क्या सरकारों के अत्याचार को पूरा कर पाएगा सर्वोच्च न्यायलय का यह फैसला ?


नर्मदा नदी पर बने दो बांधों इंदिरा सागर तथा ओम्कारेश्वर बांध के विस्थापितों को  सर्वोच्च न्यायलय द्वारा मिली राहत में अब प्रभावित परिवारों की मुआवजा राशि  से अनुदान की राशि नहीं काटी जाएगी। यह घटना अपने आप में राज्य सरकार की असंवेदनशीलता की इंतहा को भी दर्शाती है। वह आदिवासी -किसान जो अपना घर, खेत, संस्कृति और अपनी जड़ें सबकुछ खोकर अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं उनके लिए निर्धारित कुछ हजार करोड़ रुपए की विशेष पुनर्वास अनुदान को भी उनके बढ़े हुए मुआवजे में से काट लिया गया। जबकि वहीं दूसरी तरफ यह सरकारें उद्योगपतियों को समस्त प्राकृतिक संसाधन कौड़ियों के दाम पर दे रही हैं। निश्चित ही  सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला विस्थापितों के लिए एक राहत है किंतु यह साथ ही सरकारों की जनता के प्रति जबावदेही के ढकोसले को भी बेपरदा करता है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की 10 अगस्त 2016 को जारी यह प्रेस विज्ञप्ति इस फैसले का पूरा विवरण प्रस्तुत करती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उच्च न्यायालय के आदेश को ख़ारिज करते हुए आदेश दिया है है कि इंदिरा सागर और ओम्कारेश्वर परियोजना प्रभावितों के मुआवजे से विशेष पुनर्वास अनुदान काटा नहीं जायेगा. इस फैसले से इंदिरा सागर और ओम्कारेश्वर परियोजना के हजारों विस्थापितों को बड़ी राहत मिली है. नर्मदा बचाओ आन्दोलन इस फैसले का स्वागत करता है.

उल्लेखनीय है कि इंदिरा सागर और ओम्कारेश्वर परियोजना के प्रभावितों को उनकी जमीन का बहुत कम मुआवजा दिया गया था. इसके बाद इन प्रभावितों को विशेष पुनर्वास अनुदान दिया गया जिसका मुआवजे से कोई सम्बन्ध नहीं था. अनेक प्रभावितों ने भू-अर्जन कानून के तहत मुआवजा बढ़ाने के लिए कोर्ट में केस लगाये और वर्षों की लडाई के बाद उनके मुआवजे में वृद्धि हुई. पर सरकार ने इस वृद्धि में से विशेष पुनर्वास अनुदान काटना प्रारंभ कर दिया जिस कारण प्रभावितों को कोई लाभ न मिलने से उनकी स्तिथि बद से बदतर हो रही थी. इंदिरा सागर और ओम्कारेश्वर परियोजना के प्रभावितों को लगभग 250 करोड़ का विशेष पुनर्वास अनुदान दिया गया था जो कि मुआवजे में से काटा जा रहा था.

प्रभावितों द्वारा न्यायालय में इसे चुनौती देने पर जिला न्यायालय व् उच्च न्यायालय द्वारा इस कटौती को उचित ठहराया गया. इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी. इस अपील पर कल हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रंजन गोगोई एवं न्यायमूर्ति प्रफ्फुल सी पन्त की खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को ख़ारिज करते हुए अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि विशेष पुनर्वास अनुदान का मुआवजे से कोई सम्बन्ध नहीं है अतः इसे काटा जाना अनुचित है. इस आदेश के बाद सरकार विशेष पुनर्वास अनुदान न्यायालय से बढे मुआवजे से काट नहीं सकेगी और पूर्व की कटौती को वापस करना होगा.

नर्मदा बचाओ आन्दोलन हजारों प्रभावितों को राहत देने वाले इस फैसले का स्वागत करता है. प्रभावितों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री संजय पारीख ने पक्ष रखा. जिला न्यायालय में प्रभावितों का पक्ष अधिवक्ता सुजान सिंह एवं अन्य अधिवक्ताओं ने रखा.

(चित्तरूपा पालित)
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