जल सत्याग्रह का 32वां दिन : फिर दिखाईं अतिक्रमित जमीने

आज 12 मई को 32 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, लोगों के पैर गलने लगे , हालत ख़राब होने लगी,  पैर लहुलुहान होने लगे , बुखार की शिकायत और अन्य तकलीफे होने लगी लेकिन सरकार की बेरुखी से और असंवेदनशीलता से लोगों में रोष फैलता  जा  रहा है  । दूर दूर से आ कर लोगों ने जल सत्याग्रह को अपना समर्थन व्यक्त किया । वही देश के  100 प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर  इस मुद्दे पर लोगों को न्याय देने  की माँग की। वही  दूसरी तरफ  एक महीने से जारी सत्याग्रह को जबरन  उठाने की तैयारी चल रही है ।   नर्मदा बचाओ आन्दोलन की विज्ञप्ति;

हीरा पुर की पथरीली जमीन
ग्राम घोगलगाँव में ओंकारेश्वर डूब प्रभावितों का जल सत्याग्रह 31 दिन बाद भी जारी रहा । स्वास्थ्य बद से बदतर होता जा रहा है पर अपने हक के लिए लड़ने को अभी भी डटे है । हालत ऐसे हो गए हैं की लोगों को पानी में खड़े रहना मुश्किल हो रहा है फिर भी बिना मांगे पूरी हुए कोई भी हटने को तैयार नहीं है ।
हीरापुर की अतिक्रमित जमीन

11 मई को शासन द्वारा विस्थापितों के एक दल को पंधाना तहसील के ग्राम हीरापुर में जमीनें दिखाने ले जाया गया।यह जमीने बहुत ही हलकी थी और अनेक आदिवासियों का इन पर पिछले 40-50 साल से कब्ज़ा है । यह वह आदिवासी है जिनकी जमीन सूक्ता डैम के लिए अधिग्रहित की गयी थी । यह लोग वही इन जमीनों पर कब्ज़ा कर अपनी जीविका चला रहे है । इन जमीनों की मिट्टी निकाल कर बाँध बनाने के लिए उपयोग में लायी गयी थी जिसके कारण इन जमीनों में उपजाऊ परत नहीं है । जमीन निरिक्षण के दौरान कुछ अतिक्रमणकारी मोहन सिंह छगन, भीम सिंह छगन,सरदार सिंह भगवान सिंह, सुरेश कमल सिंह ,महेश रामसिंघ ,भारत सिंह छगन प्यार सिंह, कमल सिंह उपस्थित थे जिन्होंने लिखित पंचनामा दे कर अतिक्रमण की बात स्वीकारी है ।

कल राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता संजय सिंह घोगल गाँव में किसान मजदूर सम्मलेन में आ रहे है जिसमे बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है । साथ ही आम आदमी पार्टी के राज्य भर से कार्यकर्ताओं के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया है ।

पुलिस का विरोध सत्याग्रह स्थल पर

ग्राम घोगलगाँव में पुलिस बल का आना जाना लगा रहा जिसका सैकड़ों विस्थापित महिला पुरुषों ने जोरदार नारों के साथ विरोध किया।



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