कचरी के किसानों से मिलने जा रही मेधा पाटकर गिरफ्तार


किसानों के दमन पर आमादा समाजवादी सरकार

उत्तर प्रदेश के कनहर बांध का विरोध कर रहे आदिवासियों के क्रूर दमन को अभी हम भूल नहीं पाए थे कि समाजवादी सरकार ने करछना में अपना नया कारनामा दिखा दिया। अपनी जमीन बचाने के लिए धऱने पर बैठे किसानों का क्रूरतम दमन कर सरकार ने जन हितैषी होने का मुखौटा खींच कर फेंक दिया और काॅर्पोर्ट समर्थक होने का अपना असली चरित्र उजागर कर दिया। कचरी (करछना) इलाहाबाद में बीते 9 सितम्बर 2015 की सुबह 7 बजे किसान आंदोलनकारियों पर पुलिस कहर बनकर टूट पड़ी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों की पिटाई कर गिरप्तारी के साथ ही साथ वहां लगाई गई मड़ई को भी पुलिस प्रशासन ने स्वयं आग के हवाले कर आन्दोलनकारियों पर आरोप मढ़ दिया। ज्ञात रहे कि करछना के किसान ‘किसान कल्याण संघर्ष समिति’ करछना के बैनर तले पिछले 1847 दिनों से जेपी पॉवर प्लांट के भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे थे। इस से पूर्व में भी कई बार किसानों पर बर्बर गोलीबारी, लाठी चार्ज किया जा चुका है। यहां तक की पुलिस की की गोली से एक किसान मौत भी हो चुकी है। पेश है मिर्जापुर से राजेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट;
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करछना तहसील के कचरी ग्राम जा रही नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें आधा दर्जन समर्थकों के साथ पुलिस लाइन में रखा गया है।

7 सितम्बर को कचरी ग्राम में भूमि अधिग्रहण का विरोध करने पर गिरफ्तार किये गए बच्चों और महिलाओं को रिहा करने की मांग करने वाली पाटकर किसानों से मिलने कचरी जाना चाहती थीं। रात मे ही जिलाधिकारी संजय कुमार ने उन्हें वहां जाने से मना किया था। जिलाधिकारी का कहना है कि वहां धारा 144 लगी हुई है और किसी सभा की इजाजत नहीं।

आज सुबह इलाहाबाद विवि के गेस्ट हॉउस पर ही प्रशासन ने उन्हें नज़रबंद कर दिया। इसके बाद मेधा पाटकर 100 मीटर दूर आयोजित विचार गोस्थि स्थल की तरफ जा रही थीं। वहीं पर पुलिस और प्रसाशन की टीम ने उन्हें रोक लिया। किसानो से नहीं मिलने देने का आरोप लगाते हुए पाटकर धरने पर बैठ गईं। उन्होंने कहा कि कचरी मे गिरफतार लोगो को रिहा किया जाये।

बच्चों को बिना शर्त छोड़ा जाये। अपर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक  ने पाटकर को गिरफ्तार करके पुलिस वैन में बैठा दिया। फिलहाल उन्हें पुलिस लाईन में रखा गया है।
साभार : हिन्दुस्तान


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