झारखंडियों के खून से लिखी जाएगी झारखण्ड की "विकास" गाथा


-दीपक रंजीत

झारखण्ड के रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र स्थित इनलैंड पावर लिमिटेड (आइपीएल) में विस्थापित अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे . 29 अगस्त 2016 की शाम भाजपा सरकार की पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई. पुलिस की गोली से चार लोगों की मौत हो गयी. करीब दर्जन भर लोग घायल हैं. इनमें चार को रिम्स रेफर किया गया है.

रामगढ़ के गोला थाना क्षेत्र के टोनागातु में इनलैंड पॉवर प्लांट के समक्ष घटना को अंजाम दिया गया. और इसका नतीजा अभी से नोट कर लीजिये.

त्रिपक्षीय वार्ता के लिए कंपनी गेट पर उपस्थित हुए विस्थापितों को ये कह के दोषी ठहरा जाएगा कि वे लोग उपद्र मचा रहे थे पुलिस स्थिति को काबू करने के लिए गोली चलाया. जिसमे गलती से लोग मारे गये. और उप्पद्रव मचाने सरकारी काम में दखल दे किसी के परिसर में घुस के तोड़ फोड़ करने के आरोप में विस्थापितों का प्रतिनिधित्वा कर रहे लोगों के ऊपर केस किया जाएगा.

लोग मारे गये है इसके लिए सरकार एक जांच टीम बनाएगी, जिसका नतीजा कभी नहीं आएगा. यदि जनदवाब में फैसला आ भी गया तो फैसला कंपनी के पक्ष में ही जाएगा. और इस घटना को इसलिए अंजाम दिया गया है क्यूंकि कुछ दिनों के बाद झारखण्ड में अडानी का प्लांट लगने वाली है.

इसके लिए ये झारखंडी जनों के समक्ष यह ट्रेलर दिखाया गया. यदि उस समय कोइ भी अडानी के प्लांट का विरोध करने के लिए आया तो उसका भी यही हश्र होने वाली है.





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