नई फसल बीमा योजना किसानों के साथ छलावा है : डॉ सुनीलम

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 16 फ़रवरी को  जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय एवं समाजवादी समागम के राष्ट्रीय संयोजक तथा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉं. सुनीलम् ने आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा नई फसल बीमा योजना की घोषणा की गई है जो किसानों के साथ महज छलावा है। आजादी के बाद से अब तक लागू की गई फसल बीमा योजना की कमियों को इस नई फसल बीमा योजना में दूर नहीं किया गया है। 

डॉं.सुनीलम् ने कहा कि अभी तक की फसल बीमा योजनाओं की सबसे बडी कमी यह थी की अनावारी का आंकलन पटवारी हल्के के आधार पर किया जाता था तथा पटवारी ही वुवाई का रकबा दर्ज करता था। अनावारी और वुवाई का रकबा दर्ज करनें का कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं था। पटवारी के नजारिया सर्वे, क्रॉप कंटिग सर्वे तथा मौसम के आधार पर नुकसानी का आंकलन कर दिया जाता था। जमीनी अनुभव यह बतलाता है कि सरकारें संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर टेबिल पर बैठ कर मुआवजा राशि का वितरण कर लेती थी। नयी योजना नें इन सभी समस्यों को दूर नहीं किया है। सरकारी अमलो की भूमिका ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। डॉं सुनीलम् ने कहा कि नयी योजना यह गांरटी नहीं देती है कि नुकसान होने पर किसी किसान का नाम फसल बीमा मुआवजा राशि वितरण से नहीं छूटेगा और न ही इस योजना के लागू हो जानें से पटवारी सही नजरिया सर्वे, क्रॉप कंटिग सर्वे तथा वुवाई का रकबा दर्ज करने लगेगें तथा भ्रष्ट पटवारी व्यवस्था योजना लागू होने से स्वतः समाप्त हो जायेगी।

डॉं.सुनीलम् ने कहा कि नई फसल बीमा योजना की प्रतियॉ अभी तक ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत जिला पंचायत अध्यक्षों, विधायक और सांसदों के पास तक नहीं पहॅुचाई गई हैं। इससे स्पष्ट है कि नई फसली बीमा योजना किसानों और जनप्रतिनिधियों को अंधेरे में रख कर लागू की जा रही है। मीडिया को सर्वे की सलाह दी कि मोदी की रैली के दौरान आने वाले किसानों और जनप्रतिनिधियों से पूछा जाना चाहिये कि क्या उन्हौंने योजना देखी है।

डॉं.सुनीलम् ने कहा कि म.प्र.सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम पर हजार करोड रूपये खर्च कर रही है। जवकि प्रदेष के किसानों की वर्तमान फसल सूखे के चलते खराब है इस राषि का उपयोग किसानों की मदद के लिये किया जाना चाहिये। प्रदेष के 50 प्रतिषत किसानों को अभी भी सूखा राहत राषि नहीं मिली है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिये सरकारी मषीनरी का दुरूपयोग (भोपाल में आरटीओ द्वारा 250 स्कूली बसों का अधिग्रहण) किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर किसानों की खडी फसल काटने के लिये बाध्य करना उनके साथ ज्यादती है। डॉं.सुनीलम् ने मॉंग की है कि म.प्र. को आत्महत्या मुक्त प्रदेष बनाने हेतु म.प्र. सरकार को ठोस कार्यनीति की घोषणा करनी चाहिये।

डॉं.सुनीलम् ने कहा कि प्रेसवार्ता के माध्यम से इस नयी योजना के सम्बन्ध में हम राज्य सरकारों का ध्यान निम्न मुद्दो की ओर दिलाना चाहते हैं-

  1. नयी योजना के तहत फसल बीमा सभी के.सी.सी.कार्डधारी किसानों तथा कोऑपरेटिव सोसायटी से खाद बीज देने वालो का पहले की तरह स्वतः किया जा रहा है, जबकि इसे स्वेच्छिक होना चाहिए तथा किसानों की जितनी प्रीमियम राशि काटी जाती है, उसकी रशीद तथा फसल बीमा करनें वाली कंपनी का किसान के साथ अनुंबध पत्र की प्रति दी जानी चाहिए। ताकि जरूरत पडने पर किसान बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम मे कानूनी कार्यवाही कर सके।
  2. बीज ,खाद्, कीटनाशक, सिंचाई के कारण फसल उत्पादन में होने वाली कमी को भी फसल बीमा के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि अमानक बीजो, खाद् और कीटनाशक के चलते किसानों की फसले लगातार प्रभावित होती हैं इसी तरह बिजली पानी(सिंचाई) के अभाव में लगातार उत्पादन प्रभावित होता है जिसे फसल बीमा की परिधी में लिया जाना आवष्यक है। इसी तरह फसल की चोरी, जंगली जानवरों द्वारा नुकसान किये जाने  तथा खलिहान में आग लगनें को भी फसल बीमा की परिधि में लाया जाना चाहिए।
  3. फसल बीमा प्रति एकड औसत उत्पादन की समर्थन मूल्य की कीमत के साथ-साथ किसान की जमीन के मूल्य को भी कुल बीमित राशि में जोडी जानी चाहिए।
  4. फसल बीमा की ईकाई किसान का खेत होना चाहिए।
  5. जिस तरह आयकर दाता को आत्म मूल्यांकन का अधिकार दिया गया है वही अधिकार किसानों को भी दिया जाना चाहिए। अर्थात किसान को अपनी नुकसानी का पंचनामा बनाने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
  6. जिस तरह क्रॉप कंटिग सर्वे में कुछ खातो के नमूने लिये जाते है उसी तरह कृषि विभाग द्वारा एवं राजस्व विभाग द्वारा कुछ किसानों के दावो जांच कर ग्राम सभा के समक्ष राजस्व विभाग तथा कृषि विभाग के सर्वे को रखे जानें के बाद ग्राम सभा की अनुसंशा एवं पुष्टि के आधार पर ही फसल बीमा के मुआवजे की राशि तय की जानी चाहिए। यही एकमात्र तरीका है जिससे भ्रष्ट पटवारी व्यवस्था पर अंकुश लगाया जा सकता हैं।
  7. फसल बीमा का भुगतान औसत उत्पादन में आई कमी यानी जितना कम उत्पादन हुआ हो उसके समर्थन मूल्य के बराबर मुआवजा राशि प्रदान की जानी चाहिए अर्थात गेंहू के प्रति एकड दस बोरे उत्पादन की जगह यादि पांच बोरा उत्पादन होता है तो किसान को प्रति एकड समर्थन मूल्य के आधार पर पांच बोरे की मुआवजा राशि दी जानी चाहिए।
  8. समर्थन मूल्य भाजपा के घोषणा पत्र तथा स्वामीनाथन कमेटी की अनुशसा के आधार पर लागत से ढेड गुना किया जानें का प्रस्ताव हैं किसस लागत से दुगना दाम और मुआवजे की मांग करती हैं।
  9. फसल बीमा का भुगतान किसान के निजी खाते में किया जाना चाहिए। ऋण देने वाले बैंक को नहीं क्योकि अब तक का किसानों का अनुभव बताता है कि किसानों की फसल बीमा की मुआवजा राशि बैंक में भेज दी जाती हैं। तथा बैंक उस राशि का समायोजन कर लेता है। जिसके परिणाम स्वरूप मुआवजा राशि का इस्तेमाल किसान नहीं कर पाता अर्थात योजना का नाम किसानों के लिये प्रधानमंत्री फसल बीमा है लेकिन वास्तव में यह बैक के लिये चलायी जा रही बीमा योजना बनकर रह गई हैं।
  10. फसल बीमा सभी कृषि उत्पादो पर लागू होना चाहिए।
  11. फसल बीमा की प्रीमियम राशि सरकार द्वारा भरी जानी चाहिए, ताकि किसानों को वर्तमान कृषि  संकट से उबारा जा सके।
  12. फसल बीमा योजना का लाभ वास्तव मे किसानों को तब मिलना शुरू होगा जब वर्तमान सूखे की स्थिति से कर्ज से उबारनें के लिये सभी किसानों की कर्जा माफी तथा बिजली बिल माफी की जावे।
  13. सरकार ने कम्पनियों को नौ लाख करोड की छूट दी हैं तथा कर्मचारियों को सातवे वेतन समझौते की अनुषंसाओं को लागू कर एक लाख करोड़ रूपया का अतिरिक्त आर्थिक बोझ वहन करने का फैसला किया गया है जिससे केवल एक करोड केन्द्र सरकार के कर्मचारी लाभाबिन्त हो रहे है। सरकार को अस्सी करोड किसानों के लिये कम्पनियों को दी गई छूट के बराबर राषि कर्जा माफी बिजली बिल माफी तथा किसानों का प्रीमियम किसान की ओर से भरने पर खर्च करना चाहिए। 
डॉं. सुनीलम् ने रीवा में भाजपा के पूर्व पार्षद अतीक अहमद की पुलिस पिटाई में मौत को लेकर 6 पुलिस कर्मिर्यो के निलंबन की कार्यवाही को नाकाफी बताते हुए सभी पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफतार कर जेल भेजने की कार्यवाही की मॉंग की है। जेेएनयू को आतंकवादियों, देषद्रोहियों का अड्डा बताये जाने डॉं.सुनीलम् ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनारस हिन्दू वि.वि. के साथ अंग्रेजों ने भी कभी इस तरह का वर्ताव नहीं किया था। जैसा केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार कर रही है। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया की राष्ट्र द्रोह के मामले में गिरफतारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ.सुनीलम् ने कहा कि पंजाब और कष्मीर में आतंकवादियों ने सबसे ज्यादा निषाना कम्यूनिष्टों को ही बनाया था। उनकी राष्ट्रभक्ति पर प्रष्नचिहन लगाना सर्वथा अनुचित है।
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