हिमाचल प्रदेश : टाटा के रोप वे के लिए मनाली में हजारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की तैयारी


इस तस्वीर को ध्यान से देखिए, यह तस्वीर हिमाचल प्रदेश के मनाली से रोहतांग तक प्रस्तावित पे रोप वे की है। जिन देवदार पेड़ों पर मार्किंग के निशान देख रहे है उन्हें काट कर पे रोप वे बनाया जायेगा है।  टाटा की निजी कम्पनी ने पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति लिए बगैर ही हजारों पेड़ों को मार्क कर दिया है। टाटा कंपनी-स्की हिमालय के साथ मनाली रोप-वे प्राइवेट लिमिटेड के नाम से इसका निर्माण करेगी। नौ किलोमीटर लंबे रोप-वे से भले ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचेगा यह साफ होना बाकी है। सेव मनाली के बैनर तले लोग एकत्रित हो कर पर्यावरण का विनाश करने वाली इस योजना का विरोध शुरू कर दिया है । सेव मनाली का बयान;

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करने वाले बेशकीमती पेड़ पौधों को काटे जाने की योजना बनाई जा रही है जो कि आने वाले समय में देवभूमि के लोगों के लिए विनाशकारी साबित होगा। पर्यटन के नाम पर रोक डे बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

अगर इतने ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति दी गई तो इसका पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। हिमालयन पर्यावरण संरक्षण संगठन के अध्यक्ष ने कहा है कि इस कार्य के लिए पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति लिए बगैर ही पेड़ों को मार्क किया गया है । उन्होंने कहा कि संस्था रोप वे लगाने के लिए भारी मात्रा में प्रकृति का विनाश नहीं होने देगी। संस्था के अध्यक्ष डॉ गौरव भारद्वाज ने कहा कि इस संदर्भ में ज्ञापन जल्द ही डीसी कुल्लू के माध्यम से सरकार को भेजा जाएगा।
बता दें कि रोप-वे बनाने वाली कंपनी मनाली रोप-वे प्राइवेट लिमिटेड कोठी से लेकर रोहतांग तक तीन चरण में रोप-वे को तैयार करेगी, लेकिन यहां प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं। यही नहीं, उच्च न्यायालय तक पर्यावरण को लेकर हल्फाना दाखिल करने की योजना भी बन रही है।
डीफओ कुल्लू नीरज चड्ढा का कहना है कि सरकार ने रोहतांग तक रोप वे  बनाने का निर्णय लिया है विभाग का प्रयास है कि कम से कम पेड़ कटे । इन दिनों प्रथम चरण में पेड़ों की मार्किंग करने का सर्वे चला है इसके बाद दो और सर्वे किए जाएंगे जिनके पूरा होने के बाद इसकी फाइल बनाकर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी जहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही पेड़ काटे जाएंगे ।

सेव मनाली संस्थान इस योजना का कड़ा विरोध रही है। सेव मनाली संस्थान का आरोप है जो एनजीटी प्रदूषण और पर्यावरण की आड़ में मनाली की टैक्सी बंद कर के मनाली के पर्यटन को बर्बाद कर दिया। आज जब पर्यावरण को बर्बाद करने के लिए हज़ारों देवदार पेड़ो की बलि दी जा रही तो एनजीटी चुप क्यों है ?

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