पेंच बांध से विस्थापित शरणार्थियों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर : जांच दल की रिपोर्ट


इस तस्वीर को ध्यान से देखिए, यह तस्वीर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में पेंच बांध से विस्थापित लोगों को बसाने के लिए बनाये गये  पुनर्वास केंद्र की है। इस तरह के पांच केंद्र बनाये गए है जहाँ पर  न रहने के लिए घर है न ही वहां पर पानी, बिजली इत्यादि की व्यवस्था भी नहीं है। प्रशासन ने किसानों को बिना मुआवजा दिए जबरन पुनर्वास केंद्रों पर ले जाकर पटक दिया है। शरणार्थियों से भी बदतर हालत में रह रहे इन किसानों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के इंतजाम के बारे में तो सोचा भी नहीं जा सकता है। 14 जुलाई 2016 पुनर्वास केंद्रों का जायजा लेकर लौटे किसान संघर्ष समिति के जांच दल ने 19 जुलाई 2016 को छिंदवाड़ा के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है;

प्रति,
जिलाधीश
छिन्दवाड़ा, मध्य प्रदेश

माननीय महोदय,
पुनर्वास नीति का पालन पेंच व्यपर्वन परियोजना के प्रभावित गांव वासियों को नही मिल रहा है।
आदर्श नीति में ऐसे सभी सामाजिक  पहलूओं को रखा गया है, जो की पूर्ण रूपेण पुनर्वास के लिए आवष्यक है। पूर्ण रूपेण पुनर्वास से तात्पर्य है कि विस्थापित व्यक्ति को कुछ समय बाद यह महसूस ही न हो की वह विस्थापित होकर अपने जाने पहचाने पर्यावरण से दूर हो गया है या कट गया है। पुनर्वासित परिवारों को उनके नए स्थान पर जीवन यापन प्रारम्भ करने में कठिनाई न हो। अनुसूचीत जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विस्थापित परिवारों तथा छोटे एवं सीमांत कृषकों के विस्थापित परिवार के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। भूमि स्वामियों एवं पट्टा धारियों को यथा संभव निश्चित समय सीमा में मुआवजा भुगतान किया जायेगा। शासन की निर्धारित नीतियों के अन्तर्गत पात्रता के अनुसार उनको भूमि आबंटन करने पर भी यथा संभव विचार किया जावेगा।
दिनाँक 14/07/2016 को किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष, जन आन्दोलनों के एवं समाजवादी समागम के राष्ट्रीय संयोजक पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम्, किसान संघर्ष समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, किसान संघर्ष समिति के छिन्वाड़ा ब्लाक के अध्यक्ष सज्जे पटेल, किसान संघर्ष समिति के सदस्य वसीर भाई एवं मछुआरा संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष श्री आशाराम उईके जी पेंच व्यपर्वतन परियोजना से विस्थापित पाँच पुनर्वास स्थल पर पहुँचे जहाँ पर पाया गया कि मध्यप्रदेश की आदर्श पुनर्वास नीति का कहीं पर भी पालन नही किया गया है। जो किसान  अपने गांव में आधा-आधा एकड़ जमीन पर अपना मकान बनाकर पीढ़ियों से रहते चले आये थे उनके मकान पुलिस के बल पर मार-पीट कर धमकाकर जोर -जबरदस्ती से खाली करवा लिये गए। तथा उन्हें प्लाट अबंटन का एक कागज का भू-खण्ड आबंटन, जिस पर भू-खण्ड आबंटन प्रभारी अधिकारी लिखा हुआ है पर तहसीलदार की सील लगी हुर्इ्र है दे दिया गया है । स्पष्ट है कि मालिकाना हक का मकान तो अधिग्रहित कर लिया मालिकाना हक देना तो दूर उसकी जगह पर उसे पट्टा भी नही दिया गया। कुआँ, ट्यूब बेल, पाईप लाईन का मुआवजा पूरे क्षेत्र में एक भी किसान को नही दिया गया। किसान द्वारा माँगने पर कहा गया कि सिंचित क्षेत्र का मुआवजा दे दिया गया है, इस करण से कुआँ, ट्यब बेल, पाईप लाईन का मुआवजा नही दिया जावेगा।
जाँच दल की टीम सबसे पहले ग्राम बारह बिरयारी पहुँची - जहाँ सुखलाल से बात की उन्होने बताया कि दिनाँक 19/07/2016 को एस.डी.एम. चौरई एवं तहसीलदार 20 - 25 पुलिस वाले के साथ आए और कहने लगे कि गांव खाली करो हम लोगो ने कहा कि पानी गिर रहा है, ऐसे में कैसे घर खाली किये जा सकते है। मकान का मुआवजा 75000 से 3,00,000 लाख रूपया दिया गया हैं इतने में मकान नही बने है। मकान के नींव (आधार) बानाने में ही पैसा खर्च हो चुका है, रहने के लिए छत भी नही है। बताइए ऐसी स्थिति में हम अपना घर, गाय, बैल, भैंस, मुर्गा-मुर्गी, बकरा -बकरी छोड़ कर कहाँ चले जाएँ। इस पर अधिकारियों ने कहा कि सिगना कॉलोनी चले जाओ, औरतों ने कहा कि सिंगना कॉलोनी में हमारे परिवार के एवं हमारे गांव के कोई नही रहते हम वहाँ असुरक्षित है। सिगना कॉलोनी के मकान भी टूटे हुए है। हमारे जानवर भी वहाँ बँध नही सकते इसलिए हम सिगना कॉलोनी नही जायेगे इस पर एस.डी.एम. एवं तहसीलदार को गुस्सा आया और उन्होने महिलाओं पर लाठी चार्च करवा दिया तथा कमालबी को लाठी से बहुत पिटवाया गांव के एक व्यक्ति के हाथ भी फैक्चर हो गया रात में धनौरा गांव के चार टेªक्टर में जोर जबरदस्ती से सामान भर कर हिवर खेड़ी स्कूल में रख दिया। कमालबी का सामान ग्राम पंचायत भवन में रखा हुआ है, पुनर्वास स्थल पर पीने का पानी उपलब्ध नही है। अभी गांव के लोग टेंकर से पानी खरीद कर पी रहे है। बारह बिरयारी मे स्कूल नही है। ग्राम पंचायत भवन में स्कूल लग रहा हैै पाँचवी क्लास के 9 बच्चे, चौथी क्लास के 6 बच्चे, तीसरी क्लास के 7 बच्चे, पहली एवं दूसरी क्लास से 5-5 बच्चे एक कमरे में ही पढ़ रहे थे
मुआवजे में विसंगती - अभिभान भलावी पिता रूपचन्द्रमणि भलावी ने बताया कि साढ़े छः एकड़ खेत मेरे पिता के नाम पर था जिस पर 20 जाम, के पेड़ एक नीबू, एक रेठू, तीन बबूल, एंव 20 सीताफल के पेड़ थे खेत सिंचित था जिसमें दो कुआँ था कुआँ का मुआवजा नही दिया गया है। कुल तीस लाख रूपया का मुआवजा मिला है।
राजेन्द्र मसराम ने बताया कि मेरे नाम पर 16 एकड़ भूमि थी जिसका मुआवजा 65 लाख रूपया देने का नोटिस मिला कुआँ पाईप लाईन एवं बोर का पैसा नही मिला 65 लाख रूपये में से 10 लाख रूपया नही दिये गए क्यो नही दे रहे है, इसका कारण नही मालूम। बालकृष्ण मसराम ने बताया कि 16 एकड़ जमीन का मुआवजा 65 लाख रूपया मिला। गांव के बाहर पेंच व्यपर्वन वृहत परियोजना जिला छिन्दवाड़ा पुनर्वास स्थल का बोर्ड अवश्य लगा है। जिसमें एक आदर्श गांव में जो होना चाहिए उन सब का उल्लेख है किन्तु वास्तविकता की जानकारी तो गांव में ही जाकर लगी। स्कूल की बिल्डिंग बनाई तो गई है किन्तु बहुत अधिक पानी टपक रहा है। बच्चे नई बिल्डिंग में नही बैठ सकते। ग्राम बारह बिरयारी के बच्चे ग्राम पंचायत के एक कमरे में पाँच क्लास के बच्चे आकर बैठे थे, और एक क्लास के अन्दर ही दो टीचर उन्हें पढ़ा रहे है। मध्यान भोजन स्कूल में नही मिल रहा है। पुनर्वास केन्द्र के बोर्ड पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उल्लेख अवश्य किया है। परन्तु प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र भी उपलब्ध नही है। महालाल मसराम वल्द तुलाराम मसराम ने बताया कि छ. एकड़ खेत था मकान का 70,000 रूपया मिला दो माह पूर्व कलेक्टर एवं एस.डी.एम. गांव में आये थे तब कहा था कि 18,000 रूपयो मकान का सामान ढोने का दिया जायेगा किन्तु 12,000 रूपयो सामान ढोने को दिया गया। शेख ताहिर उम्र 35 वर्ष पिता शेख अहमद ने बताया कि मकान का 1,72,000 रूपया दिया गया है। उतने में मकान नही बन पा रहा है। आशाराम ने बताया कि उसके तीन पुत्र है अनिल मसराम, अमित मसराम, मन्तोस मसराम 10,00,000 रूपया खेत का मुआवजा मिला था मकान बनाने में पैसा खर्च हो गया।
पुनर्वास स्थल धनौरा - कन्हैराम पिता सहगू ने बताया कि उसके दो मकान थे। एक मकान का मुआवजा मिला और एक मकान का मुआवजा नही मिला ट्यब बेल, कुआ, पाईप लाईन का पैसा नही मिला। मरगू पिता शंकर ने बतया कि मेरे दो मकान का मुआवजा 6 लाख रूपया मिला पुनर्वास स्थल पर सीवर लाईन पाईप लाईन नही थी पीने के पानी भी उपलब्ध नही है। पाँच सौ रूपया टेंकर के हिसाब से पुर्नवास स्थल पर पानी खरीदने को मजबूर है। बिजली का कनेक्शन भी नही मिला है। पुनर्वास स्थल पर साँप बिच्छू निकल रहे है। शान्ति बाई पति राम रहेश लोधी ने बताया कि .290 हेक्टेयर जमीन खसरा नम्बर 257/16  एवं 259/17 खेत का मुआवजा 390748 देने की सूचना दिनांक 28/01/2016 को भू-अर्जन अधिकारी द्वारा लिखित दी गई उस कागज को लेकर हीवर खेड़ी सेन्ट्रल बैंक में ले जाकर दिखाया तो बैंक वालों ने कहा कि तुम्हारे खाते में 2 लाख 35 हजार रूपये ही आए है। मन्गी वल्द गिल्ली बेलवंशी धनौरा ने बताया कि 2,00,000 रूपये का कर्जा खेती को सुधारने के लिए लिया था जिसका ब्याज 1,20,000 रूपया हो गया है। बैक वाले कर्जे की राशि वसूल रहे है। सीताराम वल्द पन्ना वर्मा  ने बताया कि 25000 रूपया का कर्जा लिया था जिसका ब्याज 4000 रूपया हो गया है। मुआवजे की राशि से बैंक वाले कर्जा काट रहे है। 10 दिन से धनौरा का स्कूल बन्द है। अस्पाताल की कोई व्यवस्था नही है। सिंगोड़ी पुनर्वास स्थल से 15 किमी. दूर छिन्दवाड़ा अस्पाताल 40 किमी. दूर और चौरई 60 किमी. दूर है।
विसंगती - राम रहेश को 6 लाख रूपया मिला, राम कृष्ण को 10 लाख रूपया मिला, सहसराम को 8 लाख रूपया मिला, जबकि तीनों  मकान एक से हैं । धनौरा में दो मंदिर थे उन्हें भी पुनर्वास स्थल पर नही लाया गया है। विजय कुमार बैलवंशी  निवासी बारह मकान का मुआवजा नही मिला है। जोहरबल तिज्जू मकान का मुआवजा नही मिला है। बसंत उईके पिता बलराम उईके निवसी बारह बिरयारी का मकान का मुआवजा नही मिला है, किन्तु मकान के ढुलाई का 12000 रूपया मिला है। लच्छू वल्द छिन्दा वर्मा एक मकान का मुआवजा नही मिला है। सिया प्रसाद बन्देवार पिता तिज्जू निवासी बारह बिरयारी मकान का मुआवजा बहुत कम मिला है। सन्तू वर्मा पिता खुमान वर्मा उम्र 50 वर्ष निवासी मोहगांव मकान का मुआवजा नही मिला। मकान तोड़ने का 12,000 रूपया मिला पर मकान का मुआवजा नही मिला। सन्तु को मोबाईल नम्बर 9893442253।
पुनर्वास स्थल कर्वे पिपरिया - आशोक भलावी उम 24 वर्ष वल्द गोवर्धन भलावी मकान का कोई मुआवजा नही मिला। गवन्धि उम्र लगभग 55 वर्ष पति ज्ञास लाल निवासी कर्वे पिपरिया 5 लाख रूपया मकान का मुआवजा मिला गवन्धि बाई ने बताया कि पूर्व में पुनर्वास स्थल पर 30 लोगों को बसाया जाना था जिसमें 60‘‘ वाई 90’’ के प्लाट दिये जा रहे थे परन्तु अब पुनर्वास स्थल पर 55 लोगों को बसाया जा रहा है। अब पूरी बस्ती एक जगह पर आ रही है। हरीश डेहरिया मोबा. 9685589765, ने बताया कि 5 एकड़ जमीन का मआवजा 40 लाख रूपया दिया गया व मकान का मुआवजा 1,50 लाख रूपय दिया हम 10’’ 50’’ के मकान में रहते थे। आस पास के गांव में 15 से 20 लाख रूपया एकड़ में जमीन मिल रही है। गांव के किसी भी किसान ने जमीन नही खरीदी क्योंकि मुआवजा बहुत कम मिला है। श्रीराम वर्मा निवासी कर्वे पिपरिया ने बताया कि कर्वे पिपरिया में 30‘‘ बाई 80’’ में मकान था किन्तु पुनर्वास स्थल पर मुझे कोई प्लाट नही दिया गया है। उसने बताया कि कर्वे पिपरिया के स्कूल में 80 बच्चे पढ़ने आते थे। यहाँ पुनर्वास स्थल पर 5 बच्चे पढ़ने आए है। उसी तरह आंगनवाड़ी में 70 बच्चे थे पुनर्वास स्थल पर 3 बच्चे आ रहे है।
पुनर्वास स्थल पर सीवर पाईप लाईन नही है। पक्की नालिया भी नही बनाई गई है बिजली के मीटर भी नही लगाए गए है। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही है। एक बोर किया गया था जिसमें पानी नही निकला। प्राथामिक स्वाथ्य केन्द्र, पशु चिकित्सालय भी नही है जानवरों को चराने के लिए चारागाह भी नही है।
मोहगांव पुनर्वास स्थल - लख्खी पिता असाडू गोड़ ने बताया कि उसके पूरे परिवार का जीवन यापन खेती पर था खेती के अलावा जीविका उपार्जन का उसके पास अन्य कोई साधन उपलब्ध नही है। उसके पास 6 एकड़ जमीन थी जिस पर 149 पेड़ और 2 कुआँ थे कुल 36 लाख रूपया मुआवजा मिला है। जमीन 15 से 20 लाख रूपए एकड़ में मिल रही है। सरकार ने बहुत कम मुआवजा दिया है। मैं तथा मेरा परिवार भुखमरी की कगार पर खड़ा है।  हमे जिस जगह पर बसाया गया है। वहाँ पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही है। रोजगार के भी कोई साधन नही है। प्रथमिक स्वाथ्य केन्द्र की भी व्यवस्था नही की गई है। 55 लोगों को प्लाट अबांटित किये गए है। पर उसका पट्टा भी प्रदान नही किया गया है। आसपास में मजदूरी  का काम भी नही मिलता। हम अपने गांव में सुखी और सम्पन्न थे, मुझे कुआँ को मुआवजा नही दिया गया। समनिया पति असाडू गोड़ के तीन लड़के है, समनिया एवं असाडू के मौत हो चुकी है। उनका बेटा लखन वल्द असाडू केन्सर से पीड़ित है, इलाज हेतु अपने मुआवजे में से कुछ राशी माँग रहे है। परन्तु एक भी पैसा उसे नही मिल पा रहा है। क्योंकि खातों का बंटवारा नही हुआ है। राशन की दुकान भी नही है। मिट्टी का तेल भी उपलब्ध नही कराया जा रहा है। जानवर को चराने के लिए जगह (चारागाह) उपलब्ध न होने की स्थिति में किसान ओने-पोने दाम पर जानवर बेचने पर मजबूर है, तो भी जानवर नही बिक रहे है। स्कूल में मध्यान भोजन नही मिल रहा है।  एक हेडपम्प लगा है, पर उसमें पीने योग्य पानी उपलब्ध नही है।
पुनर्वास स्थल ग्राम भूला - गांव के लोगो ने बताया कि हमें जिस जगह पर बसाया गया है, उसका नाम आदर्श भूला गांव है जहाँ पर कि लाईट, पीने योग्य पानी अस्पताल, पशु चिकित्सालय, नही है। 35 लोगों ने मकान बना लिए है। मकान बनाने के लिए टेंकर से पानी खरीदना पढ़ रहा है, सीवर लाईन नही है, मंदिर नही है, स्कूल नही है। अगर कोई गांव में बीमार हो जाए तो 3 किलोमीटर दूर अस्तपाल है। सरकार द्वारा पीने के पानी के लिए एक भी बोर नही करवाया गया है।
गांव में जाँच दल की टीम को कोई बोर्ड भी दिखाई नही दिया। मोनू जिन्होने अपना फोन नम्बर 8349119952 दिया और बताया कि 5 एकड़ जमीन एक मकान, 42 पेड़ का मुआवजा 38 लाख रूपया दिया गया। मुआवजा के पैसे से दो टेªक्टर खरीदे थे गांव में खेती करने के उद्देश्य से ट्रेक्टर लिये थे परन्त मेरे पास एवं मेरे गांव के लोगों के पास खेती न होने के कारण टेªक्टर पानी में खड़े खराब हो रहे है। यहाँ रोजगार का कोई साधन नही है। आस पास में कोई बस्ती नही है, ऐसा लगता है, जैसे हमें जंगल में लाकर पटक दिया है। ग्यास लाल अहिरवार ने बताया कि जटलापुर में 55 मकान डूब में आ रहे है। 6 लोगों को मकान का मुआवजा नही दिया गया है। पतिराम यादव, सहबू अहिरवार, मनीराम अहिरवार, रतिराम को मकान का मुआवजा नही दिया गया है।

कलेक्टर (भू-अर्जन शाखा छिन्दवाड़ा) द्वारा राष्ट्रीय नीति 2003 के अन्तर्गत परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनःस्थापन एवं पुनर्वास के सम्बंध में जानकारी प्राप्त की जिसमें भारत सरकार का राजपत्र 19 फरवरी 2004 में उल्लेख किया गया है। कि पुनर्वास एवं पुनःस्थापन  से असन्तुष्ट होने या उससे सम्बंधित शिकायत सुनने के लिए आयुक्त का गठन किया जायेगा जो सचिव के पद के नीचे का नही होगा। पूरे क्षेत्र में किसी को भी नही मालूम कि पुनर्वास या पुनःस्थापन सही नही होने पर कहाँ शिकायत करनी है। याने शिकायत आयुक्त की जानकारी सरकार द्वारा विस्थापित परिवारों को नही दी गई।
परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए पुनःस्थापन तथा पुनर्वास लाभ देने के सम्बन्ध में उल्लेख है - कि गरीबी रेखा के नीचे के श्रेणी के प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार को घर के निर्माण के लिए एक ही बार दी जाने वाली सहायता राशि 25,000 रूपये की वित्तीय सहायता दी जाऐगी । जाँच टीम ने पुनर्वास स्थल पर वी.पी.एल. परिवार के सदस्यों से पूछा कि उन्हें 25000 रूपये की राशि मिली है क्या, तो एक भी व्यक्ति नही मिला जिसे 25000 हजार रूपये मकान निर्माण के लिए दिये गये हो।
ऐसे प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार जिसकी प्रभावित क्षेत्र में कृषि भूमि है। और जिसकी पूरी भूमि अर्जित कर ली हो को भूमि के क्षेत्र की वास्तविक क्षति के बराबर कृषि भूमि या कृषि योग्य बंजर भूमि आबंटित करने का उल्लेख है। प्रभावित किसान में से किसी को भी जमीन अंबटित नही की गई है। अर्जित की गई भूमि के बदले में बंजर भूमि आबंटित किये जाने के मामले में प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवारों को भूमि विकसित करने के लिए 10 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता देने के प्रावधान है। किन्तु क्षेत्र में किसी भी कास्तकार को यह राशि आबंटित नही की गई है। कृषि भूमि अबंटित किये जाने के मामले में कृषि उत्पादन के लिए प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार को एक बार दी जाने वाली वित्तीय सहायता राशि 5 हजार रूपये की राशि वित्तीय सहायता देने का उल्लेख है। किन्तु किसी भी कास्ताकार को यह राशि प्रदान नही की गई है।
पशु रखने वाले प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार का पशु शाला का निर्माण करने के लिए 3 हजार रूपये के वित्तीय सहायता देने का उल्लेख है जो कि किसी किसान को नही प्रदान की गई है। ऐसे प्रत्येक परियोजना  प्रभावित परिवार  जिसमें ग्रामीण दस्तकार/छोटे व्यापारी तथा स्वनियोजित व्यक्ति शामिल हो को कार्य सेट/ दुकान के निर्माण के लिए 1 बार दी जाने वाली सहायता राशि 10 हजार रूपया की वित्तीय सहायता दी जाएगी का उल्लेख है किन्तु यह राशि किसी को भी प्रदान नही की गई है। ऐसे प्रत्येक प्रभावित परिवार जिसकी प्रभावित क्षेत्र में कृषि भूमि हो तथा जिसकी पूरी भमि अर्जित की गई हो जिस ममले में परियोजना प्रभावित परिवार को न तो कृृषि भूमि आबंटित की गई हो और न ही  उसके किसी एक सदस्य को नियमित रोजगार उपलब्ध कराया गया हो को आजीविका की क्षति के लिए 750 दिन की निम्नतम् कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाली सहाययता के रूप में वित्तीय सहायता देने का उल्लेख है। जो किसी भी किसान को नही दी गई है।
प्रभावित क्षेत्र मे कृषि भूमि रखने वाले ऐसे प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार जिसके पूरी भूमि अर्जित नही की गर्इ्र है। और भूमि-अर्जन के परिणाम स्वरूप वे सीमांत किसान बन गए है। को 500 दिन की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाली सहायता के रूप में वित्तीय सहायता दी जायेगी जो क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को प्रदान नही की गई है। ऐसे प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार जिसकी प्रभावित क्षेत्र में कृषि भूमि हो तथा जो भू-अर्जन के परिणाम स्वरूप छोटे किसान बन गए हो को 375 दिनो की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाले सहायता के रूप में वित्तीय सहाता दी जाएगी। कृषि श्रमिक या गैर कृषि श्रमिक की श्रेणी से सम्बंधित प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार को 625 दिन की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर एक बार दी जाने वाली सहायता का उल्लेख है। किन्तु यह राशि भी किसी भी श्रमिक को नही प्रदान की गई है। प्रत्येक विस्थापित परियोजना प्रभावित परिवार को एक वर्ष की अवधि के लिए 250 दिन तक प्रति मास 20 दिन की न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर मासिक आजीविका भत्ता दिया जायेगा का उल्लेख है। किन्तु  किसी भी परिवार को यह राशि उल्पब्ध नही कराई गई है।
अतः  निवेदन है कि पेंच व्यपर्वन परियोजना से प्रभावति किसान, मजदूर, आदिवासी को पुनर्वास नीति का लाभी शीघ्रता शीघ्र दिलाया जावे ताकि पशु तुल्य जीवन जीने के लिए मजबूर लोग सम्मान पूर्वक अपना जीवन जी सकें। माँगें पूरी न होने पर किसान संघष समिति विस्थापित परिवारों के हक में आन्दोलन करने पर मजबूर होगी।
दिनांक 19/07/2016
स्थान - छिन्दवाड़ा एड. आराधना भार्गव
   प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति

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