कनहर बांध : सघर्ष जारी है !

14 अप्रैल 2015 को देश जब अम्बेडकर की 124वीं जयंती मना रहा था तब उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में कनहर बाँध का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर पुलिस गोली बरसा रही थी. सुन्दरी गाँव के आदिवासी नेता अक्कू खरवार को सीने में गोली लगी है और दर्जनों लोग पुलिस की गोलीबारी और लाठीचार्ज से बुरी तरह जख्मी हुए हैं. अभी आंदोलन के ताजा घटनाक्रम पर अशोक चौधरी का ब्यान आया है जिसे हम साझा कर रहे है;

साथियों,
कल पुलिस द्वारा की गई फायरिंग के बाद कुछ रुचिकर तथ्य सामने आए। जैसे-जैसे बांध से प्रभावित गांवों से बड़ी संख्या में लोग धरने पर पहुंचने लगे, पीएसी बल घटनास्थल से पूरी तरह से हट गया और उस स्थल पर, जहां 2000 से ज्यादा पुरूष और महिलाएं धरने पर बैठीं थीं, उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों से आई पुलिस को तैनात कर दिया गया। पुलिस वाले धरने पर आ रहे लोगों को रोक रहे थे लेकिन वह किसी भी तरह धरना स्थल पर पहुंचने कामयाब हो गए। धरने की वजह से विस्फोट और निर्माण कार्य को रोक दिया गया था।



शाम होते-होते बारिश के शुरु होने के साथ पूरे पुलिस बल को घटनास्थल से आश्चर्यजनक रूप से हटा दिया गया। यहां तक कि विभिन्न स्टेशनों से आये पूरे बल को वापस उनके स्टेशनों में भेज दिया गया। सब इसी सोच में पड़े थे कि यह कोई रणनीतिक चाल होगी या पराजय की स्वीकृति। इसीलिए लोग रात भर पुलिस या फिर माफिया के किसी प्रकार के हमले के प्रति चौकन्ने रहे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और रात शांति से बीत गई।

हालांकि देर रात यह पता चल गया कि पुलिस को इसलिए हटा दिया गया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। जिलाधिकारी 10 अप्रैल से मुख्यालय में नहीं थे और अतिरिक्त जिलाधिकारी कीसी भी तरह के पुलिस के सख्त कदम या बात-चीत की जिम्मेदारी अपने उपर लेना नहीं चाहते थे। अभी तक पुलिस बल बांध स्थल पर वापस नहीं आया है। उसे पासके एक सरकारी प्रशिक्षण संस्थान में रोक कर रखा गया है।

इस बीच जिलाधिकारी आज जिला मुख्यालय में लौट आए हैं। उन्होंने अखिल भारतीय वनकर्मी यूनियन की कॉमरेड रोमा को फोन करके बात-चीत के लिए आमंत्रित किया। लेकिन रोमा जी ने कहा कि अब उन्हें पहले स्थानीय नेतृत्व से बाच-चीत करनी होगी, क्योंकि नेतृत्व महिला प्रदर्शकारियों पर कल सुबह हुए हिंसक हमले और फायरिंग से नाराज है। वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर बिना किसी आदेश के हुए हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों को सजा देने और मामले की छान-बीन के लिए सीबीआई जांच बिठाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा बांध स्थल पर चल रहे काम को भी अधिकारिक रूप से रोकना होगा।

कुछ शुरुआती हिचकिचाहट के बाध जिलाधिकारी बांध स्थल पर आकर आंदोलन कर रहे लोगों का नेतृत्वकारी साथियों सुकालो गौंड, गंभीर प्रसाद, श्री प्रसाद, देवकली, भागमनी, राजकुमारी से बात करने के लिए तैयार हो गए। कैमूर क्षेत्र के अन्य संघर्ष समूह जैसे कि महान संघर्ष समिति, सिंगरौली भी आज धरने से जुड़ गए हैं। जिलाधिकारी को यह भी सूचित कर दिया गया है कि भूमि अधिकार आंदोलन गठबंधन से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 18 अप्रैल को सोनभद्र पहुंच रहा है जो जिला प्रशासन से सीधी बात-चीत करेगा। हमें उम्मीद है कि इससे कुछ सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। कन्हार बांध परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध हो रहा संघर्ष विजय प्राप्त करता दिख रहा है। जनसंघर्षों की विजय जिंदाबाद!


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