भूमि की कॉर्पोरेट लूट के विरोध में संघर्ष तेज करने का ऐलान : किसान संघर्ष समिति

खेती बचाओ- संविधान-बचाओ-यात्रा का सिंगना में भव्य स्वागत  

किसान संघर्ष समिति द्वारा 8 दिसम्बर को मुलताई से शुरू की गई खेती बचाओ संविधान बचाओ यात्रा 13 दिसम्बर 2015 को छिन्दवाड़ा जिले के गांव सिंगना पहुंची, जहां छिन्दवाड़ा के किसान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओ द्वारा यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
उपस्थित किसानो को संबोधित करते हुए डॉ.सुनीलम ने कहा कि खेती बचाओ संविधान बचाओ यात्रा निकालने का मकसद किसानो मजदूरो ग्रामीणो को यह बताना है कि गत 68 बर्षो से किसानो के साथ सरकारो द्वारा जो भेदभाव किया जा रहा हैं, वह संविधान विरोधी है, उन्होनें कहा कि 1 जनवरी 2016 से कर्मचारियों के लिए 7वां वेतन समझौता लागू हो जायेगा, जिसके बाद केन्द्र सरकार के सबसे छोटे कर्मचारी का न्यूतम वेतन 25 हजार रूपये माह हो जायेगा, तथा उच्च अधिकारियों का वेतन ढाई लाख होगा, जबकि खेतीहर मजदूरो को 150 रूपये प्रतिदिन मनरेगा के मजदूर को 169 रूपये प्रतिदिन मजदूरी का भुगतान किया जाता है। मूल्य आयोग द्वारा समर्थन मूल्य तय करते समय किसान के श्रम का मूल्य 50 रूपये प्रतिदिन लगया जाता है, जबकि वह किसी भी बडे से बडे अधिकारी से अधिक काम करता है...
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मध्य प्रदेश के छिन्द्वारा जिले के सिगना गाँव में किसान संघर्ष समिति  द्वारा 11 से 13 दिसम्बर 2015 को  पेंच व्यपर्तन परियोजना और अड़ानी पॉवर प्लांट के प्रभावित गाँवों के किसानों का तीन दिवसीय किसान शिविर का  आयोजन किया गया, जिस में इन परियोजनों से प्रभावित 20 गांवों से 130 किसानों ने भाग लिया। किसान शिविर को दिल्ली से आये जितेन्द्र चाहर, ऋचा, किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनीलम तथा उपाध्यक्ष  एडवोकेट आराधना भार्गव ने संबोधित किया।

शिविर में पेंच व्यपर्तन परियोजना और अडानी पॉवर प्लांट परियोजनाओं, देश में जारी विकास की अवधारणा और भूमि की लूट पर विस्तार से चर्चा की गई। भूमि अधिकार कानून 2013 को लागू करने कि सरकार से मांग की गई और निर्णय लिया गया कि किसान संघर्ष समिति पूरे प्रदेश में भूमि अधिकार कानून 2013 को लागू करवाने और कोर्पोरेट भूमि की लूट के विरोध में अभियान चलाएगी। प्रदेश व देश भर के सभी सामाजिक व राजनीतिक संगठनों को इस अभियान में शामिल किया जाएगा। डॉ. सुनिलम ने कहा कि किसानों की एकता पूंजीपतियों के घुटने टिका देगी, मगर किसानों में एकता होनी बहुत जरूरी है। कांग्रेस भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि किसानों में एकता नहीं होगी तो आने वाले समय में आनाज के एक-एक दाने के लिए यह देश तरसेगा।

ऋचा पाण्डेय ने किसान शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लगभग हर जिले में किसान, गरीब, आदिवासी, दलित और मजदूर आज बेदखली, विस्थापन, लोकतांत्रिक अधिकार, जीविका के साधन और अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्षरत हैं। नब्बे के दशक से भारतीय राज्यसत्ता ने बड़े उद्योगों और कार्पोरेट घरानों के लिए सुगमकर्ता की भूमिका अपना ली है और आज़ादी के बाद इस देश में नागरिकों के प्रति जो सामूहिक दायित्वबोध पैदा हुआ था, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के नाम पर उसकी पूरी तरह तिलांजली दे दी गयी है। इस तथाकथित विकास प्रक्रिया का सबसे बड़ा खामियाज़ा देश के सबसे गरीब और कमज़ोर तबके को उठाना पड़ रहा है, जिसका अस्तित्व संकट में पड़ गया है। जल-जंगल-जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट का जो सिलसिला शुरू हुआ है उसके भुक्तभोगी सबसे ज़्यादा किसान और आदिवासी बन रहे हैं क्योंकि इनका जीवन खेती, जंगल  व प्राकृतिक जीवन-चक्र से जुड़ा है। किसानों और आदिवासियों को उनके मूल जीवनक्षेत्र से उखाड़कर पराश्रित मजदूरों में तब्दील कर देने की यह प्रक्रिया बहुत ही हिंसक है जिसका हर जगह सामूहिक प्रतिरोध होता दिख रहा है।

किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एडवोकेट आराधना भार्गव ने कहा कि इस भूमि के बचने की लड़ाई में महिलाओं की भागिदारी को सुनिश्चित करना होगा क्योकि आज हम देख रहे है कि जिन आंदोलनों में महिलाओं की भागिदारी ज्यादा है, वह आंदोलन सफल हो रहे हैं।

किसान शिविर में आंदोलन के लिए सामूहिक रूप से निम्न मांगे तय की गईं-

1. भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता तथा पुनर्वास व पुनर्स्थापना कानून 2013 को मध्य प्रदेश में लागू करने के लिए सरकार लगातार अवरोध खड़े करती रही है। ऐसे में प्रभावित किसानों को निरुत्साहित किया जा रहा है। आदिवासी व अन्य परंपरागत वन निवासी किसान प्रदेश भर में आज-कल इस के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति किसान-आदिवासियों के इस आंदोलन का समर्थन करती है। किसान शिविर सरकार से मांग करता है कि किसान आदिवासियों की भूमि से बेदखली तुरंत रोकी जाए।

2. भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता तथा पुनर्वास व पुनर्स्थापना कानून 2013 में कोई भी बदलाव न किया जाए तथा सभी परियोजनाओं में इस का पालन होना चाहिए।

3. मध्य प्रदेश के छिन्द्वारड़ा में पेंच बांध और अडानी पॉवर प्लांट परियोजना में हुआ भूमि अधिग्रहण गैर कानूनी तरीके से हुआ है। किसी भी ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई न ही कोई पर्यावरणीय मंजूरी के लिए जन सुनवाई की गई। आज भी इस परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की कोई जनकारी लोगों को नहीं दी गई है। वन अधिकार कानून के तहत अधिकारों की मान्यता के प्रक्रिया नहीं की गई और न ही ग्राम सभा की मंजूरी ली गई है। ऐसे में परियोजना का कार्य गैरकानूनी तरीके से शुरू कर दिया है। निजी भूमि अधिग्रहण पर तय मुआवजे का 30 प्रतिशत  दिया जा रहा है जिस के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने नियम में संशोधन किया। भूमि की कीमत स्टेम एक्ट व एक परियोजना के लिए एक सामान मुआवजे के सिद्धांत के बजाए सरकार ने अपने आप कीमत निर्धारित करने की नीति अपनाई जिस से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। पुनर्वास व पुनर्स्थापना के प्रावधानों को लागू नहीं किया गया न ही भूमि के बदले भूमि दी जा रही है। मकान का मुआवजा भी वर्तमान नए मकान के निर्माण पर आने वाले खर्च के मुताबिक नहीं मिल रहा है और मुआवजे से जितना पुराना घर था उतना घर नहीं बन पा रहा है। इस सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी खनन हो रहा है जिस का भी विरोध हो रहा है। इस परियोजना से प्रभावित किसान बिलासपुर, मंडी, कुल्लू तथा नागवाई में आंदोलन के विरोध कर रहे हैं।

4. किसान शिविर प्रदेश में जारी भूमि की लूट का विरोध करता है। हमारी मांग है की पर्यावरणीय कानून, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 व वन अधिकार कानून 2006 का पालन किया जाए और तब तक हो रहे इस गैर कानूनी निर्माण को रोका जाए व कानूनी अवहेलना के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए। मुआवजे को चार गुना दिया जाए और प्रभावितों की सहमति से मुआवजे की राशि का निर्धाण होना चाहिए।

5.किसान शिविर में निर्णय लिया गया कि छिन्द्वाड़ा में 11 जनवरी 2016 को भूमि की लूट के विरोध में हो रहे सम्मेलन के लिए जागरूकता अभियान तेज किया जायेगा ।
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