छत्तीसगढ़ : दैनिक भास्कर के लिए लाठ्ठी एवं बंदूक के साये में जनसुनवाई की नौटंकी


दैनिक भास्कर समूह के डीबी पावर के रेल लाइन  पर 29 जून को  2016 को कुनकुनी, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में बंदूक के साये में जनसुनवाई की नौटंकी लिखी जा रही है. प्रशासन इस जनसुनवाई को किसी भी हल में फेल नहीं होने देना चाहता है  इसलिए सुरक्षा और नाकेबंदी ऐसी कि कुनकुनी जाने वाले हर रस्ते पर सन्नाटा. स्पेशल फ़ोर्स के फ्लैगमार्च के कारण गावों में कर्फ्यू जैसे हालात. हाईस्कूल में आयोजित जनसुनवाई में प्रशासन ने अपने समर्थकों को पहले से ही लाकर बिठा दिया है. जनसुनवाई स्थल से  500 मीटर दूर परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासियों को रोक रखा है;

रायगढ़. डीबी पावर के रेल लाइन के लिए आयोजित होने वाली जनसुनवाई में ग्रामीणों की ओर से जमकर विरोध की तैयारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई आयोजित करने के लिए जो भी आवश्यक नियम होते हैं उसका सही तरीके से पालन नहीं किया गया है। यह जनसुनवाई 29 जून को खरसिया ब्लाक के कुनकुनी ग्राम में आयोजित की जानी है। इसके तहत 68 किसानों से कुल 45.87 एकड़ भूमि का अर्जन किया जाना है।

इस भू-अर्जन की प्रक्रिया में 546 पेड़ों की बली दी जाएगी। 29 जून को होने वाले जनसुनवाई के संबंध में प्रभावित किसानो तथा ग्रामवासियों से चर्चा करने पर उनके द्वारा बताया गया कि जनसुनवाई के पोस्टर लगाकर उन पोस्टरों के फोटो लेकर उन्हे वापस निकाल दिया जा रहा है। गांव में अभी तक कोई मुनादी नही कराई गई है जिससे ग्रामवासियो ंमें इस प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर अनेक भ्रांतियां है। कुनकुनी के एक ग्रामीण ने बताया कि तहसील कार्यालय की नोटिस गांव में चस्पा किये जाने की जानकारी ग्राम चौकीदार के माध्यम से मिली है, ग्राम वासियों के द्वारा जनसुनवाई में अपना विरोध दर्ज कराया जायेगा।
किसको मिलेगा मुआवजा

विदित हो कुनकुनी में रेल लाइन के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन का मुआवजा किसे मिलेगा यह सबसे बड़ा प्रश्न है। क्योंकि कुनकुनी जमीन घोटाले में यह बात सामने आ चुकी है कि आदिवासियों की जमीन को रसूखदारों ने औने-पौने दाम में हड़प लिया ह। इस मामले की जांच हुई है, कार्रवाई भी हुई है पर अभी भी बड़े अधिकारी और खरीददार अपने रसूख के कारण कार्रवाई की जद से बाहर हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा उसका मुआवजा किसे मिलेगा, जो आदिवासी उस जमीन का मालिक है जिसके हाथों से छल करके जमीन लूट ली गई है या फिर उन्हें मिलेगा जो इसके वर्तमान मालिक हैंं।

हुई है बेनामी खरीदी

सूत्रों से यह जानकारी भी मिली है कि आदिवासियों की कई एकड़ जमीन बेनामी खरीदी की गई है। जिसका लाभ किसानों को नही मिलेगा। टुण्ड्री और बाड़ादरहा क्षेत्र में भी बेनामी जमीन की खरीदी की गई है। जिसमें एक आदिवासी के नाम पर दूसरे आदिवासी की जमीन खरीदी की गई है। ऐसे में कंपनी की यह जनसुनवाई आसान नहीं होगी।
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