छत्‍तीसगढ़ में कैद बेगुनाह पत्रकारों के समर्थन में उतरे प्रतिष्ठित लेखक, बुद्धिजीवी और संगठन

नई दिल्‍ली, 20 दिसंबर : छत्‍तीसगढ़ की जेल में फर्जी मुकदों में बंद दो पत्रकारों संतोष यदव व सोमारू नाग की तत्‍काल रिहाई समेत कई अन्‍य मांगों को उठाने के लिए कल यानी 21 दिसंबर, 2015 को जगदलपुर में होने जा रहे पत्रकार महाआंदोलन को प्रतिष्ठित लेखकों, पत्रकारों, राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है।
छत्तीसगढ़ के पत्रकार महाआंदोलन के समर्थन में बयान  

छत्तीसगढ़ के बस्तदर में इस साल जुलाई और सितंबर में जन सुरक्षा अधिनियम के तहत फर्जी मामलों में गिरफ्तार किए गए दो पत्रकारों सोमारू नाग और संतोष यादव की रिहाई व पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग को लेकर 21 दिसंबर, 2015 को जगदलपुर में होने जा रहे पत्रकार महाआंदोलन को हम बेशर्त समर्थन ज़ाहिर करते हैं। देश में पिछले कुछ समय से अभिव्यरक्ति की आज़ादी पर जिस तरह से हमले बढ़े हैं और पत्रकारों को लगातार डराया, धमकाया व मारा गया है, उसने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों की वैधता पर सवाल खड़ा कर दिया है और लोकतंत्र के बुनियादी उसूलों को ही खतरे में डाल दिया है...
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इस साल सबसे पहले साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार लौटाने वाले प्रतिष्ठित लेखक उदय प्रकाश ने भी संतोष और सोमारू की रिहाई के समर्थन में जारी बयान पर दस्‍तखत किया है। ध्‍यान रहे कि उदय प्रकाश द्वारा साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार लौटाए जाने के बाद ही देश भर में लेखकों का प्रतिवाद शुरू हुआ था और देश में बढ़ती असहिष्‍णुता के खिलाफ मुख्‍यधारा में एक बहस अब तक जारी है। प्रतिष्ठित साहित्‍यकार असद ज़ैदी, पत्रकार आनंद स्‍वरूप वर्मा, लेखक पंकज बिष्‍ट, अपूर्वानंद, दिलीप मंडल, सुभाष गाताड़े और वरिष्‍ठ पत्रकार जावेद नक़वी, भारत भूषण, सीमा मुस्‍तफा, उज्‍जवल भट्टाचार्य, राजकिशोर व प्रशांत टंडन ने भी छतीसगढ़ में पत्रकारों के दमन की निंदा की है।

बयान पर दस्‍तखत करने वाले राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में भारत का लोक जनवादी मोर्चा (पीडीएफआइ), एपवा, जामिया टीचर्स सॉलिडरिटी असोसिएशन, न्‍यू सोशलिस्‍ट इनीशिएटिव, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, ऑल इंडिया तंज़ीम-ए-इंसाफ़, युवा भारत, रिहाई मच, इंसाफ अभियान, जेयूसीएस, पीयूसीएल दिल्‍ली और जन संघर्ष समन्‍वय समिति शामिल हैं।

कई वेबसाइट, समाचार पोर्टल और ब्‍लॉगों ने भी पत्रकारों के आंदोलन का समर्थन किया है। इनमें प्रमुख रूप से भड़ास4मीडिया, हस्‍तक्षेप, प्रतिरोध, बरगद, संघर्षसंवाद, हाशिया, जनपथ इत्‍यादि अहम हैं। आग़ाज़ सांस्‍कृतिक मंच, कविता: 16 मई के बाद, जन मीडिया, जर्नलिस्‍ट सॉलिडरिटी फोरम, सन्‍हति जैसे सांस्‍कृतिक समूहों ने भी कैद पत्रकारों की रिहाई की मांग उठाई है।

देश भर के पत्रकार सोमवार 21 दिसंबर को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनवाने और संतोष व सोमारू को बेशर्त तत्‍काल रिहा करने हेतु जगदलपुर में इकट्ठा हो रहे हैं।

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