किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करती मध्य प्रदेश सरकार की सहायता !


देश में सरकारे किसानों को सहायता के नाम पर जिस तरह से छल रही है उसका एक नमूना विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा जिसे सीएम चौहान ने गोद ले रखा है, में देखने को मिला है यहाँ पर मध्य प्रदेश सरकार ने फसल बीमा के नाम पर किसानों को 3 रुपए से लेकर 13 रुपए तक का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसे  हम भोपाल समाचार से साभार साझा कर रहे है;

भोपाल। मप्र में किसानों की दुदर्शा का कैसा मखौल उड़ाया जा रहा है, यह देख तो कोई रो पड़ेगा। दूसरे क्षेत्रों की बात तो दूर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा जिसे सीएम ने गोद ले रखा है, में फसल बीमा के नाम पर किसानों को 3 रुपए से लेकर 13 रुपए तक का मुआवजा निर्धारित किया गया है। किसानों का कहना है कि इतने पैसे में तो खाने को जहर तक नहीं आएगा।

क्या है मामला?
विदिशा जिले के देव खजूरी गांव सहकारी समिति के गांव साकलखेड़ा में फसल बीमा का पैसा बांटा जा रहा है। यहां सोयाबीन आैर उड़द की फसल खराब हो गई है। साकलखेड़ा गांव में फसल बीमा के मुआवजे के लिए महज 68 हजार रुपए की राशि मिली है। यह राशि 259 किसानों के बीच बंटेगी। औसतन 260 रुपए प्रति किसान। कई किसानों को 3 रुपए और 5 रुपए और 13 रुपए मुअावजे के रूप में दिए जा रहे हैं।

जिस खेत में सीएम ने किया दौरा, उसे भी नहीं मिला मुआवजा
कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद साकलखेड़ा गांव के जिस खेत में आकर अपने आंसू बहा कर गए थे, उसे भी फसल बीमा योजना से मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, जिले के देव खजूरी और गडला गांव के किसानों को भी मुआवजा नहीं मिला। साकलखेड़ा गांव की सहकारी समिति के अध्यक्ष सौदान सिंह ने बताया कि जिस खेत में खराब फसल देखने सीएम गए थे, उसे भी कोई मुआवजा नहीं मिला।

जहर खरीदने लायक भी नहीं मुआवजा
13 रुपए मुआवजा पाने वाले किसान जालम सिंह ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि फसल पूरी चौपट हो चुकी है। मुआवजे से आस थी, लेकिन बीमा कंपनियों ने महज 13 रुपए मुआवजा दिया है। इतने में तो जहर भी नहीं मिलेगा।
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