मणिपुर भवन पर प्रदर्शन करने गये आंदोलनकारियों पर बर्बर पुलिसिया दमन


7 जून को मणिपुरी ट्राइबल फोरम दिल्ली द्वारा 31 अगस्त 2015 को मणिपुर में पास किए गए तीन विवादास्पद बिलों के विरोध में मणिपुर भवन, नई दिल्ली के बाहर प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस एवं  मणिपुर राइफल्स द्वारा बर्बर लाठी चार्ज किया गया। पुलिस तथा मणिपुर राइफल्स द्वारा किए गए इस क्रूर कृत्य पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन का बयानः

7 जून 2016 को दिल्ली पुलिस और मणिपुर राइफल्स के जवानों द्वारा मणिपुरी आंदोलनकारियों का बर्बर दमन किया गया। इस दमन के दौरान महिलाओं समेत लगभग 10 आंदोलनकारी बुरी तरह से घायल हैं जबकि लगभग 30 आंदोलनकारियों को गिरफतार कर लिया गया। परिवर्तनकामी छात्र संगठन, दिल्ली पुलिस व मणिपुर राइफल्स द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कठोर शब्दों में निंदा करता है। हम मांग करते हैं कि मणिपुर सरकार आंदोलनकारियों से वार्ता कर उनकी मांगों के संबंध में कदम उठाए तथा लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्यवाही करे।

दरअसल पिछले साल 31 अगस्त को मणिपुर विधानसभा में 3 बिल पास किए गए। जिसके विरोध में पूरे मणिपुर में तब से ही आंदोलन जारी है। मणिपुरी जनता का मानना है कि इन बिलों के चलते उनके अधिकारों पर बाहरी लोगों का अतिक्रमण हो जाएगा। साथ ही बाहरी लोगों को भी मणिपुर में जमीन खरीदने व बेचने का अधिकार मिल जाएगा। जिसे मणिपुरी जनता अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों पर हमला मानती है। मणिपुर सरकार द्वारा आंदोलन का जर्बदस्त दमन किया गया। जिसके चलते अब तक इसमें 8 लोग मारे जा चुके हैं। इससे पहले मणिपुरी ट्राइबल फोरम दिल्ली (MTFD) के नेतृत्व में सैकड़ों ओदोलनकारियों द्वारा अपनी मांगों के संबंध में 4 नवम्बर 2015 से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक धरना दिया जा रहा था। परंतु सरकार ने उनकी मांगों के संबंध में कोई कदम नही उठाया। 7 जून को मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के नेतृत्व में एक डेलीगेशन राष्ट्रपति से इन बिलों पर सहमति प्राप्त करने के दिल्ली आया हुआ था। जिसके विरोध में MTFD द्वारा मणिपुर भवन, नई दिल्ली पर एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। जिस पर दिल्ली पुलिस द्वारा मणिपुर राइफल्स के साथ मिलकर बर्बर लाठीचार्ज किया गया।

पिछले साल से मणिपुर में और नवंबर से दिल्ली में मणिपुरी आंदोलनकारी अपनी मांगों के संबंध में संघर्षरत हैं फिर भी मणिपुर सरकार द्वारा इस पर कोई कार्यवाही ना करना उसके दमनकारी चरित्र को उजागर करता है। वहीं इस पूरे ही आंदोलन का मीडिया द्वारा बाॅयकाट किया जाना मीडिया की पक्षधरता को भी उजागर करता है। पछास सभी प्रगतिशील ताकतों का आहवान करता हैं कि मणिपुरी सरकार द्वारा आंदोलनकारियों के दमन का विरोध करे और इस बर्बर दमन के विरोध में अपनी आवाज उठाए।





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