अदालत में संघी हिंसा, न्याय हुआ शर्मसार


संजीव चंदन 

आज लगभग 2 बजे मैं लोक गायक और 'शिवाजी अंडरग्राउंड इन भीमनगर' के लेखक संभाजी भगत के साथ पटियाला कोर्ट पहुंचा. मैं जे एन यू के विद्यार्थियों पर हुए एफ आई आर की कॉपी लेने कोर्ट जा रहा था, तो महाराष्ट्र सदन से संभाजी साथ हो लिए- योजना थी कि कॉपी लेकर हम एन एस डी में नाटक देखेंगे. एक वकील को पहले ही एफ आई आर की कॉपी निकालने को कह रखा था. मैं एफ आई आर देखना चाह रहा था कि पुलिस कैसे फ्रेम कर रही है विद्यार्थियों को.

गेट पर पहुंचा ही था कि देखा कि पुलिस वालों से मीडिया के लोग लड़ रहे थे कि उन्हें कोर्ट से बाहर क्यों रोका जा रहा है, जबकि अन्दर हंगामा हो रहा है. यह महज संयोग ही था कि हम बिना ज्यादा सुरक्षा जांच के अन्दर पहुँच गये. कोर्ट परिसर में लोग इकट्ठे थे. सामने ही एन एफ आई डवल्यू की राष्ट्रीय महासचिव एनी राजा दिख गई. हम उनके पास रुक गये. वे बात करते हुए रोने लगीं . वे कह रही थीं कि ' मैं कन्हैया की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूँ. ये लोग हंगामा कर रहे हैं कोर्ट रूम में भी जाकर , उसे छोड़ेंगे नहीं' उनकी बात ख़त्म भी नहीं हुई थी कि काले कोर्ट में कुछ वकील मीडिया की एक लडकी और अन्य लोगों को धक्के देने लगे. फिर देखा कि वे ए आई एस एफ के राष्ट्रीय महासचिव विश्वजीत को गिराकर मार रहे हैं. गद्दार , भारत माता की जय , पाकिस्तानी , जैसे शब्द चीख रहे थे वे. हम एनी को लेकर अलग हटे कि एक पत्रकार का मोबाइल उन्होंने छीन लिया, कोई चीखा कि जे एन यू वाला है और वकीलों की भीड़ किसी और के साथ हाथापाई करने लगी. तभी मुझे एक सीनियर वकील ' तोमर साहब' दिखे पीछे से आते हुए . मैं सहज होने और दिखने के लिए उनकी और बढ़ा . एनी और संभा जी भी पास में ही इधर -उधर हो गये. मैंने तोमर साहब को कहा कि 'यह क्या हो रहा है कोर्ट में ?' वे खुद भी आश्चर्यचकित थे, लेकिन उन्होंने यह भी साथ में जोड़ा कि 'यह गलत है तो भारत माता के खिलाफ नारे लगाना भी गलत है' . इस बीच कुछ और सीनियर वकील हमारे पास इकट्ठे हो गये, मैंने बात करते हुए फेसबुक पर वहां के हंगामे पर पोस्ट लिखा , फोटो खीच नहीं सकता था तब, क्योंकि वे फिर मुझ पर भी हमला करते. इसी बीच किसी ने कहा कि 'अरुण जेटली भी आये हैं ', उनके सामने स्कोर बनाने के लिए ये वकील हंगामा कर रहे हैं. एनी कह रही थीं कि आर एस एस दफ्तर के सामने भी विद्यार्थियों पर हमला करने वाला आदमी भी काला कोट में इसी भीड़ में है.

जब हंगामा, नारेबाजी और मारपीट हो रही थी, तो पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी थी. मीडिया वाले बाहर खदेड़ दिये गये थे ,विश्वजीत को वे मारते हुए बाहर कर चुके थे. हमलोग- मैं और संभा जी इस हंगामे के थोड़े थमने के बाद अपने वकील के चैंबर में गये , जिन्हें एफ आई आर निकालने को कहा था . वापस लौटते वक्त बाहर सड़क पर हम थोड़ी देर रुके कि वित्त मंत्री अरुण जेटली बाहर निकलते दिखे. उन्हें देखकर मीडिया के लोगों ने और कुछ विद्यार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी. अरुण जेटली के जाते ही फिर से वकीलों ने मारना -पीटना और नारे लगना शुरू कर दिया , मीडिया के लोगों पर भी हमला किया . पगड़ी पहने एक शख्स ने अन्य लोगों के साथ किसी को मारना शुरू किया और मारते हुए उसे रोड के उसपार तक इंडिया गेट की फेंसिंग तक ले गया. किसी ने कहा कि बी जे पी का विधायक है ( ओ पी शर्मा ) साथ में मीडिया के लोग भी दौड़े. पास किसी व्यक्ति ने कहा कि वे सी पी आई के किसी कार्यकर्ता को मार रहे हैं. एक ने हंगामे का नेतृत्व कर रहे वकील का नाम चौहान बताया. बाहर खड़े कुछ वकीलों को मैंने कहा कि ' भाई इन लोगों को इतना ही जोश है तो पाकिस्तान का नाम नक़्शे से मिटा दें , लेकिन यहाँ कोर्ट में निर्दोषों को क्यों मार रहे हैं. तो उनमें से कुछ लोगों ने प्रतिवाद किया कि भारत माता के खिलाफ नारा लगाने के कारण लोगों में गुस्सा है.

पास खड़े एक व्यक्ति ने कहा कि खाते यहाँ का हैं और गाते पाकिस्तान का हैं . वह कुछ और भी बोलता रहा तो उसके किसी परिचित दोस्त ने उसका मजाक बनाते हुए कहा कि' हाँ पंडित जी आपको तो ऐसा लगेगा ही .' उसने झेंपते हुए उत्तर दिया कि इसमें मेरी जाति कहाँ से आ गई.
थोड़ा माहौल शांत हुआ तो हम एन एस डी की और पैदल बढे . हमारे आगे ही विधायक ओ पी शर्मा और दो लोग पैदल चलते हुए मंडी हाउस तक आये . हम और संभा जी उसके पीछे -पीछे बात करते आ रहे थे कि 'फासीवाद आ रहा नहीं , आ चुका है,' जबतक ब्रॉडर वाम -आम्बेडकरी एकता नहीं बनेगी , इससे नहीं लड़ा जा सकता है.

हम बातें करते हुए एन एसडी तक पहुंचे कि ' सच में कितना खतरनाक पैटर्न है कि सरकार और पुलिस सिर्फ नारा लगाने के नाम पर कुछ लोगों को देशद्रोह के तहत जेल में डाल रही है , जबकि यह भी शुरू से तय है कि नारा किसने लगाया यह स्पष्ट नहीं हुआ है . पुलिस कमिश्नर तक कह रहा है कि 'कन्हैया नारा लगते वक्त वहां पर था तो.' यानी कोई नारा उछले और इस बिना पर किसी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा . जबकि 26 जनवरी को संविधान का विरोध करने वालों को पुलिस और स्टेट संरक्षण दे रही है. भारत माता' नामक विचार और इमेज सारे विचारों और इमेज पर हावी हो गया है.' हमारे आगे विधायक और उसके साथ दो लोग ऐसे चल रहे थे , जैसे कोई मोर्चा फतह कर लिया हो उन्होंने .
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