दलित बजट अधिकार रैली : 9 जुलाई 2015, दिल्ली सचिवालय !

  दलित बजट का 2409 करोड़ वापस करो !
  S.C.S.P का पैसा बच्चों, महिलाओं तथा अन्य समाजिक कार्यो पर खर्च करें !

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के मानवीय तथा मौलिक हकों के साथ-साथ आर्थिक और राजनैतिक हकों एवं भागीदारी के लिए भी आंदोलन किया, जिसके कारण स्वतंत्र भारत के संविधान में संवैधानिक रूप से अधिकार प्राप्त हुआ, एवं उनके हक एवं अधिकार के लिए विशेष प्रावधान हुआ। भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप भारत सरकार ने केन्द्र के साथ-साथ राज्यों में विस्तृत योजना संसाधनों के रूप में अनुसूचित जनजातियों के लिये 1974 में जनजाति उपयोजना (SCP) तथा 1979 में अनुसूचित जाति के लिए विशेष घटक योजना (TSP) आरम्भ किया गया। इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति की आबादी के अनुपात में धन तथा संसाधनों को आरक्षित किया जाना है एवं आबंटित धनराशि किसी अन्य मद में न खर्च की जा सके  और न ही वापस किया जा सकता है और न ही समाप्त किया जा सकता है
दिल्ली बजट 2015.. 2016 अनुसूचित जाति उपयोजना आवंटन एक नज़र में-
कुल बजट .................................................................. 41,129.00
योजना बजट ................................................................19,000.00
अनुसूचित जाति जनसँख्या ................................................   16.92
अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत देय राशि ..........................   3,214.80
अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत आवंटित राशि......................   805.36
अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत प्रतीशत आवंटन ..................      4.24
अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत अस्वीकृत राशि ...................   2,409.44
अनुसूचित जाति उपयोजना . बजटीय आवंटन विभागानुसार एक नज़र में (करोड़ में)
विभाग           2015.16 बजट करोड़ में
शिक्षा            ...................    69.46
चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ ..........    49.23
समाज कल्याण .......................    293.50
उद्योग....................................    0.02
विकास......................................  31.90
शहरी विकास लोक निर्माण............... 361.25
कुल                             805.36
मौजूदा बजट में अगर विभागानुसार आवंटन देखा जाये तो दिल्ली सरकार ने अनुसूचित जाति उपयोजना का आवंटन कुल 7 विभागों में किया है ए जबकि राज्य में 13 विभाग हैं द्य ज्यादा गहराई पर जाने में बजटीय आवंटन की सच्चाई और भी साफ़ होती है और अनुसूचित जाति उपयोजना की कुल राशि 805 करोड़ है जिसमे से मात्र 231 करोड़ ही सीधे तौर पर दलित विकास के काम आ सकेगा बाकी की बजट राशी केवल सिर्फ दिखावा है और दलित समाज के साथ सामाजिक आर्थिक भेदभाव है द्य मौजूदा बजट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी की ए कुल 105 योजनाओं में से सिर्फ 30 योजनाओं सीधे तौर पर दलितों को लाभ मिलेगा
जैसा की आप को मालूम है की दिल्ली राज्य में पिछले 7 सालों से चल रहे अभियान से यह पता चला है कीं दिल्ली सरकार ने कुल मिलकर 15734 करोड़ रुपये दलितों के लिये कम दिए और जो धनराशी पिछले वर्षो में खर्च होनी थी उस धनराशी को भी सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स, सड़क व अन्य मदों में खर्च किये । दिल्ली राज्य में दलित समाज की हालत विकास के सभी मानदंडो से काफी दूर है और शिक्षा ए स्वास्थ्य ए रोजगार ए बस्ती विकास एआवास इत्यादि की व्यवस्था न के बराबर हैं।योजना आयोग के दिशानिर्देश के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में अनुसुचित जाति का एस.सी.पी. बजट में धन राशी होनी चाहिए। लेकिन पिछले 8 सालों से दिल्ली के बजट में 1.64 से 4.08 तक ही आवंटन हुआ।
जनगणना  2011 के अनुसार दिल्ली में अनुसुचित जातियों की जनसंख्या 28,12,309 है जो दिल्ली की कुल जनसंख्या का 16.92 प्रतिशत है,
सरकार ने अपनी ही रिर्पोटों में कहा है की दिल्ली में अनुसुचित जाति के लोगों की आर्थिक, समाजिक एवं शैक्षिणिक स्थिती अच्छी नही है। उसके बाद भी सरकार के नियम कानुन के अनुसार ¼SCSP½ का बजट जनसंख्या के बराबर होना चाहिए लेकिन आज तक ऐसा हो न सका।

अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत मिले अधिकारों को सुरक्षित करने हेतु निम्नलिखित मांगे हैं -

  1. अनुसूचित जाति उपयोजना बजट का 2409 करोड़ तत्काल प्रभाव से वापस किया जाये और दलित विकास मे लगाया जाये
  2. नवीनतम जनगणना आकड़ों के अनुसार अनुसूचित जाति की आबादी के अनुपात में वार्षिक योजना के कुल प्रारूप में से उनके विकास के लिए मंत्रालयों/विभागों से भी पहले बजट मदों को आवंटने का  निर्देश हो। 
  3. राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत एक प्राधिकरण का गठन हो!
  4. गठित प्राधिकरण में ‘‘लैंगिक प्रकोष्ठ’’(Gender Cell) को भी शामिल किया जाना चाहिए  तथा अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए नवीन योजनाओं का सृजन किया जा सके
  5. विभागों को निर्देश दिया जाए कि वे अनुसूचित जाति की महिलाओं के विकास एवं सशक्तिीकरण को प्राथमिकता दें।
  6. विशेष प्राधिकरण केन्द्र एवं राज्य स्तर पर संस्थानिक संगठन के प्रति समर्पित हो जो कि SCSP बजट का आवंटन करे और  अनुसूचित जाति की विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विभागों को फण्ड दे
  7. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए होने वाली प्लानिंग, योजनाओं के क्रियान्वयन एवं मूल्यांकन में इस जाति के विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
  8. योजनाओं के लिए आवंटित फण्ड अहस्तांतरणीय (non-divertible) एवं न समाप्त होने वाला (non-lapsable)  होना चाहिए।
  9. जहां सामान्य रूप से स्कीमें लागू हैं वहां SCSP के अन्तर्गत आवंटन न किया जाए। 
  10. जहां दिशानिर्देशों के अनुसार आवंटन एवं खर्च का अनुपालन नहीं हो रहा है वहां  अनुसूचित जाति के विकास के लिए उन विभागों/स्कीमों/कार्यक्रमों के लिए प्राधिकरण को पुनः आवंटन का अधिकार हो।  
  11. वित विभाग में एक सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति हो जो सिर्फ SCSP का काम देखे। 
  12. SCSP की सभी योजनाओं के योजनाओं की जानकारी ए प्रचार प्रसार नियमित रूप से हो

सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजनायें-
  1. हर एक विधानसभा क्षेत्र में अनुसुचित जाति के बच्चों के लिए स्कुल के साथ छात्रावास होना चाहिए तथा उसी में काचिंग की व्यवस्था होनी चाहिए
  2. अनुसूचित जाति के लड़कों और लड़कियों को 12वीं कक्षा तक उच्च गुणवत्ता वाले आवासीय स्कूल
  3. अनुसूचित जाति के लड़कों और लड़कियों को व्यावसायिक एवं अन्य उच्च शैक्षिक संस्थाओं में चयन हेतु प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए  स्कूल के अंतिम वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाली कोचिंग स्कीमें;
  4. व्यवासायिक शिक्षा - जैसे इंजीनियरिग, नर्सिंग, मेडिकल, व्यापार प्रशासन, प्रबंधन अध्ययन आदि का अध्ययन करने वाले अनुसूचित जाति के सभी लड़को और लड़कियों को छात्रवृत्ति;
  5. अनुसूचित जाति के सभी परिवारों को सभी सुविधाओं से युक्त गृह-स्थलों और पर्याप्त मकानों की व्यवस्था;
  6. उचित राशन की दुकानों, निजी दुकानों और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था।
  7. सभी छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए स्वास्थ्य देख-रेख सुविधाएँ अनुसूचित जाति में, विशेष रूप से अनुसूचित जाति के बच्चों और महिलाओं में नवजात मृत्युदर, मातृत्व मृत्युदर, कुपोषण, एनीमिया को घटाने, तथा उन्हें सामाजिक रूप से उन्नत जातियों (एसएसी) के स्तर पर लाने की स्कीमें,
  8. पेंशन सुविधाएँ (वृद्धावस्था, विधवा महिलाएँ, एकल महिलाएँ आदि)
  9. सिर पर मैला ढोने वालों की नई भर्ती को रोकने के उपाय तथा मल-गंदगी साफ करने के लिए आधुनिक मशीन लाकर अन्य मल-निकासी सेवाओं का मानवीकरण.
  10. दलित बस्तियों में केद्रों की व्यवस्था की जाये जिससे कौशल विकास, प्रशिक्षुता विकास, आरक्षणों को भरने तथा अनुसूचित जातियों को प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता के लिए मुफ्त प्रशिक्षण मिले
  11. अनुसूचित जातियों के समुदायों को अधिनियम में दिए उनके अधिकारों के लिए अनुसूचित जाति समुदायों के गैर सरकारी संगठनों को प्रोत्साहन  और समर्थन देने की स्कीमें
  12. स्कीमें जो अनुसूचित जातियों को सीधे लाभ पहुंचाती हैं तथा ज्ञान अर्जित करने, विकास करने, नविनीकरण करने और उत्पादन करने से संबंधित हैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्राथमिक अनुसंधान परियोजनाओं, निजी अनुसंधान संस्थान स्थापित करके, अनुसंधान परियोजनाओं और प्रकाशनों के लिए फेलोशिप आदि।
  13. स्कीमें जिनसे अनुसूचित जातियों को सीधे मिले और भौतिक परिसंपत्तियों के अर्जन, स्वामित्व और निर्माण से संबंधित हैं कृषि भूमि का स्वामित्व , आवास और कब्रिस्तान/दाह-संस्कार हेतु भूमि, वाणिज्य और व्यापार करने हेतु निजी भूमि, कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में व लोक शैक्षिक संस्थाएं चलाने हेतु निजी भूमि आदि।
  14. ठेकागत व्यवसाय, कृषि विकास, स्व-रोजगार, वाणिज्यिक, ठेकागत परियोजनाओं, वाणिज्यिक फिल्म निर्माण आदि के लिए रियायती ब्याज के साथ विशेष ऋण।
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