बढ़ते आदिवासी दमन के विरोध में बस्तर बंद; 22 अक्टूबर 2016 को रैली प्रदर्शन


आदिवासियों की संख्या घटती जा रही, नक्सल उन्मूलन के नाम पर नाबालिक बच्चो की हत्याए, महिलाओं का यौन शोषण व बुजुर्गो से मार पीट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, पुलिस,सुरक्षा बलों ,नक्सलियों के बीच आदिवासी रोज मारा जा रहा है, बस्तर में नक्सल उन्मूलन के नाम पर जारी जंग में पिसते आदिवासियों के विरोध में 22 अक्टूबर को रैली प्रदर्शन के साथ बस्तर संभाग बंद करने की घोषणा सर्व आदिवासी सामाज ने किया है.
पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज ने 22 अक्टूबर को बस्तर संभाग बंद का आहवान किया है। इस दौरान सभी विकासखंड मुख्यालय में रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

सर्व आदिवासी समाज के प्रवक्ता मानसाय मौर्य द्वारा इस बाबत एक विज्ञप्ति जारी की गई है जिसमें बताया गया कि आदिवासियों के संस्कृति व सामाजिक व्यवस्था के कारण विश्व प्रसिद्ध रहा है, आदिवासी मूल बिज व मूल निवासी है भारत  के संविधान में सामाजिक संस्कृति व मौलिक सुरक्षा देने हेतु पांचवी अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है.

विज्ञप्ति में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षो से बस्तर संभाग में आदिवासी असुरक्षित है, पिछले दो सालो में पुलिस अथवा सुरक्षा बलों द्वारा जिन मुठभेड़ो व घटनाओं को नक्सली वारदात करार दिया गया सामाज के जाँच में ये सभी फर्जी निकले,नाबालिक बच्चो की हत्याये महिलाओं का यौन शोषण व बुजुर्गो से मार पीट नक्सली उन्मूलन के बहाने आम हो गया है, नक्सली घटनाओं में जब भी कोई मरता है तो वाह आदिवासी ही होता है पुलिस,सुरक्षा बलों ,नक्सलियों के बीच आदिवासी रोज मारा जा रहा है जिस आदिवासी की सुरक्षा स्वशासन के लिए बस्तर संभाग को अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया उसमे आदिवासी की संख्या प्रतिदिन घटती जा रही है व बाहरी आबादी बढती जा रही है.

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