राज्यसत्ता लोकतंत्र से डरती है - लोक अधिकार मंच, गडचिरोली

“जनता के अधिकारों के संघर्ष की सभा पर पुलिस द्वारा दमन.... ये तो लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की हत्या...”
हम निरंकुश राज्य दमन की निंदा करते है – लोक अधिकार मंच, गडचिरोली.

“महाराष्ट्र ग्राम वन नियम 2014” व “जमीन अधिग्रहण अध्यादेश” इन जन विरोधी नीतियों के विरोध में लोक अधिकार मंच, गडचिरोली द्वारा आयोजित धरणे आंदोलन और सभापर पुलिस प्रशासन ने रोक लगायी, संघर्ष में उतरे कार्यकर्त्या, जनता को पुलिस ने हिरासत में लिया.

पेसा कानून तथा वन अधिकार कानून के अधिकारों को छिन लेने की साजिश महाराष्ट्र सरकार “ग्रामवन नियम 2014” द्वारा कर रही है. ग्रामसभाए इन नियमो का पुरजोर विरोध कर रही है. मौजूदा केंद्र सरकार ने जारी किये “भूमि अधिग्रहण अध्यादेश” से आदिवासी, किसानो की जमीने छीनकर पूंजीपतियों पर नौछावर करने के लिए सत्ताधारी उतावले हो रहे है.

इन जन विरोधी नीतियों के खिलाप गडचिरोली (महाराष्ट्र) में लोक अधिकार मंच के रूप में संघर्षशील संगठनो, पार्टियों, संस्थायो, व्यक्तियों के सामूहिक मोर्चे का निर्माण किया गया. ग्रामसभायों से ठराव भेजे गए, राष्ट्रपति तथा राज्यपाल महोदय को ज्ञापन दिए गए. पर बहरे का ढोंग की हुयी सत्ता को आवाज सुनाने के लिए ७ में २०१५ को धरने आन्दोलन और सभा का आयोजन किया गया था. सभा को पहले मंजूरी दी गयी, पर ठीक सभा के दिन पुलिस प्रशासन ने मंजूरी नकारी, साथ में सभा के लिए पेंडाल, स्पीकर नहीं मिलना चाहिए इसके पुख्ता इंतजाम किये. चौक में पुलिस ने नाका बंदी की, सभा के लिए आये हुए कर्यकर्तायो, ग्रामसभयों के प्रतिनिधी तथा आयोजको को गिरफ्तार करके पुलिस थाने ले जाया गया.

फिर भी लोग जमा होना शुरू रहा. नियोजित स्थल पर सभा नहीं हो पाने के कारन लोगो ने सीधा जिल्हाधिकारी कार्यालय का रुख किया. धरने आन्दोलन जिल्हा कार्यालय के गलियारों में भी शुरू रखा गया, और पुलिसि दमन को डरे बैगैर जिल्हा कार्यालय के बारह सभा पूरी की गयी. “ग्राम वन नियम २०१४” तथा “भूमि अधिग्रहण अध्यादेश” का विरोध किया गया, तथा इसके विरोध में आन्दोलन और तेज करने की शपथ ली गयी.

संघर्ष जारी है....
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