सामाजिक न्याय के लिए आवासीय भूमिहीनों को भूमि आबंटित करे सरकार


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चार करोड़ आवासीय भूमिहीन परिवार भूमिहीनता और आवासहीनता के कारण खराब जिंदगी जीने के लिए विवश है, उनको सामाजिक न्याय देने के लिए सरकार प्रदेष के आवासीय भूमिहीन परिवारों को 10 डिसिमल भूमि आबंटित करे। एकता परिषद जनसंगठन के द्वारा राज्य की राजधानी लखनऊ के गांधी भवन में 31 मार्च 2016 को आयोजित आवासीय भूमिहीन सम्मेलन के दौरान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रनसिंह परमार ने उक्त मांग सम्मेलन के माध्यम से सरकार के सामने रखा।

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के कांग्रेस विधानमंडल दल के उप मुख्य सचेतक अजय कुमार लल्लू ने सरकार को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि पूर्व में अनुसूचित जाति व जनजातियों के भूमि अधिकार की सुरक्षा को वर्तमान सरकार ने कमजोर किया है। भूमि गरीबों के आजीविका और स्वाभिमानपूर्वक जीवन जीने के लिए बहुत ही जरूरी है और सरकार प्राथमिकता के क्रम में दलित और आदिवासियों को भूमि का आबंटित करे। दलित भूमि अधिकार आंदोलन के रामकुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में दलितो के पास भूमि न होने के कारण उनको तमाम तरह की हिंसा का षिकार बनाया जाता है। झांसी के सहरिया आंदोलन से जुड़ी केसर बाई ने कहा कि विगत दो दषक से सरकारी जमीन पर कब्जा है किंतु उसका पट्टा अभी तक नहीं दिया गया। जौनपुर के छोटेलाल मांझी ने कहा कि सामाजिक विषमता को समाप्त करने के लिए भूमिहीनों को भूमि का बंटन होना ही चाहिए।

जनपैरवी मंच के अजय शर्मा ने महिलाओं भूमि अधिकार के लिए सरकार के पहल को सकारात्मक कदम बताया। एक्षन एड के अरविंद सिंह ने कमजोर वर्ग और दलितों के हित के लिए सभी भूमिहीन परिवारों को 5 एकड़ भूमि कृषि और आजीविका की सुरक्षा के लिए प्रदान करे। एम्स संस्था लखनऊ तथा अंतराष्ट्रीय संगठन फियान, भारत के सचिव संजय राय ने कहा कि प्रदेष में लेखपाल राज चल रहा है, वर्षो पूर्व जिन दलित और गरीबों को भूमि आबंटित की गयी थी उनको जमीन का कब्जा नहीं मिल सका है। सहरिया आंदोलन के रामगोपाल सहरिया ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर निषाना करते हुए कहा कि ऐसे लोग जो गरीबों की सेवा का शपथ लेकर सरकारी सुविधाओं का भोग कर रहे हैं, वे गरीबों के हित में काम करना शुरू करें।

सम्मेलन में हुई परिचर्चा में मुख्य रूप से सरकार से प्रदेश में आवासीय भूमिअधिकार कानून लाने, आवासहीन भूमिहीन दलित व आदिवासियों को 10 डिसिमिल भूमि देने, बुंदेलखण्ड क्षेत्र में निवास कर रहे सहरिया, कोल, किरार मुसहर आदि समुदाय को अनुसूचित जनजाति में श्रेणी में करने और वन मान्यता अधिनियम का लाभ दिलाने, बुंदेलखंड में भीषण सूखे की स्थिति से निबटने के लिए तत्काल रहत कार्य शुरू करने, सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में सभी परिवारों को सामान एवं नियमित रूप से राशन उपलब्ध कराने और अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के वर्गीकरण के विभेद को समाप्त कर प्रदेष के अति वंचित जातियों को जनजाति की श्रेणी में रखकर वनअधिकार कानून का लाभ दिलाने की मांग उठी।

आवासीय भूमिहीन सम्मेलन में प्रदेश भर के जनसंगठनों, संस्थाओं, दलित और आदिवासी अधिकार आंदोलन से जुड़े लगभग पांच सैकड़ा लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन का संचालन एकता परिषद के प्रांतीय संयोजक राकेष दीक्षित ने किया। सम्मेलन में उठे विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन पत्र भेजकर आगामी आंदोलन के बारे में चेताया जायेगा।




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