भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ 2069 दिनों से किसानों का प्रतिरोध जारी


राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित तीन सीमेंट प्लांटों के विरोध में पिछले 2069  दिनों से  किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है. सरकार की और 26 अप्रेल  को अल्ट्राटेक सीमेंट कम्पनी को एक और फैक्ट्री लगाने की अनुमति दी है जबकि भूमि कब्ज़ा करने की कार्रवाई ग्रामीणों के विरोध कारण शुरू नहीं हों पाई। ज्ञात हो कि झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ और सीकर जिले के बेरी क्षेत्र में सीमेंट कंपनियों के लिए 18 गांवों में बसी करीब 50 हजार लोगों की आबादी को उजाड़ने की तैयारी चल रही है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड अल्ट्राटेक लिमिटेड व आईसीएल सीमेंट लिमिटेड, बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट लिमिटेड जैसी नामी कंपनियों को सरकार ने 72 हजार बीघा बेशकीमती जमीन हड़पने की हरी झंडी दे दी है। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान पिछले सात सालों से संघर्षरत है. दीपसिंह शेखावत की टिप्पणी;

किस तरह से मिडिया व सरकार में बैठे लोग किसानों में भय व भ्रम  पैदा कर रहे हैं इसका नमूना आपको 26 अप्रेल के अखबार में छपी खबर से पता चल जाएगा। क्योंकि खबर ये आई है कि राज्य सरकार की केबिनेट ने अल्ट्राटेक सीमेंट कम्पनी को फैक्ट्री लगाने की अनुमति देदी है। तो मैं यह पूछना चाहता हूं कि जो अबतक कार्रवाई चल रही थी वो बिना सरकारी अनुमति के ही चल रही थी?

इस कम्पनी को राज्य सरकार द्वारा 2008में मंजूरी मिल चुकी है तथा 2011 में रीको के साथ एम ओ यू हो चुका है तथा 2013 में अवार्ड पारित किया जा चुका है तो अब कोनसी मंजूरी की बात कर रहे हैं। दूसरा सवाल ये भी है कि अगर अभी नये सिरे से मंजूरी दी है तो क्या पहले की गई सभी कार्रवाईयों को निरस्त माना जाये?

क्योंकि मंजूरी अगर अब दे रहे हैं तो क्या पहले जितनी भी कार्यवाही हुई है वो बीना केबिनेट की मजूंरी के हुई है?इस लिए हमें ये समझने की जरूरत है कि ये लोग इस तरह की खबरें फैलाकर लोगों में भय व भ्रम फैला रहे हैं। ये आपने देख ही लिया हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की?

दूसरा ये समाचार भी छपा है कि पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मैं पूछना चाहता हूं कि जिन लोगों की जमीन ली है उन्हें कोई नोकरी का भरोसा दिया है?

नोकरी अगर कुछ को दे भी दी तो पता है खेती के बिना कितने लोग बेरोजगार होंगे। भाईयों मुझे तो भरोसा हो गया है अगर इन पूंजीपतियों से व भ्रष्ट व बिके हुऐ लोगों से बचना है तो हम सब को इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। ओर अगर अपने चुने हुए जन प्रतिनिधियों से आस लगाये बैठे रहोगे कि ये किसानों व मजदूरों के लिए लडेंगे तो ये हमारा भर्म है। 
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