विकलांग किसान की डेढ़ एकड़ भूमि के लिए लालायित सर्वशक्तिशाली जे.पी. कम्पनी

देश के लगभग हर राज्य में जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में तीखे आंदोलन चल रहे हैं। हर कोने में किसान अपनी भूमि के जबरन छीने जाने के खिलाफ सरकारों से अपील करके-लड़ के, जिस भी तरीके से हो सके अपनी जमीनें बचाने की कोशिश में लगे हैं लेकिन इसके बावजूद इस देश की शासन व्यवस्था बड़ी ही बेशर्मी से एक के बाद एक निजी पूंजीपतियों और औद्योगिक घरानों को किसानों-आदिवासियों की जमीनें सौंपती जा रही है। और इस सबमें पंचायत से लेकर जिलाधिकारी तक हर स्तर पर अफसरशाही सबसे मददगार साबित हो रही है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक और जबरन भूमि अधिग्रहण की घटना सामने आई है जिसमें सबसे दुखद पक्ष यह है कि पीड़ित किसान शारीरिक रूप से विकलांग भी है। एक  विकलांग किसान के छोटे से जमीन के टुकड़े को लूटने के लिए शक्तिशाली जे.पी.एसोसिएट्स द्वारा खेले गए खेल का खुलासा कर रहे हैं रोको-टोको-ठोको क्रांतिकारी मोर्चा के उमेश तिवारी;

देश के क्रूरतम उद्योगपतियों में से एक जे.पी. एसोसिएट के  सीधी जिले के ग्राम बघवार में सीमेंट प्लांट की स्थापना क्षेत्र के किसानों के लिए आफत बन गया है। सीमेंट प्लांट की स्थापना होने के दिन से जेपी एसोसिएट द्वारा किसानों एवं आसपास के ग्रामीणों की संपत्ति को जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों की सांठगांठ से बेख़ौफ़ लूटा जा रहा है साथ ही स्थानीय लोगों का सुख-चैन  भी छीन लिया है। उक्त बातें एक विज्ञप्ति में टोको-रोको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कही है। श्री तिवारी ने आगे कहा है कि जेपी सीमेंट बघवार के प्रबंधक द्वारा अपने लूट के साम्राज्य को बढ़ाते हुए ग्राम पिपराँव के किसान रामनिवास सिंह की बची-खुची डेढ़ एकड़ भूमि जो ग्राम धौरहरा में स्थित है जिसका खसरा क्रमांक 26 है वह भी छीन लिया है।

रामनिवास सिंह 100% विकलांग है। उनकी तथा उनके परिजनों के स्वत्व की भूमि लगभग 6 एकड़ थी जिसका अंशभाग लगभग 4.50 एकड़ पहले ही सीमेंट प्लांट के पक्ष में अधिग्रहित किया जा चुका है जो शेष डेढ़ एकड़ भूमि थी उसमें रामनिवास झोपड़ी बनाकर आबाद थे, उसी भूमि में टपरा लगाकर चाय पान का व्यापार कर के बाल बच्चों का भरण पोषण करते थे। रामनिवास सिंह के बचे भूमि के टुकड़े पर जे.पी. एसोसिएट्स की गिद्ध दृष्टि लगी हुई थी और उसे पाने के लिए जे.पी. द्वारा प्रशासन की सांठगांठ से रामनिवास सिंह को मजबूर किया जाता था।

रामनिवास सिंह द्वारा उक्त भूमि का सीमांकन कराकर तार से बाउंड्री बना ली गई थी। बावजूद इसके जे.पी. एसोसिएट्स द्वारा रामनिवास की भूमि लूटने का षड्यंत्र किया जाता रहा। परेशान होकर रामनिवास सिंह ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जहां न्यायालय तृतीय अपर जिला न्यायाधीश महोदय सीधी द्वारा दिनांक 22 अप्रैल को रामनिवास सिंह के पक्ष में आदेश कर जेपी एसोसिएट को आदेशित किया कि ना तो वह और ना ही उसकी ओर से अधिकृत अन्य कोई व्यक्ति रामनिवास सिंह के अधिपत्य में हस्तक्षेप करेगा।

इसके पहले अनुविभागीय अधिकारी चुरहट ने अपने प्रकरण क्रमांक 50/अ-74/09-10 आदेश दिनांक 15-4-2010 में उक्त भूमि को रामनिवास सिंह के स्वत्व की भूमि होने का आदेश किया गया था। श्री तिवारी ने कहा कि न्यायालय के आदेश को धता बताते हुए जेपी सीमेंट बघवार द्वारा पुलिस चौकी पिपरॉव से सांठगांठ कर चौकी प्रभारी को कौरा फेंककर रामनिवास सिंह को पुलिस चौकी पिपराँव उठा लाया गया और अपने गुंडों से रामनिवास सिंह द्वारा लगाई गई तार की बाड़ को तोड़ कर तारा खम्भे उठा ले जाया गया।

अपने साथ हो रहे अत्याचार की फरियाद रामनिवास सिंह द्वारा मुख्यमंत्री सहित मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से की गई है लेकिन दोषी के विरुद्ध कोई कार्यवाही ना होने से विकलांग किसान रामनिवास सिंह निराश एवं मायूस हैं। श्री तिवारी ने कहा है की हैवान, शैतान, और बेईमान जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और उद्योगपतियों के नापाक गठजोड़ के कारण किसान हल के जगह हथियार थामता है।

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