भूमि लूट के खिलाफ : किसान-मजदूर, आदिवासियों की महारैली


जमीन हमारे आपकी, नहीं किसी के बाप की....इस गर्जना के साथ 24 फरवरी 2016 को राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर हजारों की तादाद में किसानों ने इक्ट्ठा होकर सरकार को यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि वह किसी भी हालत में अपनी जमीन कॉर्पोरेट ताकतों को नहीं कब्जाने देंगे। जल-जंगल-जमीन और श्रम की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ भूमि अधिकार आंदोलन के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों किसानों, मजदूरों, मछुवारों, वनाश्रितों और दलितों ने हिस्सा लिया।

विभिन्न राज्यों में अपनी भू-अधिकार को लेकर लड़ रहे इन समुदायों के प्रतिनिधियों ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा सरकार जिस तरह से देश के प्राकृतिक संसाधनों को निजी ताकतों के हाथ सौंप रही है, वह उसे हर्गिज बर्दाश्त नहीं करेंगे। रैली में मौजूदा समय में देश में चल रहे असहिष्णुता के माहौल की आलोचना करते हुए अभिव्यक्ति तथा विरोध के अधिकार के हनन के खिलाफ संघर्ष की भी बात की गई। इस रैली को मेधा पाटकर, डॉ. सुनीलम, अशोक चौधरी, रोमा मलिक, हनन मुल्ला, सुमीत चक्रवर्ती, दीप सिंह शेखावत, ऋचा सिंह समेत अनेक जनांदोलनों के नेतृत्वकारी साथियों ने संबोधित किया। रैली में सरकार के समक्ष निम्न मांगें रखी गईँ ।

हमारी मुख्य माँगे:

  • भूमि अधिग्रहण (संशोधन) बिल 2015 वापस लो। भूमि अधिग्रहण नहीं भू अधिकार चाहिए। भूमि अधिग्रहण 2013 कानून की अवहेलना बंद करो और राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे छेड़छाड़ एवं बनाये कानूनों की मंजूरी रोको। 
  • राज्य सरकारों द्वारा गैर कानूनी ढंग से किये जा रहे भूमि अधिग्रहण पर लगाम लगाओ। वनाधिकार कानून 2006 से छेड़छाड़ बंद करो और प्रभावी तरीके से लागू करो। 
  • कृषि संकट से निपटने के लिए तात्कालिक उपाय करो, फसल का उचित दाम और क्षति फसल के बदले उचित मुआवजा दो। बुनियादी भूमि सुधार एवं भू हदबंदी लागू करो या अतरिक्त जमीन का बंटवारा करो, गरीबों के लिए आवास मुहैया कराओ और जबरन विस्थापन बंद करो। 
  • मनरेगा कानून में बदलाव बंद करो, आवंटन बढ़ाओ और 300 दिन और 300 रूपये रोज का काम सुनिश्चित करो। 
  • टी एस सुब्रमनियन समिति द्वारा प्रस्तावित पर्यावरणीय कानूनों को खारिज करो। 
  • श्रम कानूनों में फेरबदल खत्म करो, मजदूरों का अधिकार बहाल हो। 
  • महिलाओं पर बढ़ते हिंसा और अत्याचार रोकने के लिए उचित कार्यवाही हो। झूठे राष्ट्रवाद के नाम पर जनतांत्रिक अधिकारों का हनन बंद करो और बढ़ते फासीवादी ताकतों पर लगाम लगाओ।


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