बजे तक दुकानें बन्द थीं । पुलिस ने शहर में घुम घुम कर दूकाने खुलवाई । आम तौर पर शनिवार को जो दुकाने बन्द होती हैं ।उनको भी पुलिस ने खुलवाया ।

शहर में बन्द का आह्वान कर घुम रहे आटो को भी पुलिस जबरन थाने ले गई ।जगदलपुर में पुलिस व एस टी एफ के जवान मार्च कर रहे थे शहर को चारों ओर से घेरकर , गांव से शहर बन्द के लिए आ रहे आदिवासीयों को पुलिस डरा धमकाकर वापस भेजा गया  कइयों को थानो में बैठा दिया गया। धरमपुरा पी जी कालेज के छात्र जो आदिवासी भवन आ रहे थे ।उनको रोड में ही रोका और फिर डरा धमकाकर थाने लेजाया गया।
पूरा पुलिस विभाग सर्व  आदिवासी समाज के बन्द के आह्वान को विफल करने में लगी रही
पुलिस डरा धमकाकर किसी भी तरह बन्द को असफल करने में जुटी थी।

ज्ञात हो कि एल आई वी पिछले दो दिनों से भवन में गिद्ध की तरह नजर जमाये हुऐ थे। जगदलपुर में आदिवासीयों की सारी स्वतंत्रता छिन ली गई है और पुलिस द्वारा गुलाम बना लिया गया । आदिवासीयों के स्वतंत्र घुमने पर मनाही है ।जो आटो आदिवासीयो को बैठा रहे हैं ।उन आटो वालों को परेशान किया जा रहा है। बस्तर में आदिवासियों के सारे नागरिक अधिकार छिन कर, पुलिस तानाशाह हो गई है, अब बस्तर में लोकतंत्र नही पुलिस द्वारा लट्ठ तंत्र हावी हो गया है।

बस्तर में विभिन्न जिला/ ब्लाक में दिखा बंद का असर 

छत्तीसगढ़ सरकार में पुलिस पोषित संगठनों ने फैलाई झूठी खबर । दंतेवाड़ा और गीदम में बंद को बताया असफल । 03 बजे के बाद की तस्वीरों को लगाकर दिखाया बंद बेअसर । 03 बजे के बाद सामान्य तौर पर बस्तर के सारे आंदोलन जाते हैं थम। बंद का दौर हो जाता है समाप्त। खुलने शुरू हो जाते हैं व्यावसायिक प्रतिष्ठान। आदिवासियों के बंद को व्यापारी संघों का मिला पूरा समर्थन । इसके लिए सर्व आदिवासी समाज ने व्यापारियों को किया धन्यवाद ज्ञापित।



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