उत्तराखण्ड जन आंदोलनों की धरती है और इस परंपरा का निर्वाह निरंतर जारी है

उत्तराखण्ड बनने के साथ ही जल-जंगल-जमीन की लूट का खेल भी प्रदेश में शुरू हो गया था. राज्य की प्रगतिशील, संघर्षशील, आंदोलनकारी शक्तियां इस लूट के विरोध में सघर्षरत रही है चाहे वह वीरपुर-लच्छी में अवैध स्टोन-क्रशर का आंदोलन हो या हाल ही में शुरू हुआ अल्मोड़ा जिले के नैनीसार (द्वारसो) में  जिंदल  को  जमीन दिए जाने का; पूरे राज्य में जमीन की लूट का विरोध किया जा रहा है, ग्रामीणों द्वारा बनाई गई ‘नैनीसार बचाओ संघर्ष समिति’ ने संघर्ष शुरू कर दिया है. उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के पी.सी.तिवाड़ी और 15 ग्रामीण अभी जेल में है. पेश है उत्तराखण्ड के जमीनी संघर्षों पर सुरेश नौटियाल, केंद्रीय उपाध्यक्ष उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की टिप्पणी;  


मित्रो!

पहले वीरपुर-लच्छी में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी और नागरिक समाचारपत्र के संपादक मुनीष कुमार अग्रवाल ने वीरपुर-लच्छी ग्राम की जनता की सहायता से वहां स्टोन-क्रशर बंद करवाए.

फिर, हिमालय बचाओ आन्दोलन के समीर रतूड़ी ने मलेथा ग्राम की जनता के सहयोग से स्टोन-क्रशर बंद करवाए.

और अब उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी के नेतृत्व में नानीसार आन्दोलन चल रहा है, जिसमें गांव की जनता और विभिन्न संगठनों का साथ है. ज्ञातव्य है कि वहां गैर-कानूनी ढंग से जिंदल कंपनी को अंतर्राष्ट्रीय स्कूल खोलने के लिए राज्य सरकार ने जमीन दी है.

इस मामले में पीसी तिवारी और परिवर्तन पार्टी के महिला संगठन की केंद्रीय सह-संयोजिका रेखा धस्माना और डीडा-द्वारसौं गाँव के १२ लोग जिंदल और हरीश रावत के कहने पर गिरफ्तार किये गए थे.

दस ग्रामीण तो छोड़ दिए गए लेकिन उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के इन दोनों नेताओं पर एससी/एसटी एक्ट में झूठा और फर्जी मुकदमा लगा दिया गया यह जाने बिना कि परिवर्तन पार्टी तमाम वंचित समाजों की पार्टी है इसके नेता इन वर्गों के सदैव लड़ाई लड़ते रहे हैं. खैर, यह तो बस हमारे नेताओं को परेशान करने की कवायद भर है.

हमारे नेता हार मानने वाले नहीं हैं. आन्दोलन चलता रहेगा. नानीसार आन्दोलन पूरे राज्य के जल-जंगल-जमीन और जन को बचाने की लड़ाई है. अब यह देहरादून के चाय बागानों से लेकर पौड़ी जनपद के पोखड़ा और बागेश्वर जनपद तक पहुंचेगी जहां खड़िया खनन माफिया की खिलाफ आन्दोलन चल रहा है. पोखड़ा में भी नानीसार की तरह पूंजीपति को विश्वविद्यालय बनाने के लिए हरीश रावत सरकार द्वारा जमीन दी गयी है.

बहुत अच्छे हरीश! सरकारी स्कूलों को बंद करो और पूंजीपतियों के स्कूल खोलो!

वाह रे धरती पुत्र, तू तो उत्तराखंड की धरती का सौदागर निकला!

बड़ा आया यह कहने वाला कि खाता न बही, जो हरीश कहे वही सही! अरे! यह बात तो सीताराम केसरी के लिए कही जाती थी.

पर सुन लो मुख्यमंत्री, तुम हमेश इस पद पर नहीं रहोगे! जनता का राज आयेगा और तब तुम्हारा क्या होगा?

और हाँ, अब तो उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और नानीसार बचाओ संघर्ष समिति ने उक्रांद, आम आदमी पार्टी, स्वराज अभियान, उत्तराखंड महिला मंच और विभिन्न जनसंगठनों को मिलाकर संयुक्त संघर्ष समिति बना ली है!

देखते हैं कितना जोर है जुल्म में तेरे!

(सुरेश नौटियाल, केंद्रीय उपाध्यक्ष उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी )
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