राष्ट्रपति से मध्य प्रदेश के आदिवासियों ने की संरक्षण या मौत का रास्ता बताने की अपील

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले  के चिचोली ब्लाक के कामठा माल और बोड पंचायत के उमरडोह बसाहट को 19 दिसम्बर को वन, राजस्व और पुलिस विभाग ने पूरी तरह उजाड़कर उनकी पूरी फसल बर्बाद कर दी  | 200 लोगों की टीम ने खाकी वर्दी के गुंडे बन ऐसी कार्यवाही की, जैसे दुश्मन देश की सेना ने हमला कर दिया हो: उनकी खडी फसल पर जे सी बी चला दिया; फलदार पौधे जो लोगों ने लागए थे वो उखाड़ दिए; फसल और पानी में अत्याधिक कीटनाशक डाल बर्बाद कर दिया | उनके सारे 45 घर भी जमीनदोस्त कर दिए| 25 जनवरी को श्रमिक आदिवासी संगठन ने ब्यान जारी कर जानकारी दी है की इन आदिवासी परिवारों ने राष्ट्रपति से संरक्षण या मौत का रास्ता बताने की अपील की है, पेश है श्रमिक आदिवासी संगठन की राष्ट्रपति के नाम अपील;

श्रमिक आदिवासी संगठन, बैतूल 
पता: बोहरा मस्जिद के सामने, कोठी बाज़ार, बैतूल

प्रति,
महामहिम राष्ट्रपति,
प्रणब मुखर्जी
भारत सरकार
राष्ट्रपति भवन,
नई दिल्ली

विषय : उमरडोह , तहसील चिचोली, जिला बैतूल, म. प्र के आदिवासीयों की संरक्षण या मौत का रास्ता बताने               की अपील. 

महामहिमजी,

हम,  बोड और कामठामाल पंचायत, की आदिवासी बसाहट उमरडोह , तहसील चिचोली, जिला बैतूल, म. प्र के 45 आदिवासी परिवार की और से यह  की संरक्षण या मौत का रास्ता बताने की अपील भेजे रहे है.
उनका कहना है, जिसे उन्होंने आज अपनी बसाहट पर इस बैनर को लगाकर बताया:

महामहिम राष्ट्रपतिजी ,
जुआंर, सेवा, जिंदाबाद! जय हिन्द!
अधिकारीयों से कहिए – हमें सविंधान के हमारे अधिकार से  जीने दे  या मौत दे!  

म. प्र. सरकार के अधिकारीयों ने हमारे घर, खेत, फसल सब उजाड़ दिया | 
अब खाने के लाले है | हम एक माह से ठंठ में खुले में सो रहे है| 
  लकड़ी,  खाना,  चारा कुछ भी  नहीं बचा! 
 कैसे जिए,  समझ नहीं आ रहा! 
आप हमारे अधिकार की रक्षा करने वाले है | 
हमारी रक्षा करे  या मरने का रास्ता बता दे| 
निवेदक
हम सब आदिवासी
उमडोह बसाहट, पोस्ट कुरसना,  तहसील चिचोली, जिला बैतूल, म. प्र.

ज्ञात हो कि  19 दिसम्बर को जिले के चिचोली ब्लाक के कामठा माल और बोड पंचायत के उमरडोह बसाहट को वो पूरी तरह उजाड़कर उनकी पूरी फसल बर्बाद का चुकी है | वन, राजस्व और पुलिस विभाग की 200 लोगों की टीम ने खाकी वर्दी के गुंडे बन ऐसे कार्यवाही की,  जैसे दुश्मन देश की सेना ने हमला कर दिया हो: उनकी खडी फसल में जे सी बी चला दिया; फलदार पौधे जो लोगों ने लागए थे वो उखाड़ दिए; फसल और पानी में अत्याधिक कीटनाशक डाल बर्बाद कर दिया | उनके सारे 45 घर भी जमीनदोस्त कर दिए| अब इसमें कई आदिवासी  किसान ऐसे है जिन्होंने फसल लगाने के लिए कर्ज भी लिए था| जैसे. कलीराम, मनीराम;  अब इन लोगों के पास बंधुआ मजदूरी या आत्महत्या के सिवाय कोई उपाय नहीं बचेगा|

तब से ही यह  सारे 45 आदिवासी परिवार खुले में सो रहे है; जिससे अनेक बच्चे और बूढ़े गंभीर रूप से बिमार है | इन लोगों के पास जो जलाऊ लकड़ी आग तापने को थी, उसे भी वन विभाग के दल ने आग लगाकर नष्ट कर दिया है | उनका समान भी छुड़ा लिया है| इसलिए, इन्हें ठंड में ऐसे ही रात गुजारना होती है| इस सबके चलते सभी लोगों को ठंड देकर बुखार आना; खांसी; शरीर अत्यंत ही कमजोर हो जाने की शिकायत हो गई है| बिमार बच्चों में: रिंकी पिता शिवपाल, 7 वर्ष; सविता पिता शिवपाल, 8 वर्ष; अक्षय पिता भजन, 4 वर्ष; राजकुमार पिता भजन, 7 वर्ष; धनाराम पिता चंपा, 7 वर्ष; सकीना पिता संजू, 5 वर्ष, शामिल है| उन्हें आगे चलकर जान का खतरा भी हो सकता है|

जब्कि,  अनूसूचित  जनजाति  एवं अन्य परम्परागत वननिवासी  कानून ( वन अधिकारों की मान्यता ) कानून, 2006 (वन अधिकार कानून, 2006) के तहत जंगल पर आदिवासी एवं अन्य वनवासी समुदाय के अधिकार नए सिरे से तय होना है| धारा 3 (1) में आदिवासीयों एवं अन्य वन्वासीयों के यह सारे अधिकार वर्णित है| इस मामले में कौन से कब्जे 13/12/2005 के पहले के है और कौन से उसके बाद के; और जंगल पर आदिवासीयों के क्या अधिकार है, यह तय करने का अधिकार ना तो किसी भी अधिकारी को है और ना किसी अदालत को|  बल्कि. इस कानून की  धारा 6 के अनुसार इन सारे अधिकारों को तय करने का एक अधिकार मात्र उस गाँव की ग्राम सभा को है| और जब -तक इस कानून के तहत इन अधिकारों को तय करने की सारी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती, तब-तक इस कानून की  धारा 4 (5) के अनुसार जंगल जमीन के किसी भी कब्जेधारी को उसके कब्जे की जमीन से बेदखल करने पर रोक है|

अगर अधिकारी आदिवासीयों को इसी तरह से को उनके कब्जे की जंगल जमीन से एकतरफा कार्यवाही कर बेदखल करते रहेंगे, तो फिर  आदिवासीयों वन अधिकार कानून, 2006 की धारा 3 (1)  के तहत जो अधिकार उन्हें मिलना है उसका दावा कैसे पेश करेंगे| इसलिए वन विभाग की यह कार्यवाही, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3 (1) (V)  के तहत अपराध की श्रेणी में आता है|

सविधान में आदिवासीयों के संरक्षण की जवाबदारी आपकी है. अत: आपसे अनुरोध है कि इस मामले में अवलिम्ब हस्ताक्षेप कर आदिवासीयों को बेमौत से बचाए.

आदिवासीयों की और से

अनुराग मोदी
 sasbetul@yahoo.com

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