अरूणाचल प्रदेश में हाइड्रो पावर परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर बर्बर पुलिसिया दमन : 2 मृत, 19 बुरी तरह से घायल और अनेकों पर हमला


अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में राष्ट्रीय हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन(एनएचपीसी) और भीलवाड़ा के द्वारा 1400 मेगा वॉट और 800 मेगा वॉट के दो हाइड्रो पावर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इस ऊर्जा परियोजना को मिले अवैध मंजूरी के खिलाफ स्थानीय बौद्ध लामा लॉप्सॉन्ग ग्यातसो एक अभियान चला रहे हैं। उन्हें इसे राष्ट्रीय हरित ट्रिब्युनल (एनजीटी ) में भी चुनौती दी है। एनजीटी ने परियोजना के केस को निलंबित कर दिया तथा भीलवाड़ा प्रोजेक्ट को मिली पर्यवारण मंजूरी को भी खारिज कर दिया।

सरकारी अफसरों ने इसका बदला लिया। 28 अप्रैल 2016 को जिला परिषद अध्यक्ष ने तवांग क्षेत्र के विकास के संबंध में चर्चा के लिए एक सार्वजनिक बैठक बुलाई गई। लेकिन यह बैठक एक पूर्व नियोजित साजिश थी जिसका उद्देश्य लामा लॉप्सॉन्ग ग्यातसो को अकेला कर उनपर हमला करना था। आयोजकों द्वारा लामा का एक व्हॉट्स ऐप साउंड क्लिप, जिसमें वह तवांग मॉन्सट्री के अबॉट, तुल्कु रिन्पोचे, को धार्मिक मसलों तक सीमित रहने तथा ऐसी परियोजनाओं को सहयोग न देने की बात कही थी, का इस्तेमाल कर लामा लॉबसॉन्ग पर स्थानीय जनता की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का झूठा आरोप लगाया। लामा लॉप्सॉन्ग ग्यातसो के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उस दिन की बैठक में भाग लेने वाले तीन सौ लोगों के दस्तखत शामिल हैं।


लामा लॉबसॉन्ग के समर्थकों ने जमानत के लिए आवेदन भरा किंतु उसे किसी न किसी बहाने से लगातार टाला गया जबकि दूसरी तरफ जिला परिषद अध्यक्ष को 28 अप्रैल को ही कुछ घंटों में छोड़ दिया गया। 2 मई को 2000 लोगों ने एकत्रित होकर प्रसाशिक तथा न्यायिक कार्यवाहियों को देखते हुए लामा लॉप्सॉन्ग पर जानलेवा हमला होने की शंका जताई। जिसकी वजह से लोगों ने लामा लॉप्सांग की तत्काल रिहाई की मांग उठानी शुरु कर दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज तथा गोलीबारी की। जिसमें दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि 19 बुरी तरह से घायल और बहुत से लोग जख्मी हुए हैं। लामा लॉप्सॉन्ग को रिहा कर दिया गया है किंतु क्षेत्र में द्वारा 144 लागू है। 
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