तमाम दबावों के बावजूद ऋचा फैक्ट्री, काशीपुर के मजदूरों का संघर्ष जारी


उत्तराखण्ड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर शहर में स्थित ऋचा फैक्ट्री के मजदूर फैक्ट्री में यूनियन खत्म करने के विरुद्ध तथा यूनियन की मान्यता हासिल करने के लिए हड़ताल पर बैठे हैं। हड़ताल पर बैठे मजदूरों पर फैक्ट्री प्रबंधन डराने धमकाने से लेकर हर तरह के दबाव इस्तेमाल कर रहा है जिसके मजदूर हड़ताल छोड़ दे। लेकिन प्रबंधन के तमाम कोशिशों के बावजूद मजदूर अपनी मांगों को लेकर दृढ़ता से टिके हुए हैं। इसी संबंध में 6 जून को मजदूरों ने काशीपुर शहर में प्रदर्शन किया। प्रस्तुत है  साभार इंकलाबी मजदूर केंद्र की प्रदर्शन की विस्तृत रिपोर्टः
काशीपुर(उत्तराखण्ड), 6 जून 2016- यूनियन मान्यता हासिल करने तथा प्रबंधन द्वारा यूनियन खत्म करने के कुचक्रों व बदले की भावना से उत्पीड़न के खिलाफ रिचा के मजदूरों का संघर्ष जारी है।
दिनांक 6 जून को हड़ताल से बैठे रिचा के मजदूरों ने काशीपुर शहर में प्रदर्शन किया व शहर में जुलूस निकाला । प्रदर्शन के बाद एक सभा पंत पार्क में की गयी।

जुलूस पंत पार्क से निकलते हुए शहर के मुख्य बाजार से होता हुआ वापस पंत पार्क पहुंचा। जुलूस में मजदूरों के अलावा उनके घरों की महिलायें व बच्चे भी शामिल थे। लाल झंडे व बैनरों के साथ जोशो खरोश से नारे लगाते हुए आंदोलनकारी सड़क पर मार्च कर रहे थे। बारिश होने के बावजूद उनके हौंसले बुलंद थे। शासन-प्रशासन व प्रबंधक/मालिक के गठजोड़ की पोल खोलते हुए उन्होंने केन्द्र की मोदी सरकार व उत्तराखण्ड सरकार के खिलाफ नारे लगाये। पंत पार्क में हुई सभा में इमके, प्रमएके के कार्यकर्ताओं ने बात रखी तथा मजदूरों की लड़ाई का एक मोर्चा सरकार के खिलाफ भी खोलने को कहा। सफाई कर्मचारी संगठन व एचएमएस के नेताओं ने भी मजदूरों के संघर्षों को समर्थन दिया। मजदूरों ने एलान किया कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गयीं तो वे उग्र होकर प्रदर्शन करेंगे।

प्रदर्शन की पूर्व संध्या पर स्थानीय एस.डी.एम. ने मजदूरों को धमकाने का काम किया। यही एसडीएम साहब दो दिन पहले तक मजदूरों का साथ देने की बात कह रहे थे। लेकिन दो दिनों के अंदर ही उनका रुख बदल गया तथा वे मजदूरों से अपने 6 साथियों केा छोड़कर अंदर काम पर वापस जाने की बात कहने लगे। लेकिन मजदूरों ने उनकी धमकी में आने के बजाय साफ शब्दों में कह दिया कि वे तब तक अपनी हड़ताल नहीं तोडेंगे जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तथा निकाले गये मजदूरों को वापस नहीं ले लिया जाता।

प्रदर्शन के बाद शाम को महिलाओं ने फैक्टरी गेट पर जाकर प्रबंधक को चेतावनी दी कि अगर वह हड़ताल के दौरान नई भर्ती कर काम करवाता है तो वे सभी फैक्टरी से मजदूरों को बाहर निकालेगीं। हड़ताल के दौरान नई भर्ती कर मजदूरों से काम करवाना गैरकानूनी है। लेकिन पुलिस प्रशासन मालिक को नहीं रोक रहा है। लेकिन जैसे ही महिलायें फैक्टरी में गयीं वैसे ही तुरंत पुलिस की दो गाडियां आ गयीं तथा पुलिस महिलाओं को गिरफ्तार करने की बात कहने लगी। महिलाओं ने बिना डरे हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाये। और फैक्टरी में गैरकानूनी तरीके से काम कराने के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। मजदूर अपने बुलंद हौंसलों के साथ अभी भी हड़ताल पर हैं।
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