मजदूरों के आगे झुका महिन्द्रा सीआईई कम्पनी प्रबंधन


रुद्रपुर, 7 अक्टूबर। उत्तराखण्ड के रुद्रपुर में लम्बे संघर्ष के बाद महिन्द्रा सीआईई के बर्खास्तगी के शिकार दो श्रमिकों की कार्यबहाली हो गयी।

उल्लेखनीय है कि महिन्द्रा सीआईई के जिले में दो प्लाण्ट हैं। मज़दूरों ने जबसे एकता बनानी शुरू की थी, प्रबन्धन ने दमन का रास्ता अपनाया था। पन्तनगर प्लाण्ट के मज़दूर हेम चंद की पूर्व में भी बर्खास्तगी हो चुकी थी। लम्बे संघर्ष के बाद पिछले साल दिसम्बर में हेम चंद सहित दो श्रमिकों की कार्यबहाली हुई थी। लेकिन प्रबन्धन ने जून माह में हेम चंद का पुनः गेट बन्दकर दिया था। इधर लालपुर प्लाण्ट के मज़दूर शत्रुघन सिंह पर जबरिया दबाव डालकर प्रबन्धन ने त्यागपत्र ले लिया था।

मज़दूरों ने न्याय की बात की तो श्रम विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक कोर्ट जाने की बात करता रहा। प्रबन्धन और सरकारी महकमों की बात का सुर एक ही था। हेम चंद को प्रबन्धन ने ही नहीं श्रम अधिकारियों ने भी रुपये लेकर मामला खत्म करने को कहा, लेकिन वे किसी लालच या झासे में नहीं पड़े और संघर्ष की राह पर आगे बढ़ते रहे। मज़दूरों ने दोनो प्लाण्टों की एकता के साथ आन्दोलन शुरू कर दिया। उन्होंने लचीले रुख के साथ सूझ-बूझ भरे कदम उठाये। डेढ़ माह से वे श्रम भवन, रुद्रपुर में धरनारत थे और संघर्ष को लगातार ऊपर उठाया।

महिन्द्रा सीआईई के मज़दूरों ने दोहरा दबाव बनाया। एक तरफ दोनो प्लाण्टों में संयुक्त संघर्ष आगे बढ़ता गया। मज़दूरों ने टूलडाउन व हड़ताल की नोटिस दी और अन्ततः दोनो प्लाण्टों में तीन दिन तक लगातार 1 घण्टे के टूल डाउन आन्दोलन से ही प्रबन्धन दबाव में आ गया। परिस्थिति को देखते हुए मज़दूरों ने हड़ताल आगे बढ़ा दी और टूलडाउन को स्थगित किया। दूसरी तरफ प्रीकाॅल, मिण्डा, डेल्टा के चल रहे मज़दूर आन्दोलनों के साथ महिन्द्रा सीआईई के मज़दूरों ने भी एकताबद्ध संघर्ष को आगे बढ़ाया। जिससे प्रशासन भी दबाव में था। इसी दबाव में प्रीकाॅल मज़दूरों की भी जीत हुई थी। अन्ततः सहायक श्रमायुक्त की मध्यस्तता में चली 4 दिनों की कई दौर की वार्ताओं के बाद दोनो श्रमिकों की कार्यबहाली हुई।

आज के कठिन दौर में एक साल के भीतर दोबारा कार्यबहाली मज़दूरों की एक बड़ी कामयाबी है।

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