संघर्ष के आगे झुकी सरकार : मिल रहा जमीन का अधिकार

संघर्ष के आगे झुक रही सरकार, मिल रहा जमीन का अधिकार 

सुगट व ककराना के 8 विस्थापितों को 5-5 एकड जमीन का हक मिला। 

मध्यप्रदेश में पूर्व में  भी 31 डूब प्रभावित विस्थापितों को जमीन मिल चुकी है । 

मध्य प्रदेश के सरदार सरोवर बांध प्रभावित जो पिछले 30 सालों से अपने संघर्ष के लिए लडाई लड रहे है, अब उन्हें उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। जमीन के बदले जमीन की मांग करने वाले विस्थापितों को 20 जनवरी को धार जिले के हिम्मतगढ में जमीन दी गई। सरदार सरोवर बांध प्रभावित के डूब से प्रभावित ककराना और सुगट के इन 8 प्रभावितों को मध्यप्रदेश के धार जिले हिम्मतगढ में 40 एकड जमीन मिली है। 20 जनवरी, बुधवार को सुबह 11 से 9 बजे तक आंदोलन के कार्यकर्ता व अधिकारियों ने मौके पर रहकर किया सीमांकन, दिलाया कब्जा। प्रभावितों को मिली इस जमीन पर गेहूॅ व चने की फसल बोई हुई थी। इस फसल पर भी अब इनका ही अधिकार है। प्रभावितों को दी गई  जमीन पर कोई विवादित स्थिति निर्मित न हो उसे देखने हुए यहां एक साल तक पुलिस चौकी स्थापित करने के आदेश भी शिकायत निवारण प्राधिकरण ने दिए है।

शिकायत निवारण प्राधिकरण (जीआरए) का आदेश:- नर्मदा बचाओं आंदोलन के साथ अपने अधिकारों की लडाई लड रहे डूब प्रभावितों को जमीन के बदले जमीन देने का आदेश दिया । 20 जनवरी 2016 के रोज जमीन का सीमांकन जमीन देना व कब्जा दिलाना है। न.घा.वि.प्रा. राजस्व विभाग व पुलिसबल के साथ पहुॅचे सीमांकन के दौरान यहां थोडी देर तक विवादित स्थिति भी बनी, लेकिन बाद में मामला शांतिपूर्णढंग से निपटा।
इन्हें मिली जमीन:- 1. सरदिया पिता नानसिंग, नानसिंग पिता पातलू , भायला पिता नानसिंग निवासी ककराना, जानूबाई बेवा मकना, गणपत पिता मोती केलाबाई पिता मोती, भंगा पिता सुरला ममदिया पिता सुरला निवासी सुगट |

प्रभावितों के लंबे संघर्ष के आगे सरकार को भी झुकना पड रहा है। कानूनी लडाई लड रहे प्रभावितों को अपना अधिकार पाने के लिए कई आंदोलन, धरना प्रदर्शन और रैलियां तथा अनशन भी किये गये थे। वहीं इनके सैकडों केस सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहे है। वर्षो की इस मेहनत का ही फल है कि ये अपने अधिकारों को पाने में सफल हो पाये है। सर्वोच्च अदालत व एक्शन प्लाॅन् 1993 ट्रिब्यूनल का फैसला, 1979 के तहत पाॅच-पाॅच एकड जमीन सिंचाई की व्यवस्था करके उपलब्ध कराना है एवं 60 बटा 90 का घर-प्लाॅट व मकान का  मुआवजा भी देना पडेगा।

जमीन के सीमांकन के दौरान, न.घा.वि.प्रा. के अधिकारी पुनर्वास अधिकारी कुक्षी/अलीराजपुर श्री आर के माहेश्वरी, अंबाराम पाटीदार व तहसीलदार परमार व नायब तहसीलदार सोलंकी, मकखा पटवारी थाना प्रभारी अनिल तिवारी अन्य कर्मचारी व नर्मदा बचाओं आंदोलन के कार्यकार्ता देवराम कनेरा, कैलाश अवास्या, कमला यादव, भागीरथ कंवचे हिरदाराम तोमर, मोहन पाटीदार, राहुल यादव, कैलाश गोस्वामी इत्यादि मौजूद थे। 
Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।