आस्ट्रेलिया में अडानी के खनन-प्रोजेक्ट से प्रभावित अश्वेत मूलनिवासियों ने छेड़ा आंदोलन

कार्पोरेट हितों के लिए आदिवासियों, ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों की ज़िन्दगियों से खिलवाड़ का दौर भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में जारी है और शोषक जमात के तार राष्ट्रीय सीमाओं के पार जाकर एक-दूसरे से जुड़ते हैं. जहां भारत के जंगलों, खेतों और खदानों को विदेशी कार्पोरेट के मुनाफे  चारागाह में बदल दिया गया है वहीं भारत के नए-पुराने थैलीशाह भी अफ्रीका से लेकर आस्ट्रेलिया तक इसी तरह की लूट में अपना टुकड़ा ढूंढ रहे हैं.

मोदी के चहेते अडानी ने आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में कोयले की जिस खदान के लिए ठेका पाया है, वह वहां के स्थानीय वांगन और जगालिंगौ मूलनिवासियों की ज़मीन, पर्यावरण और ज़िंदगी और तहस-नहस कर देने वाला है. साथ ही, दुनिया के दुर्लभ आकर्षणों ' ग्रेट बैरियर रीफ' - सदियों तक जीवाश्मों और मूँगे के इकट्ठा होने से निर्मित होने वाली नाज़ुक समुद्रतटीय बनावट - को भी खतरा पहुंचने वाला है.


आस्ट्रेलिया के शासकवर्ग - डेढ़ से दो सौ साल पहले यूरोप से आए श्वेत लोगों - ने पुराने कबीलों के साथ न सिर्फ अतीत में बर्बर व्यवहार किया बल्कि अब लोकतंत्र और घोषित बराबरी के बावजूद उनको हाशिये पर धकेले हुए हैं. इसीलिए उनकी ज़िंदगी और प्राकृतिक सम्पदा का सौदा अडानी के साथ करने में उनको कोई हिचक नहीं हुई.

इस मुद्दे से जुडी यह बात भी अहम है कि लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय बैंकों  द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए अडानी को उधार देने से मना करने पर नरेंद्र मोदी ने भारतीय नागरिकों का पैसा इस परियोजना के लिए सस्ते दर पर उपलब्ध कराया है. अडानी को यह सुविधा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सस्ते लोन के माध्यम से दी जा रही है. यह खुला भ्रष्टाचार है.

जिस शोषक मशीन में आज आस्ट्रेलिया के कबीलाई समुदायों की गरदन फांसी है, उसके ही कल-पुर्जे हमें भी अपना शिकार बना रहे हैं. नीचे दिए गए वीडियो में आस्ट्रेलिया में अडानी के प्रोजेक्ट और उसके सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों की चर्चा की गई है. साथ ही आप इस लिंक पर जाकर  ऑनलाइन अपील पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं - http://communityrun.org/p/stopadani
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