छत्तीसगढ़ सरकार का कारनामा : कार्पोरेटस को जनहित के नाम पर 5000 करोड़ की छूट !

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा भारतीय स्टाम्प क़ानून में संशोधन अध्यादेश लाकर प्रदेश की चार बड़ी कोयला कंपनियों-- बालको, हिंडाल्को, मोंनेट व एसीसी-- को 5000 करोड़ रुपयों की रियायत देने तथा इस पर उठे विवाद को ''महाधिवक्ता का अभिमत"' बताकर जायज ठहराने की दीदादिलेरी की तीखी निंदा करते हुए पूछा है कि कार्पोरेट घरानों को 5000 करोड़ रुपयों की छूट देकर सरकार ने किस जनहित को पूरा किया है?

आज यहांजारी एक बयान में माकपा के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार ने इन कंपनियों से अभी तक पेनाल्टी नहीं वसूला है, जबकि कोल ब्लाकों की नीलामी के 6 माह बाद भी इन कंपनियों ने स्टाम्प ड्यूटी पटाकर उत्खनन शुरू नहीं किया है. उन्होंने कहा कि इन कंपनियों पर वही कर-क़ानून लागू होने चाहिए, जो नीलामी के समय में प्रवृत्त थे. इसके बजाये उन्हें अनैतिक रूप से फायदा पहुंचाने के लिए स्टाम्प कानून में ही संशोधन कर दिया गया, जिसके कारण सरकार की मंशा पर ही गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

माकपा नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार वास्तव में कुल उत्पादित खनिज मूल्य का केवल 15% ही रायल्टी के रूप में वसूल करती है. इस संशोधन अध्यादेश के जरिये वह लगभग मुफ्त में ही बहुमूल्य कोयला संपदा को इन कार्पोरेट घरानों को सौंप रही है, क्योंकि इस अध्यादेश से एक ही झटके में बालको को 500 करोड़, मोनेट को 1300 करोड़ तथा हिंडाल्को को 2700 करोड़ रुपयों का फायदा पहुंचने जा रहा है.

पराते ने कहा कि जिस सरकार के पास मनरेगा की मजदूरी देने के लिए, किसानों का पूरा अनाज 300 रूपये बोनस सहित खरीदने के लिए पैसे न हो, जो स्थापना व्यय पर अंकुश के नाम पर खाली पड़े सरकारी पदों को भरने के लिए तैयार नहीं है, उस सरकार का कार्पोरेट घरानों को करों में छूट देना अनैतिक ही माना जायेगा. इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार प्राकृतिक संपदा की लूट में कार्पोरेट घरानों के साथ में है.

संजय पराते
राज्य सचिव, माकपा, छ.ग.

Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।