छत्तीसगढ़ के गारेगांव में कोयला सत्याग्रह : एक इंच भी जमीन कोल माइनिंग के लिए नहीं देंगे


छत्तीसगढ़ के तमनार ब्लॉक के गारे गांव में पिछले पांच साल से लगातार हर साल गांधी जयंती के दिन कोयला सत्याग्रह आयोजित किया जाता है जिसमें आस-पास के सभी गांवों के निवासी एकत्रित होकर कोयला कानून को तोड़कर अपने क्षेत्र की एक इंच जमीन किसी निजी या शासकीय उपक्रम को कोल माइनिंग के लिए न देने का संकल्प दुहराते हैं। हर साल की तरह इस बार भी 2 अक्टूबर को गांधी जंयती के अवसर पर 55 गांव के ग्रामीणों तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर कोयला सत्याग्रह आयोजित किया है। इस अवसर पर सत्याग्रहियों ने अपने संकल्प को एक बार फिर से दुहराते हुए कहा कि यदि कोयला निकालना ही है तो सरकार उसे समुदाय को दे। उन्होंने दावा किया है कि यदि कोल माइनिंग उन्हें सौंप दी जाए तो वह कोयले पर किसी भी निजी या शासकीय उपक्रम की तुलना में दस फीसदी ज्यादा रॉयल्टी दे सकते हैं। हम यहां पर आपके साथ इस कोयला सत्याग्रह की एक संक्षिप्त रिपोर्ट साझा कर रहे है;

तमनार ब्लॉक के गारे में 1-2 अक्टूबर को 12 राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं व 55 गांव के ग्रामीणों की उपस्थिति में कोयला कानून तोड़ा गया। ग्रामीण कोयला कानून तोड़ने पर बेहद उत्साहित नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला निकालना ही है तो हम निकालेंगे और दूसरों की अपेक्षा 10 गुना ज्यादा रायल्टी देंगे। लेकिन अब किसी दूसरे निजी या शासकीय उपक्रम को कोयला निकालने नहीं दिया जाएगा न ही इसके लिए गांव वाले एक इंच जमीन देंगे।

गारे में बीते पांच सालों से गांधी जयंती पर शांतिपूर्ण ढंग से कोयला सत्याग्रह आयोजित किया जा रहा है। तमनार के ग्राम गारे में आज उत्साह के साथ कोयला सत्याग्रह करते हुए कोयला निकाला और एक स्थान पर एकत्रित किया गया। गारे में सुबह से ग्रामीणों का हुजूम लगना शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में और करीब 12 राज्यों से विभिन्न सामाजिक संगठन के पदाधिकारी पहुंचे। उनकी उपस्थिति में महात्मा गांधी के चित्र पर दीप प्रज्जवलित व माल्यार्पण पश्चात सभा का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को संबोधित किया। जिसमें ग्रामीणों को माइनिंग से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई।

ग्रामीणों ने सत्याग्रह पर कहा कि वह अब यहां और कोल ब्लॉक खोलने हरगिज नहीं देंगे। वह अपनी जमीन पर खेती किसानी का जीवकोपार्जन करना चाहते हैं। लेकिन यदि फिर भी सरकार यहां से कोयले का उत्पादन करना चाहती है तो समुदाय को देना होगा। वह किसी भी हालत में निजी कंपनी या सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रमों को और कोल ब्लॉक के लिए अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि चाहे निजी कंपनी हो या सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी उपक्रम सभी ने गांव के प्रदूषण व ग्रामीणों के साथ खिलवाड़ किया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कोल ब्लॉक के लिए जमीन लेने से पहले ग्रामीणों को बड़े-बड़े लोक लुभावन सपने दिखाए। लेकिन कोयला उत्पादन के बाद नियमानुसार न तो सीएसआर तहत गांव का समुचित विकास किया गया और न ही प्रभावित ग्रामीणों को रोजगार व जीवकोपार्जन के संसाधन मुहैया कराया गया। ग्रामीण आज दर-दर भटकने को मजबूर है। दूसरी ओर कोल ब्लॉक व आसपास के गांव का पर्यावरण तेजी से बिगड़ा चारों ओर धूल गुबार ही नजर आता है। कोल ब्लॉक कंपनियों द्वारा यहां तक की ग्रामीणों के देव स्थल को भी नहीं बख्शा गया।
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