फिर मंडराया सिंगरौली पर विस्थापन का संकट : एक लाख से ज्यादा लोगों को उजाड़ने की तैयारी


देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में प्रख्यात सिंगरौली क्षेत्र एक बार फिर गहरे संकट की ओर बढ़ रहा है। सिंगरौली की जो जमीन कभी घने वनों, वन्यजीवों, भारी बरसात के कारण बीहड़ और रहस्यमय मानी जाती थी वह आज उजड़ रही है। हवा में जहर घुल गया है, चारों तरफ कोयला की राख और धूल ने खेतों और पानी के स्रोतों को जहरीला बना दिया है। और इतना हो जाने के बाद भी मुनाफाखोरों का पेट नहीं भरा और वह एक बार फिर इस क्षेत्र को लूटने-खसोटने का एक और मसौदा लेके आ गए। कोयला खनन हेतु एन.सी.एल. के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा मोरवा बाजार सहित आसपास के 10 गांव की जमीन अधिग्रहण करने हतु 4 मई 2016 को कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 की धारा 4 के अंतर्गत राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया है, जिसमें 4700 एकड़ से ज्यादा भूमि परियोजना हेतु गांव वालों से अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है, जिसके कारण लगभ 1 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित या प्रभावित होंगे। क्षेत्र की तबाही का परवाना लिए इस सरकारी आदेश के खिलाफ सिंगरौली जन आंदोलन मोर्चा का बयान;

मध्य प्रदेश का सिंगरौली क्षेत्र एक बार फिर ऊर्जा और संसाधन के लुटेरों के चंगुल में है। देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में ख्यात सिंगरौली क्षेत्र गहरे संकट की ओर बढ़ रहा है। जो जमीन कभी घने वनों, वन्यजीवों, भारी बरसात के कारण बीहड़ और रहस्यमय मानी जाती थी वह आज उजाड़ है। हवा में जहर घुल गया है, चारां तरफ कोयला की राख और धूल ने खेतों और पानी के स्रोतों को जहरीला बना दिया है। नदियां सूखती जा रही हैं, खेती की उपज आधी हो गयी है, और फल फूल भी लगने कम हो गए हैं। पूरी आबादी फेफड़े और पेट की तरह तरह की बीमारियों से गस्त हैं, बच्चे कई गंभीर बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं जो कभी सुनने में भी नहीं आती थी। ऐसे समय में सरकारी उपक्रम एन.सी.एल. के द्वारा एक बार फिर से जमीन अधिग्रहण के लिए दिया गया नोटिस सरकार द्वारा लोगों के साथ एक भद्दा मजाक लगता है।

राष्ट्रीय हरित न्याधिकरण के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ कोर कमेटी की रिपोर्ट भी यहां के मुसीबतों का कुछ ऐसा ही उल्लेख करती है। कोर कमेटी के आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में 350 से अधिक उद्योग संचालित हैं, जिनसे करीब 45 लाख टन कचरा हर साल उत्सर्जित होता है। इनमें 35 लाख टन तो सिर्फ कोयले की राख है। थर्मल पॉवर प्लांट में 21 हजार मेगावाट बितली उत्पादन के लिए करोड़ों टन कोयला जलाया जाता है। इनके अलावा 10 लाख टन से अधिक लाल कीचड़ (रेड मड) व दूसरे जहरीले रसायन निकालते हैं। इससे निपटने के उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण 20 लाखटन से अधिक कचरा सिंगरौली क्षेत्र में खुले में फेंका जा रहा है जिससे यहां की आबोहवा जानलेवा होती जा रही है।

कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार करीब 17 हजार टन सल्फर डायऑक्साईड और नाईट्रोजन आक्साईड जैसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गैस हवा में तैरने के साथ ही हर साल 8.4 टन यानी 8.4 हजार लीटर मरकरी भी पॉवर प्लांटों से निकल रही है, जो पानी के साथ मिलकर उसे कई घातक बीमारियों का कारण बना रही है। ये सारे उद्योग हमारे नदी-नाले, हवा एवं जमीन को प्रदूषित कर जहरीला बना दिया है। सिंगरोली के आस पास के क्षेत्रों में रिहन्द बांध, सरकारी एवं निजी थर्मल पावर प्लांट तथा कोयला खनन के कारण हजारों परिवार को अपने जमीन से बार-बार विस्थापित होना पड़ा है। 2011 के जनगणना के अनुसार सिंगरौली की आबादी करीब 2 लाख है। 1991 में विश्व बैंक एवं एन.टी.पी.सी. द्वारा गठित पर्यावरणीय आंकलन आयेाग ने पाया कि 90 प्रतिशत स्थानीय सुदाय को इन सभी उद्योगों के कारया एक बार विस्थापित किया गया है और इसमें से 34 प्रतिशत लोग को बार-बार विस्थापित होना पड़ा है।

नौकरी एवं रोजगार का झूठा सपना यहां के युवाओं को दिखाकर यहां के लोगों से प्राकृतिक संसाधन (जल, जंगल और जमीन) छीनकर कम्पनी मुनाफा कमाने में लगी है जो कहीं भी देशहित में नहीं है। इतने वर्षों बाद भी लोग रोजगार के दिखाए एपनों को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और जिनको पहले नौकरियां मिली भी थीं वो आज निकाले जा चुके हैं। वर्तमान में कोयला खनन के कारण जमीन के अंदर का पानी सैकड़ों फीट नीचे चलागया है, जिसके कारण कोयला खान के आसपास के इलाकों में त्राहिमाम मचा है, चाहे वो शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण इलाके। विकास में स्थानीय समुदाय की हिस्सेदारी जैसे सवालों पर वर्षों से केवल राजनीति हो रही है ओर विकास के नाम पर सिंगरौली की जनता की बलि चढ़ाई जा रही है जैसा कि देश के अन्य राज्यों में और मध्य प्रदेश के ही दूसरे जन आन्दोलन क्षेत्रों में देखा जाता है।

कोयला खनन हेतु एन.सी.एल. के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा मोरवा बाजार सहित आसपास के 10 गांव की जमीन अधिग्रहण करने हतु 4 मई 2016 को कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 की धारा 4 के अंतर्गत राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया है, जिसमें 4700 एकड़ से ज्यादा भूमि परियोजना हेतु गांव वालो से अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है, जिसके कारण लगभ 1 लाख या उससे ज्यादा लोग विस्थापित या प्रभावित होंगे। अलग अलग परियेाजना से पहले से विस्थापित परिचार मोरवा तािा आसपास के गांव में अपने परिवार की आजीविका खेती एवं व्यवसाय कर अपने परिवार चला रहे हैं, जो मोरवा बाजार में सब्जी एवं फल बेचकर तथा छोटे-मोटे व्यापार कर संघर्षरत है। इन सभी किसान, मजदूर, आदिवासियों एवं व्यापारियों के ऊपर विस्थापन का खतरा मंडराने लगा है, लोग सुरक्षित भविष्य की चिंता में दिन रात बेचैन रहने लगे हैं।

जिस विकास के गुणगान करती सरकार इनको विस्थािपत करने के एि नोटिस भेजती है, उन्हें ये जरा भी ख्याल नहीं आता कि यही लोग देश के विकास में करोड़ों का व्यापार, खेती से खाद्यान्न, पशुपालन कर लाखों लोगों का पेट भरते हैं, खुद आत्मनिर्भर रहते हुए। मुट्ठी भर पैसों और बिजली के उत्पादन के नाम पर जिन लोगों को बार बार ठगा जाता है वहीं बिजली ऊजांचल के लोगों को ना मिलकर देश के उद्योगपतियों के आगे समर्पित सरकार पूंजीपतियों और उद्योगों को बिना किसी रोक के बांटती फिर रही है। अभी भी सिंगरौली जैसे देश में कई गांव और शहर पूरे देश को ऊर्जा का भंडार देते हैं लेकिन खुद अंधकारमय जिंदगी जीने को मजबूर हैं। ये सरासर विकास के नाम पर देश के लोगों के साथ धोखा है।

विस्थापित होने वाले परिवारों को कम्पनी वाले फिर से मुआवजा एवं नौकरी देने के झूठे आश्वासन देकर फसाने की योजना बना रही है। परन्तु इस बार लोग कम्पनी और उसके दलालों के धोखे में नहीं आने वाले हैं। इस नये विस्थापन के संकट को लेकर 29 जून 2016 को मोरवा रेस्ट हाउस प्रांगण में एक बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें मोरवा बाजार तथा गांव-गांव से आये प्रतिनिधियों ने ऊँचे स्वर में विस्थापन को नामंजूर करते हुए परियोजना और इसके झूठे विकास के दावों के लिए अपनी जमीन सरकार को किसी भी कीमत में नहीं देने का एलान किया। बैठक में मौजूद लोगों ने यह भी निर्णय लिया कि इस भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कानूनी एवं जमीनी स्तर पर आर पार की लड़ाई लड़ी जायेगी और इस संघर्ष को आगे ले जाने हेतु सिंगरौली जन आंदोलन मोर्चा का गठन किया। जो भी व्यक्ति, संस्था एवं संगठन इस विस्थापन एवं  भूमि अधिग्रहण और संसाधनों क लूट के खिलाफ एकजुट होना चाहते हैं उन सभी का इस मोर्चा में स्वागत है।

इस संघर्ष में हम लोगों को जाति, धर्म, मजदूर, किसान, व्यापारी, अमीर गरीब, राजनैतिक दल आदि जैसे भेदभाव को छोड़कर एक साथ मिलकर इस अन्यायी विस्थापन और लूट का मुकाबला करेंगे। अतः आप सभी सिंगरौली वासियों से विनम्र निवेदन है कि इस न्याय की लड़ाई में तन, मन एवं धन के साथ एकजुट हों तथा सिंगरौली को नये विस्थापन और संसाधन की लूट के गहरे संकट से बचायें।


सिंगरौली जन आंदोलन मोर्चा,

अवधेश जी 9425013524, विजय 9981773205,

Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।