अपने ही नागरिको को तिल-तिल कर मरने पर मजबूर करती मजबूत सरकार

मध्य प्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्ब अभ्यारण्य के अन्तर्गत आने वाले गॉंव उमरावन ग्राम पंचायत बडौर जिला पन्ना को हटाने के लिये सरकार और प्रशासन द्वारा  पिछले तीन साल से अमानवीय तरीके आपनाये जा रहे है, गॉंव वालों के खेतों में खेती करने पर प्रतिबंध लगा दिया, मनरेगा के सभी काम बन्द कर दिये गये, 2015 से गॉंव के सभी विकास के कार्यों को बन्द कर दिया गया, जिससे गाँव के 51 आदिवासी परिवार परेशान होकर गॉव खाली करने  पर मजबूर हो गए, गांव में अभी भी 57 आदिवासी परिवार रह रहे है इन्हें भी हर दिन डराया धमकाया जा रह है। कभी जंगली हाथी गाँव में छोड़ दिया जा रहा  है  तो कभी वन विभाग के लोग ग्रामीणों को गाँव छोड़ने पर मजबूर कर रहे है। पेश है पन्ना से यूसुफ बेग की रिपोर्ट;

26 जून 2015 को सुबह 5 : 30 बजे जनका बाई का फोन आया कि गांव में पूरे लाव लश्कर के साथ पन्ना कलेक्टर शिव नारायण सिंह चौहान आये हैं और जन सुनवाई के लिये सभी को बुलाया है । हम उस वक्त कोटागिरी से एयरपोर्ट कोयम्बटूर के लिये रवाना हो रहे थे । हमने वहीं से अपने मीडिया के साथियों को फोन कर गांव के हालात को बताया और खबर कवर करने का आग्रह किया ।


गांव में सुबह सुबह जन सुनवाई की जा रही थी गांव के ज्यादातर लोग विस्थापन के विरोध में थे कलेक्टर पन्ना ने जन सुनवाई में विस्थापित होने और न होने वालों के हॉंथ उठवाये गये विस्थापन के पक्ष में 4 हॉंथ ज्यादा उठे उसका कारण यह था कि जनका बाई के कुछ साथी जन सुनवाई तक नहीं पहुंच पाये थे और उसी वक्त कलेक्टर पन्ना ने अपना फैसला सुना दिया कि गांव को विस्थापित कर दिया जाये ।

विस्थापन की 2 कैटागिरी बनाई गई जिसमें ए और बी, ए कैटागिरी में गांव में रहने वाले मूल निवासी और बी कैटागिरी में जिन लोगों की सिर्फ जमीने इस गांव में थी और वह रहते किसी और गांव में थे ।

अंततः 30 जून 2015 को गांव वालों के प्रति परिवार के एकाउण्ट में 7 लाख 60 हजार रू. की राशि ई पेमेन्ट कर दिया गया । उसके तुरन्त बाद ही गांव खाली करने के लिये दबाव बनाया जाने लगा जिसके तहत गांव में 2 हाथी डराने के लिये छोडे गये । जिसका विरोध गांव के सभी आदिवासियों ने किया और विरोध स्वरूप कलेक्टर पन्ना को ज्ञापन भी सौंपा गया । गांव वालों का साफ कहना था कि जब तक उनकी व्यवस्था कहीं और नहीं हो जाती वह गांव खाली नहीं करेंगे । गांव खाली कराने के लिये टाईगर रिजर्ब के अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा गांव के आदिवासियों को तरह तरह से धमकाया जाने लगा और ज्यादा दबाव बनाते हुए गांव से बिजली काट दी गई और डी.पी. उखाडकर गांव में अंधेरा कायम किया गया ।


वन अधिकार मान्यता कानून के तहत गांवों का विस्थापन तब तक नहीं किया जा सकता जब तक वन अधिकार सेटेल नहीं हो जाते । इस गांव में 36 दावे व्यक्तिगत किए गये थे जिनमें से 13 लोगों को वन अधिकार कानून के तहत पट्टे दिये गये बाकी 26 दाबों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई निस्तार के दावों में रोड हैण्ड पम्प के पट्टे दिये गये एवं सामुदायिक वन अधिकारों को अभी तक व्यवस्थित नहीं किया गया । इसी को वेस बनाते हुए हमने हाई कोर्ट में 27 अगस्त 2015 को रिट दायर की जिसे हाईकोर्ट नें एक्सेप्ट करते हुए सरकार को चार हफ्ते का समय जबाब पेश करने को कहा और 28 सितम्बर को सुनवाई की तारीख दी गई । सरकार, जिला प्रशासन, वन विभाग, टाईगर रिजर्ब की बौखलाहट बड गई क्योंकि इस विस्थापन की प्रक्रिया में बहुत सारी खामियॉं हैं ।

1 करोड से भी अधिक का भ्रष्टाचार होने की सम्भावना है । सरकार यह चाह रही है कि 28 सितम्बर के पहले गांव को खाली कराकर ही हाईकोर्ट को जबाब भेजा जाये । इसी के तहत गॉंव वालों को डरा धमका कर गांव खाली कराने के उद्देश्य से 19 सितम्बर 2015 को सुबह 10 बजे जनका बाई का फोन आया उसने कहा कि मडला थाने के दरोगा रावत जी और टाईगर रिजर्ब के अधिकारी लाल बाबू और उनके साथ और भी फारेस्ट गार्ड आये हैं और कह रहे हैं कि गांव खाली करो वर्ना पुलिस फोर्स बुलाकर तुम्हारा सामान बाहर फिकवा जे.सी.बी से घरों को गिरा दिया जायेगा । हमने जनका बाई से हाईकोर्ट में केस चलने की बात उनको बताओ उसने कहा कि हमने कहा है लेकिन वह लोग कह रहे हैं कि कोर्ट का आदेश दिखाव तब हम मानेंगे, और इन लोगों ने दीपावली तक गांव खाली करने के लिये कहा है । हमने कहा कि तुम लोग डटे रहे अगर ज्यादा दिक्कत समझ में आये तो हमें फोन करना हम वहॉं पहुंच जायेंगे ।

एक घण्टे बाद 11 बजे पुनः जनका बाई का फोन आया कि सर यहॉं तो पूरी फोर्स महिला फोर्स और सभी अधिकारी लगभग 100 से भी अधिक गार्ड गांव में आ गए हैं क्या करें हमने कहा तुम चिन्ता मत करे पुरूषों को
बाहर मत निकलने देना पूरा मोर्चा महिलायें ही सम्हालें जब तक हम गांव नहीं पहुंच जाते ।

हमने अपने साथियों से बात की और मीडिया के साथियों से भी बात की कलेक्टर पन्ना और एस.पी. पन्ना का कहना था कि पैसा लिया है तो गांव खाली करना ही पडेगा लेकिन इस प्रकार की कार्यवाही से सभी ने अपनी अनभिज्ञता जताई । लेकिन गांव में तो दहशत का माहौल व्याप्त था हमने गांव जाने की ठान ली थी तभी समर्थन संस्था के ज्ञानेन्द्र तिवारी और प्रदेश टूडे अखवार के पन्ना ब्यूरो चीफ साथ में गांव चलने तैयार हुए और हम तीनो गांव की ओर चल पडे ।

पन्ना से गांव तक पहुंचने का समय हमारे लिये बहुत ही कठिन था क्योंकि मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे और साथियों की सुरक्षा गांव के भोले भाले आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर हम अंदर ही अंदर सोच रहे थे लेकिन यह दृण संकल्प था कि आज जो भी हो निपटना तो पडेगा ही और इसी उधेड धुन में अंततः उमरावन गांव आ ही गया तो देखा टाईगर रिजर्ब की फोर्स ने पूरे गांव को घेरा हुआ है बडे अधिकारी एस.डी.ओ. टाईगर रिजर्ब खजुराहो, एस.डी.ओ. टाईगर रिजर्ब मडला, एस.डी.ओ. टाईगर रिजर्ब पन्ना स्कूल के सामने वाले मैदान में कुर्सियों पर तो स्कूल में महिला फोर्स नें स्कूल पर कब्जा किया हुआ था। 6-7 गाडियां गाडियों के आस पास चारों तरह फोर्स ही फोर्स दिख रही थी । हम तीनों सीधे उनके ही पास जाकर रूके गांव के आदिवासियों में उस समय ताकत और दृणता देखने मिली जब उन्हेंने हमें गांव में देखा । हमारे मीडिया के साथी करण त्रिपाठी नें बडी सूझ बूझ से काम लेते हुए एस.डी.ओ. फारेस्ट खजुराहो से बात करना शुरू किया । हमें गांव में देख पूरी फोर्स सक्ते में थी । हम तीनों उनसे पूछ रहे थे की इतने लाव लश्कर के साथ गांव को घेरने की क्या वजह है तो बताया कि हम गांव वालों को पैसा दे चुके हैं और गांव वालों को अब गांव खाली कर देना चाहिए वर्ना हम खाली करा लेंगे ।

आधा घण्टे की बात चीत के बाद एस.डी.एम. तहसीलदार, आर.आई. पन्ना अपनी तैयारी के साथ गांव पहुंचे जैसी ही इन अधिकारियों ने हमें गांव में पाया तो उनकी स्थिति देखने योग्य थी क्योंकि चोर का दिल बहुत कमजोर होता है यह लोग चोरी चोरा दबाव बनाकर गांव खाली कराने के उद्देश्य से आये थे लेकिन इनके मंसूबों पर पानी फिर चुका था क्योंकि यह समझ गये थे कि अब जोर जबरदस्ती नहीं चल पायेगी । तभी हमने सभी गांव वालों को इकट्ठा होने के लिये आवाज लगार्द सभी आदिवासी महिला पुरूष बच्चे नौजवान सभी इकट्ठा हो गए । एस.डी.एम. हमसे गांव खाली कराने में सहयोग का आग्रह करने लगे । हमने कहा कि विस्थापन की प्रक्रिया में बहुत सारी खामियॉं हैं जब तक इन खामियों को पूरा नहीं किया जाता तब तक आपका गांव खाली कराना इन आदिवासियों के साथ अन्याय है और हमारी रिट भी हाईकोर्ट जबलपुर में लगी है और हाईकोर्ट ने सरकार को जबाब पेश करने के लिये 4 हफ्ते का समय दिया है । 28 सितम्बर को सुनवाई है ।

लेकिन इन अधिकारियों ने कहा कि ठीक है गणेश विसर्जन के बाद आपको गांव खाली करना पडेगा हम भी यह कोशिस करते हैं कि कोई रेवेन्यू की जमीन मिल जाये तो आप लोगों के घर बनाने के लिये हम जमीन देने का प्रयास करेंगे ।

अब सवाल यह है कि उमरावन गांव के प्राथमिक स्कूल में 24 बच्चे हैं माध्यमिक स्कूल बडौर में 7 बच्चे हैं माध्यमिक स्कूल मझगवां में 2 बच्चे और हायर सेकेन्डरी और स्नातक कर रहे 4 बच्चे पन्ना कालेज में हैं बीच सत्र में गांव को बगैर किसी व्यवस्था किए हटाना कहां तक जायज है । इन बच्चों की शिक्षा का क्या होगा । गांव में सिलीकोसिस से पीडित 8 मजदूर हैं गांव में 16 विधवायें हैं सरकार ने जिला प्रशासन ने इनके भविष्य के लिये कोई भी योजना नहीं बनाई है । इन आदिवासियों का क्या होगा । लेकिन गांव वालों का कहना है कि अब हम गांव किसी भी कीमत पर नहीं छोडेंगे । गांव में अभी 57 परिवार हैं । 51 परिवार गांव छोड कर चले गये हैं । गांव में अभी भी 37 बच्चे अध्ययनरत हैं ।


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