झारखण्ड : भू-हड़प अध्यादेश के खिलाफ राजभवन का घेराव


झारखण्ड राज्य के गठन के बाद से अब तक राज्य सरकार ने देशी-विदेशी कंपनियों के साथ कुल 107 एमओयू किये। लेकिन यह तीखे जन विरोध का नतीज़ा है कि कोई कंपनी उसे अमली जामा पहनाने में कामयाब नहीं हो सकी। आख़िर उद्योग हवा में तो लगाये नहीं जा सकते। लोगों ने ताल ठोंक कर कहा कि वे विकास उर्फ़ उद्योगों के नाम पर अपनी एक इंच ज़मीन भी क़ुर्बान नहीं होने देंगे। यह हुआ एसपीटी-सीएनटी एक्ट  के बल पर भाजपा सरकार ने राज्य में सरकार बनाते ही छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी कर दिया । राज्यपाल के मार्फत यह अध्यादेश मंजूरी के लिए अभी राष्ट्रपति के पास है। इस जमीन हड़प अध्यादेश के खिलाफ झारखण्ड के आदिवासी हर दिन विरोध प्रदर्शन, सभा-रैली कर रहे है । 24 अगस्त 2016 को हजारों आदिवासियों ने राजभवन का घेराव करते हुए अपने संकल्प को दोहराया कि "एक इंच भी जमीन नहीं देंगे"। पेश है दीपक रंजीत की रिपोर्ट;

24 अगस्त 2016 को निर्धारित कार्यक्रम के अनुशार झारखंडियों के जमीन रक्षा के लिए बना कानून सीएनटी एक्ट  1908 और सीएनटी एक्ट  1949 में संसोधन के खिलाफ और रघुवर सरकार के झारखंडी विरोधी स्थानीय नीति में संसोधन के लिए पांचवी अनुसूची क्षेत्र के मुखिया व झारखण्ड के राज्यपाल के समक्ष झारखण्ड के 36 जन संगठनों के लगभग 1500 झारखंडियों ने गर्म जोशी से प्रदर्शन किया.

सुबह 11 बजे से पहले से ही मोराबादी में महात्मा गांधी के समक्ष लोग इकठ्ठा होने लगे. धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगा. ठीक 11 बजे मोराबादी से रैली निकल कर अलबर्ट एक्का चौक होते हुए राज्यपाल भवन पहुंची. रस्ते भर युवा गर्म जोशी से नारा लागाते हुए चल रहे थे कि ”स्थानीय नीति में सुधार करो”, “सी एन टी एक्ट में छेड़छाड़ करना बंद करो”, खतियान आधारित स्थानीय नीति हो,”झारखंडी एकता जिंदाबाद आदि.

रैली पहुचने के बाद राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू को मेमोरेंडम देने के लिए कर्मा उराव, प्रकाश उराव, दयामनी वारला, वासवी कीड़ों, प्रेम शाही मुंडा, शशि उराव, विकास मिंज बाबूलाल मरांडी के अलावे और 10-12 साथी गये थे.
मेमोरेंडम में तिन बिन्दुओं पर विस्तार से प्रकाश दे राज्यपाल का ध्यान आकर्षित करने का चेष्टा किया गया.

सी. एन. टी. एक्ट एवं एस. पी. एक्ट में संशोधन का विरोध
जमावंदी वह लैंड बैंक के संदर्भ में
अधिसूचित स्थानीय नीति में संसोधन के संदर्भ में

मेमोरेंडम में सी. एन. टी. एक्ट और एस. पी. टी. एक्ट संसोधन अध्यादेश 2016 को आदिवासी विरोधी साथ ही साथ झारखंडी विरोधी बतया. कानून में बदलाव इसलिए किया जा रहा ताकि आदिवासियों से आसानी से जमीन लेकर छोटे एवं मझले उद्द्योगपतियों को दिया जा सके. साथ ही यह भी याद दिलाया गया है कि सी. एन. टी. एक्ट और एस. पी. टी. एक्ट होते हुए भी कैसे झारखंडियों का जमीन दबंगों के हाथों में चला जा रहा है?

जमाबंदी व लैंड बैंक के संदर्भ में कहा है कि ये गांव विरोधी नियम है. सरकार जिस तरीके से गैर मजुरवा जमीनों को लैंड बैंक के तहत ला कर बाद में उद्द्योग घराने के सेवा में पेश करने फ़िराक में लगी हुई है सरकार मनसे पर कभी सफल नहीं होगा. क्यूँकि जब भी कोई गांव बनता है तो सिर्फ वह 20-30 घरो में बसने वाली 30-40 परिवार ही नाह बसते है. उसके साथ साथ कृषि कार्य के लिए मवेशी भी होते. मवेशियों के चरने के लिए चारागाह भी जरुरत होता है. गांव में रहने वाले बच्चों के लिए खेलने के मैदान भी होता है. गांव वाले इन सब कामों के लिए गैर मजुरवा जमीन का ही उपयोग करते है. इसके लिए मांग किया राज्यपाल को याद दिलाया कि गैर-मजुरवा जमीन  ग्राम सभा कि होती है और ग्राम सभा सबसे बुनियादी व्यवस्था है.

प्रस्तावित स्थानीय नीति में बाहरियों के सरकारी में घुसने के का खुला छुट देती है. यह नीति बाहरियों को खुस करने के लिए ही बनाया गया है. साथ ही झारखंडियों के लम्बे संघर्ष को छलने का काम किया है. अतः इसे झारखंडी हीत में यथा शीघ्र बदलने – सुधार करने का मांग किया.

भावी कार्यक्रम 
 28 अगस्त 2016 को रैली का समीक्षा बैठक रांची में किया जायेगा. 28 अक्टूबर से पहले तक तीनो मांगे नहीं मानने पर 28 अक्टूबर को मोराबादी में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद भी मांगे नहीं मानने पर राज्य भर में आर्थिक नाकेबंदी हेतु चक्का जाम आन्दोलन चलाया जाएगा.

कार्यक्रम को सफल बनाने में निम्न संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

सोसाइटी फॉर प्रोटेक्शन एंड इन्फोर्समेंट आफ तट्राइबल राईटस, राजी पह्डा प्राथना सभा, मुडमा, आदिवासी सरना महासभा, आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी जन परिषद्, आदिवासी सेना, भारत मुंडा समाज, आदिवासी लोहरा समाज, एच.इ. सी हटिया विस्थापित परिवार समिति, आदिवासी मूलवासी अस्तिव रक्षा मंच, ए. आई. पी. एफ, आदिवासी युवा संगठन, झारखण्ड बचाओ संगठन, झर्कह्न्द बचाओ मंच, अखिल भारती आदिवासी धर्म परिषद्, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच, जागो पहाड़ सरना समिति, आदिद अखाडा, केथोलिक महासभा, कौंसिल आफ चर्चेस, झारखण्ड जनाधिकार मंच, आल चर्चेस झारखण्ड प्रदेश, आदिवासी गोंड महासभा, लापुर पारिस, उराव/कुडुख छात्र संघ, केथोकिल महिला संघ, झारखण्ड लोकतान्रिद क छात्र मोर्चा, झारखण्ड बड़ाइक युवा संघ, रांची खड़िया महासभा, वेदिय विकास परिषद्, एसटी/एससी परिसंघ, शहीद विरसा सेवा समिति, केन्द्रीय विरसा सेवा समिति, केन्द्रीय सरना समिति , रांची सरना समिति कांके, बोदेया ग्राम सभा, झारखण्ड लोकतान्त्रिक छात्र मोर्चा, अखिल भारती आदिवासी मंच, अखिल भारती आदिवासी परिषद्, मांझी परगना इवन वेसी दुमका संथाल परगना.

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