दुधवा नेशनल पार्क : संगठित लोगों की चेतावनी को प्रशासन ने लिया गंभीरता से, उपजिलाधिकारी ने स्वीकार किए सामुदायिक दावे


24 अगस्त 2016 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा नेशनल पार्क व टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में बसे 20 गांवों के आदिवासियों ने प्रशासन को  नोटिस भेज कर चेतावनी दी थी  कि जब 29 अगस्त 2016 को आदिवासी अपने दावे जमा करने आए तो उन्हें स्वीकार कर लिए जाए कोई आना-कानी नहीं होनी चाहिए. उपजिलाधिकारी ने उपस्थित होकर स्वीकार किये लघुवन संसाधन के अधिकार के सामुदायिक दावे । हम यहाँ आपसे साझा कर रहे है अखिल भारतीय वनजन श्रमजीवी यूनियन की प्रेस विज्ञप्ति;

29 जुलाई 2016 को दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र पलिया कलां-खीरी के थारू जनजाति बहुल 18 गाॅवों की ग्राम स्तरीय वनाधिकार समितियों द्वारा थारू आदिवासी नेतृत्वकारी महिलाओं की अगुआई में हजारों की संख्या में दावाकर्ताओं ने एक भव्य पुनः दावाप्रस्तुतिकरण एवं वनाधिकार यात्रा निकाल कर दुधवा नेशनल पार्क व टाईगर रिज़र्व क्षेत्र चन्दन चैकी स्थित एकीकृत जनजातीय परियोजना कार्यालय में थारू आदिवासी महिला मज़दूर किसान मंच सम्बद्ध अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी मंच द्वारा आयोजित दावा प्रस्तुतिकरण एवं वनाधिकार समारोह में पहुंच कर अपने दावों की फाईलें वहां मौजूद उपखण्ड स्तरीय वनाधिकार समिति के अध्यक्ष उपजिलाधिकारी पलिया श्री शादाब असलम को सौंपी। उपजिलाधिकारी द्वारा वादा किया गया कि इन दावों को 10 दिन के अन्दर निस्तारण कर जिलास्तरीय समिति को अग्रसरित किया जायेगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के राजनैतिक सलाहकार श्री धनंजय उपाध्याय शामिल रहे।
जैसा कि आपको विदित कराया गया था कि 31 जनवरी 2013 को यहां दुधवा नेशनल पार्क व टाईगर रिज़र्व क्षेत्र में बसे 46 गाॅवों में से 20 गाॅवों की वनाधिकार समितियों द्वारा वनाधिकार कानून नियमावली संशोधन-2012 के तहत प्रारूप-ग पर अपने दावे भरकर तत्कालीन एकीकृत जिला परियोजना अधिकारी के पास जमा करवाये थे, जिन्हें एक माह के अन्दर-अन्दर निस्तारित करने का वादा किया गया था। लेकिन अधिकारियों कर्मचारियों की लापरवाही के कारण ये सभी फाईलें खुर्द-बुर्द कर दी गयीं। ग्राम स्तरीय समितियों द्वारा माह अप्रेल में वनाधिकार कानून की धारा 7 के तहत नोटिस जारी करने पर अधिकांश फाईलें हमें वापिस की गयीं, जिन्हे पुनः दुरुस्त किया गया। उन फाईलों को उपजिलाधिकारी द्वारा पुनः अपनी सुपुर्दगी में लेने के लिये वार्ता की गयी, लेकिन वे पिछले एक माह से लगातार टाल-मटोल करते रहे। नतीजतन ग्राम वनाधिकार समितियों ने 24 अगस्त को उपजिलाधिकारी पलिया/अध्यक्ष उपखण्ड स्तरीय वनाधिकार समिति-पलिया को सम्बोधित एक नोटिस जारी किया। जिसमें सूचित किया गया कि ग्राम वनाधिकार समितियां व हजारों दावाकर्तागण 29 अगस्त 2016 को अपनी दावा फाईलें पुनः प्रस्तुत करने उनके कार्यालय पर आयेंगे, अगर फाईलें लेने में आना-कानी की गयी तो उनके कार्यालय पर अनिश्चित कालीन धरना दिया जायेगा।

संगठित लोगों की चेतावनी को प्रशासन को गम्भीरता से लेना पड़ा, जिसके फलस्वरूप स्थानीय संगठन थारू आदिवासी महिला मज़दूर किसान मंच सम्बद्ध अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन ने यह कार्यक्रम निर्धारित किया। दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थित एकीकृत परियोजना कार्यालय में उपजिलाधिकारी ने पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल होकर इन दावों को स्वीकार किया।

दोपहर करीब एक बजे दावा प्रस्तुतिकरण व वनाधिकार यात्रा चन्दन चैकी गौरीफंटा तिराहे से शुरु की गयी।

यात्रा की अगुआई यूनियन की अगुआ महिलाओं निबादा राणा, फूलमति राणा, रुकमा राणा, सहवनिया राणा, बिट्टी राणा, अनीता राणा, लालमति राणा द्वारा थारू समुदाय की पारम्परिक पौशाक में अपने पारम्परिक अन्दाज़ में आन्दोलन के गीत गाते हुए की गई। मानसून की तपती ऊमस भरी दोपहर में हजारों की संख्या में महिलायें अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ पूरे उत्साह का प्रदर्शन करते हुए यात्रा में शामिल रहीं। यात्रा के मध्य में ही श्री धनंजय उपाध्याय भी अपनी करीब 50 लोगों की टीम के साथ पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुुए व समारोह स्थल तक पहुंचे।

समारोह की शुरुआत में मुख्य अतिथि धनंजय उपाध्याय, उपजिलाधिकारी पलिया शादाब असलम, परियोजना अधिकारी यू.के. सिंह, निबादा राणा, अनीता राणा व वरिष्ठ साथी रामचन्द्र राणा को मंचासीन कराकर माल्यार्पण कराकर व बैज लगाकर सम्मानित किया  गया।

मंच का संचालन अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन की नेशनल एक्सीक्यूटिव बाडी के सदस्य रजनीश द्वारा करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तार से रखते हुए कहा गया कि ‘‘वनाधिकार कानून नियमावली संशोधन-2012 के तहत तीसरे दावे प्रारूप-ग को यहां के 20 गाॅवों द्वारा परियोजना कार्यालय में 31 जुलाई 2013 को जमा करवाया गया था। एक महीने में निस्तारण का वादा करने के बावज़ूद परियोजना विभाग द्वारा फाईलों को खुर्द-बुर्द करके एक बार फिर उन्हीं ऐतिहासिक अन्यायों को दोहराने का काम किया गया, जिनका उल्लेख वनाधिकार कानून की प्रस्तावना में किया गया है। जिसे लेकर हम आज दोबारा फाईलें ठीक करके यहां उपजिलाधिकारी महोदय के सुपुर्द करने आये हैं। वनाधिकार कानून में जो नहीं है, उसकी हम बात करेंगे नहीं, लेकिन कानून के अन्दर जो भी अधिकार हैं उनमें से सुई की नोक के बराबर भी हम छोड़ने वाले भी नहीं हैं। वैसे अधिकार तो कानून व नियमावली के आने के बाद से ही स्थापित हो चुका है, अब केवल मान्यता देने का काम अधिकारियों को करना है।’’

रामचन्द्र राणा (बन्दरभरारी) द्वारा वनाधिकार नियमावली संशोधन-2012 के तहत सन् 2013 में प्रस्तुत किये गये 20 गाॅवों के दावों के प्रति जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बरती गयी लापरवाही पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए चुनौती देते हुए अपनी बात को रखा। उन्होंने भी 2013 में जमा कराये गये दावों को खराब करने का आरोप लगाया और पास ना करने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी।

निबादा राणा ने स्पष्ट रूप से कहा कि उ0प्र0 विधान सभा चुनावों की घोषणा व आचार संहिता लागू होने से पहले अगर हमारे दावों को स्वीकार नहीं किया गया तो हम किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे व काले झण्डे दिखाकर विरोध प्रदर्शित करेंगे।

मुख्य अतिथि धनंजय उपाध्याय जो कि अ.भा.व.ज.श्रमजीवी यूनियन के राजनैतिक सलाहकार होने के अलावा उ0प्र0 में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यसमिति के सदस्य भी हैं, उन्होंने अपने सम्बोधन में संशोधन के बाद करीब 4 वर्ष बीत जाने पर भी दावों का निस्तारण ना किये जाने पर अधिकारियों द्वारा बरती गयी लापरवाही पर अफसोस ज़ाहिर करते हुए, पुरज़ोर तरीके से मौज़ूद अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए कहा कि वे इस बारे में मुख्यमंत्री महोदय से बात करके इन दावों पर राज्य सरकार के स्तर पर कार्रवाई कराते हुए, चुनावी अधिसूचना से पहले-पहले इनका निस्तारण हर हाल में करायेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया  िकइस काम में अब कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

तत्पश्चात उपजिलाधिकारी पलिया जो कि वनाधिकार कानून की उपखण्ड स्तरीय समिति के अध्यक्ष भी हैं व नोडल अधिकारी एकीकृत जनजातीय परियोजना अधिकारी को ग्राम सूरमा, सारभूसी, गबरौला, किशन नगर, सिकलपुरवा, भट्टा, बन्दर भरारी, जयनगर, देवराही, नझौटा, ढकिया, बिरिया खेड़ा, सूडा, भूड़ा, छिदिया पश्चिम, सरिया पारा, कजरिया, बरबटा के कुल 18 गाॅवों के 2372 परिवारों द्वारा किये गये दावों की फाईलें ग्राम स्तरीय वनाधिकार समितियों द्वारा सौंपी गयीं।

उपजिलाधिकारी पलिया श्री शादाब असलम द्वारा दावे प्राप्त करने के बाद अपने सम्बोधन में कहा गया कि वे ‘‘वनाधिकार कानून के तहत समुदायों को प्राप्त अधिकारों के लिये पूरी तरह से संवेदनशील हैं और देश के संविधान के बाद कानून ही सबसे बड़ी चीज़ होती है और देश के किसी भी कानून का पालन करना उनकी ज़िम्मेदारी है। वे धनंजय उपाध्याय जी द्वारा किये गये वादे का पूरी तरह से अनुपालन करते हुए, त्वरित कार्रवाई करके इन दावों को जिलास्तरीय समिति के पास अग्रसरित करने का काम करेंगे।’’

एकीकृत जिला परियोजना अधिकारी यू.के. सिंह ने भी अपने काम को ज़िम्मेदारी से करने की बात रखते हुए सभा को सम्बोधित किया। जिसमें उन्होंने त्वरित रूप से आज ही से काम शुरु करने की बात की।

इस कार्यक्रम में दुधवा के तमाम गाॅवों से हजारों की संख्या मे महिला-पुरूष, मुख्य अतिथि व अधिकारियों के अलावा शहरी क्षेत्र पलिया कलां व लखीमपुर खीरी से 50 से अधिक गणमान्य व्यक्तिगण और बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के बाद थारू आदिवासी महिलायें व पुरुष एक अदम्य उत्साह के साथ अपने-अपने घरों को लौटे। रिपोर्ट लिखे जाने तक गाॅव क्षेत्रों में भी भारी उत्साह की खबरें है और दावा करने से रह गये लोग अपने दावे भरने की प्रक्रिया में जा रहे हैं।

फै़ज़ थी राह सर-ब-सर मंजिल 
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